विद्युत मंत्रालय
विद्युत वित्तीय स्थिरता और वहनीयता संतुलित करने हेतु ढांचा
प्रविष्टि तिथि:
10 AUG 2026 5:42PM by PIB Delhi
विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और विद्युत क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों के तहत एक व्यापक नीति और नियामक ढांचा स्थापित किया है। इस ढांचे में राष्ट्रीय विद्युत नीति, दर नीति तथा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और विद्युत नियामक आयोगों द्वारा निर्मित अधीनस्थ कानून शामिल हैं।
भारत में बिजली की दरें विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत विद्युत नियामक आयोगों द्वारा निर्धारित की जाती हैं। ये आयोग केंद्र सरकार द्वारा तैयार राष्ट्रीय दर नीति का पालन करते हैं। राज्य विद्युत नियामक आयोग बिजली खरीद, पारेषण, वितरण और आपूर्ति लागतों को ध्यान में रखते हुए खुदरा दरें निर्धारित करते हैं। राज्य सरकारें राज्य आयोग द्वारा निर्धारित दर में घरेलू उपभोक्ताओं सहित किसी भी वर्ग के उपभोक्ताओं को सेवा पर वित्तीय सहायता - सब्सिडी दे सकती हैं।
केंद्र सरकार ने बिजली की लागत कम करने की कई पहल की हैं। इसके तहत वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा बिजली की प्रतिस्पर्धी खरीद संबंधी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। वितरण लाइसेंसधारियों को प्रतिस्पर्धी मूल्यों पर बिजली एक्सचेंजों से बिजली खरीदने की सुविधा दी गई है। घरेलू कोयले के उपयोग में स्थिति अनुकूलता योजना के तहत, विद्युत वितरण लाइसेंसधारियों को बिजली आपूर्ति करने वाले संयंत्रों को सस्ते कोयले के उपयोग की सुविधा दी गई है। बिजली वितरण में कम लागत वाले अंतरराज्यीय उत्पादन केंद्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना – आरडीएसएस के तहत तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान कम करने के लिए वितरण लाइसेंसधारियों को प्रोत्साहन भी दिया गया है।
राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2026 के मसौदे में प्रस्ताव है कि वितरण लाइसेंसधारक न्यूनतम प्रणाली लागत पर आधारित विद्युत खरीद सुनिश्चित करने हेतु संसाधन पर्याप्तता योजनाएं तैयार करें। इसमें यह भी प्रावधान है कि मांग/निश्चित शुल्क द्वारा निश्चित लागतों की वसूली धीरे-धीरे हो, ताकि दर संयोजन आपूर्ति की लागत को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करे और कुशल खपत को बढ़ावा दे। मसौदा नीति में यह भी प्रस्ताव है कि ईंधन लागत सहित बिजली की खरीद लागत में होने वाले बदलावों को स्वचालित मासिक ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन – एफपीपीसीए तंत्र द्वारा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। इसके अलावा, इसमें उपभोक्ताओं पर बिजली की खरीद लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव कम करने के लिए स्थिरीकरण कोष स्थापित करने का विचार है।
मसौदा नीति में प्रावधान है कि राज्य विद्युत नियामक आयोग सुनिश्चित करें कि नियामक परिसंपत्तियां निर्मित किए बिना, दरें धीरे-धीरे आपूर्ति की विवेकपूर्ण लागत प्रतिबिंबित करें। इसमें प्रस्ताव है कि यदि दर आदेश निर्धारित समय सीमा के भीतर जारी नहीं किए जाते, तो समय पर वार्षिक दर संशोधन किए जाएं, जिसमें उपयुक्त सूचकांक-आधारित तंत्र शामिल हों, जिससे वितरण लाइसेंसधारियों की वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के माध्यम से उपभोक्ता संरक्षण सुदृढ़ बनाया गया है। इसमें नए विद्युत कनेक्शन, आपूर्ति गुणवत्ता और विश्वसनीयता, मीटरिंग, बिलिंग, शिकायत निवारण, निर्दिष्ट सेवा कमियों के लिए मुआवजा और उपभोक्ता-केंद्रित सेवा वितरण मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2026 के मसौदे में प्रस्ताव है कि वितरण लाइसेंसधारी सातों दिन चौबीस घंटे विश्वसनीय, किफायती और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करें और मजबूत ऑनलाइन शिकायत पंजीकरण, निगरानी और निपटान तंत्र द्वारा शिकायत निवारण मजबूत बनाएं, जिसमें उपभोक्ता शिकायत निवारण मंचों और लोकपाल द्वारा आभासी माध्यम से सुनवाई शामिल हो।
केंद्र सरकार ने पहले ही दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीजीजेवाई), एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस), प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) जैसी योजनाओं और मौजूदा पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत राज्यों के प्रयासों में पूरक योगदान दिया है, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति प्रदान करने में मदद मिल सके।
