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राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क का कार्यान्‍वयन और प्रभाव

प्रविष्टि तिथि: 10 AUG 2026 3:50PM by PIB Delhi

केन्‍द्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 तैयार की है, जिसका उद्देश्य समग्र, बहुविषयक, लचीली और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा प्रदान करना है। यह नीति कौशल शिक्षा के एकीकरण को प्रोत्साहित करती है और पूर्व अधिगम की मान्यता के आधार के रूप में एक विस्तृत राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्‍यूएफ) की परिकल्पना करती है।

एनईपी 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप सरकार ने राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क को एक व्‍यापक क्रेडिट फ्रेमवर्क के रूप में मंजूरी दी है, जिसमें प्रारंभिक, स्कूली, उच्च तथा कौशल शिक्षा को शामिल किया गया है। एनसीआरएफ में सभी प्रकार के अधिगम आधारित गतिविधियों को क्रेडिट में परि‍वर्तित करने तथा आकलन के अधीन क्रेडिट प्रदान करने, उनके संचयन, स्‍टोरेज, अंतरण और उपयोग/प्राप्ति का प्रावधान है। यह कौशल सामान्य और अनुभवात्मक शिक्षा के बीच शैक्षणिक समकक्षता स्थापित करता है, साथ ही उनके भीतर और उनके बीच गतिशीलता को सक्षम बनाता है। एआईएसएचई 2023-24 में दी गई रिपोर्ट के अनुसार 700 से अधिक विश्वविद्यालयों और 7,500 से अधिक संबद्ध महाविद्यालयों ने एनसीआरएफ को अपनाया है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा में एनसीआरएफ के कार्यान्‍वयन के लिए व्‍यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में  उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क के संचालन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)” अधिसूचित की है। एसओपी के तहत किसी कार्यक्रम के कुल क्रेडिट का अधिकतम 50 प्रतिशत कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से अर्जित किया जा सकता है।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईएसएचई) ने अपनीअनुमोदन प्रक्रिया पुस्तिका (एपीएच) 2023-27 में एनसीआरएफ के अनुरूप तकनीकी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आपेक्षित योग्‍यता संबंधी मानदंड निर्धारित किए हैं। इसके तहत 10वीं कक्षा उत्तीर्ण तथा दो वर्षीय आईटीआई करने वाले विद्यार्थियों को अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी की किसी भी शाखा में डिप्लोमा पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष में प्रवेश के लिए पात्र बनया गया है। इसके अतिरिक्त, अभियांत्रिकी में दो-वर्षीय स्नातक डिप्लोमा (एनसीआरएफ स्तर 5.0) रखने वाले अभ्‍यर्थियों के लिए तृतीय वर्ष में पार्श्‍व प्रवेश का प्रावधान है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ने पूर्व अधिगम की मान्यता (आरपीएल) के लिए दिशानिर्देश विकसित किए हैं। इन दिशानिर्देशों में आरपीएल के निर्बाध कार्यान्‍वयन के लिए एक कार्य-योजना निर्धारित की गई है और औद्योगिक निकायों को अपने कार्यबल के लिए आरपीएल  आकलन करने का अधिकार दिया गया है। इससे आकलन प्रक्रिया  को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में सहायता मिलती है। विशिष्‍ट कौशल, दक्षताओं और अर्जित ज्ञान के अधिगम परिणामों के आधार पर क्रेडिट प्रदान किए जाते हैं।

सरकार के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप  भारत में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2014-15 के 23.7 से बढ़कर 2023-24 में 30 हो गया है। इस अवधि में महिलाओं का जीईआर 22.9 से बढ़कर 31.2 हो गया। जीईआर में वृद्धि के साथ उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों के नामांकन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उच्च शिक्षा में कुल नामांकन 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 4.50 करोड़ हो गया, जिससे उच्च शिक्षा प्रणाली में 1.08 करोड़ से अधिक विद्यार्थी जुड़े हैं।

एनईपी 2020 में भारतीय मूल्‍यों और परंपराओं में निहित ऐसी शिक्षा प्रणाली की परिकल्पना की गई है, जो सभी को गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा प्रदान करके भारत को एक न्यायसंगत और जीवंत ज्ञान-समाज में बदलने में प्रत्यक्ष योगदान दे। एनसीआरएफ का उद्देश्य सामान्य और कौशल शिक्षा के बीच समकक्षता और गतिशीलता स्थापित करके इस विजन में योगदान देना है,, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में आजीवन अधिगम, पूर्व अधिगम की मान्‍यता, एकाधिक प्रवेश एवं निकास और निरंतर व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित किया जा सके।

केन्‍द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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