इसके अतिरिक्त, बिजली वितरण लाइसेंसधारियों को समर्थन के लिए, पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के अलावा, कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:
- विद्युत क्षेत्र में विशिष्ट सुधार के लिए राज्य सरकारों को सकल घरेलू उत्पाद के 0.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण लेने की अनुमति दी गई है।
- राज्यों के स्वामित्व वाली बिजली कंपनियों को ऋण स्वीकृत करने के लिए अतिरिक्त विवेकपूर्ण मानदंड निर्धारित किया गया है, जो बिजली वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुरूप प्रदर्शन पर निर्भर हैं।
- ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन – एफपीपीसीए और लागत-अनुरूप दर के लिए नियम बनाए गये हैं, ताकि बिजली की आपूर्ति विवेकपूर्ण लागतों से ग्राहकों तक पहुंचायी जा सके।
- सब्सिडी के उचित लेखांकन और समय पर भुगतान संबंधी नियम और मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है।
(iii) नवीकरणीय ऊर्जा का संयोजन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए उपाय परिशिष्ट में संलग्न हैं।
(iv) राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2026 का मसौदा स्मार्ट मीटरिंग, नियमित ऊर्जा लेखांकन, भौगोलिक सूचना प्रणाली-आधारित परिसंपत्ति मानचित्रण और उपभोक्ता अनुक्रमण द्वारा एकल-अंकीय कुल तकनीकी और वाणिज्यिक हानि प्राप्त कर विद्युत क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने की दीर्घकालिक भविष्य योजना प्रदान करती है। यह वितरण लाइसेंसधारियों के कॉर्पोरेट प्रशासन को मजबूत करने, साझा वितरण नेटवर्क आरंभ करने और वितरित नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और वाहन-से-ग्रिड प्रौद्योगिकियों का एकीकरण सुगम बनाने के लिए वितरण प्रणाली ऑपरेटरों – डीएसओ की स्थापना भी प्रस्तावित करता है। प्रभावी पारेषण क्षमता विस्तार और अधिक नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत करने के लिए, मसौदा नीति में स्थिति अनुकूल एसी पारेषण प्रणाली, डायनेमिक लाइन रेटिंग, जहां उपयुक्त हो वहां भूमिगत केबलिंग, सरलीकृत उपयोग-आधारित पारेषण कनेक्टिविटी, सिंक्रोनस कंडेंसर के तौर पर पुराने थर्मल जनरेटिंग स्टेशनों के इस्तेमाल और उपयुक्त ग्रिड के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की त्वरित तैनाती जैसी प्रौद्योगिकी अपनाकर पारेषण नेटवर्क का आधुनिकीकरण का विचार है।
ईंधन की कीमतों या बिजली की मांग में बदलाव से उपभोक्ता शुल्कों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन राज्य विद्युत नियामक आयोगों द्वारा लागू शुल्क विनियमों के अनुसार किया जाता है। इसमें ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन तंत्र भी शामिल है। उचित नियामक जांच के बाद ही शुल्कों द्वारा इसकी वसूली की अनुमति दी जाती है।
केंद्र सरकार ने सस्ती, विश्वसनीय और संवहनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं:
- राष्ट्रीय विद्युत योजना (उत्पादन) के अनुसार, 2031-32 में स्थापित उत्पादन क्षमता 874 गीगावाट रहने की संभावना है। उत्पादन क्षमता अनुमानित मांग से अधिक रखने के उद्देश्य से, सभी राज्यों ने केंद्रीय विद्युत एजेंसी के परामर्श से अपनी संसाधन पर्याप्तता योजनाएं तैयार की हैं, जो 10 वर्षीय गतिशील रोलिंग योजनाएं हैं जिनमें विद्युत उत्पादन के साथ ही विद्युत खरीद नियोजन भी शामिल है।
- ii. सभी राज्यों को सलाह दी गई कि वे अपनी संसाधन पर्याप्तता योजनाओं के अनुसार, सभी उत्पादन स्रोतों से उत्पादन क्षमताएं सृजित करने/अनुबंध की प्रक्रिया आरंभ करें।
विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने निम्नलिखित क्षमता संवर्धन कार्यक्रम शुरू किए हैं:
ए. तापीय विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि: वर्ष 2035-36 तक अनुमानित तापीय (कोयला और लिग्नाइट) क्षमता की आवश्यकता लगभग 3,15,000 मेगावाट है, जिसे पूरी करने के लिए, विद्युत मंत्रालय की कम से कम 1,05,000 मेगावाट अतिरिक्त कोयला और लिग्नाइट आधारित तापीय क्षमता स्थापित करने की योजना है।
इसी अनुसार, अप्रैल 2023 से 30 जून 2026 तक लगभग 21,080 मेगावाट की तापीय क्षमता परियोजनाएं आरंभ की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, 47,545 मेगावाट की तापीय क्षमता (जिसमें 4,845 मेगावाट की संकटग्रस्त तापीय ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं) अभी निर्माणाधीन है। 16,000 मेगावाट के लिए ठेके दिए जा चुके हैं और इनका निर्माण कार्य शुरू होना है।
बी. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को 2026-27 से 2031-32 की अवधि में लगभग 16,448 मेगावाट जलविद्युत क्षमता वृद्धि का अनुमान है। इसमें से 30.06.2026 तक 400 मेगावाट परियोजना कार्यान्वित हो चुकी हैं और अभी 12,973 मेगावाट परियोजना निर्माणाधीन है।
सी. परमाणु क्षमता में वृद्धि: 8,000 मेगावाट की परमाणु विद्युत परियोजना निर्माणाधीन है और इसे 2031-32 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 5,600 मेगावाट की परमाणु विद्युत उत्पादन परियोजना अनुमोदन के विभिन्न चरणों में है।
डी. नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता संवर्धन: 1,47,720 मेगावाट नवीकरणीय क्षमता, जिसमें 119,580 मेगावाट सौर (हाइब्रिड-सौर सहित) और 27,720 मेगावाट पवन (हाइब्रिड-पवन सहित) निर्माणाधीन है, जबकि 44,440 मेगावाट सौर परियोजना सहित 47,830 मेगावाट नवीकरणीय विद्युत उत्पादन क्षमता परियोजनाएं विभिन्न चरणों में है, जिन्हें 2029-30 तक पूरा किये जाने का लक्ष्य है।
ई. ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विस्तार: 30.06.2026 तक, 15,870 मेगावाट/95,220 मेगावाट-घंटे की पंप स्टोरेज परियोजनाएं (पीएसपी) निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त, कुल 6,580 मेगावाट/39,480 मेगावाट-घंटे की पंप स्टोरेज परियोजनाओं के लिए सहमति प्राप्त हो चुकी है जिनका निर्माण कार्य शुरू होना बाकी है। 30.06.2026 तक, 15,754 मेगावाट/42,530 मेगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएस) निर्माणाधीन हैं, 11,747 मेगावाट/38,425 मेगावाट-घंटे की परियोजनाओं का आवंटन किया जा चुका है और 19,192 मेगावाट/67,574 मेगावाट-घंटे की बीईएस क्षमता वाली परियोजनाएं निविदा प्रक्रियाधीन हैं।
(iv) राष्ट्रीय विद्युत योजना (संचरण) में संकुलन से बचने, कटौती कम करने और नेटवर्क संवर्धन आवश्यकताओं को अनुकूलित करने हेतु समन्वित संचरण नियोजन किया जाता है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से जुड़ी अनिश्चितता दूर करने के लिए, सरकार ग्रिड स्थिरता और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ऊर्जा भंडारण और हाइब्रिड समाधानों के संयोजन को बढ़ावा दे रही है। इसके अंतर्गत, 2031-32 तक लगभग 47 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएस) को एकीकृत करने का विचार है। इसके अलावा, 2025-26 से 2035-36 तक 100 गीगावाट पंप स्टोरेज प्लांट को एकीकृत करने की भविष्य योजना तैयार की गयी है।
विद्युत मंत्रालय ने पारेषण लाइनों के लिए राइट ऑफ वे के मुआवजे के भुगतान के संबंध में दिनांक 14.06.2024, 21.03.2025 और 15.12.2025 को दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें भूमि दर को प्रचलित बाजार दर से जोड़ा गया है। ये दिशानिर्देश मार्ग का अधिकार से संबंधित उन प्रमुख चुनौतियों का समाधान करते हैं जो भूस्वामियों द्वारा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों से अधिक मुआवजे की मांग के कारण उत्पन्न होती हैं।
(v) केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में विद्युत वितरण क्षेत्र को आर्थिक रूप से संवहनीय और परिचालन कुशल बनाकर उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार लाने के उद्देश्य से पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना – आरडीएसएस शुरू की है। इस योजना का परिव्यय 3,03,758 करोड़ रुपये है और केंद्र सरकार से अनुमानित सकल बजटीय सहायता 97,631 करोड़ रुपये है। इस योजना के तहत, निजी क्षेत्र के लाइसेंसधारियों को छोड़कर वितरण लाइसेंसधारियों को हानि कम करने वाले अवसंरचना कार्यों और स्मार्ट मीटरिंग कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान दी जा रही है। योजना के तहत हानि में कमी लाने वाले अवसंरचना कार्यों के लिए 1.53 लाख करोड़ रुपये और स्मार्ट मीटरिंग कार्यों के लिए 1.31 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं, जिनसे देश में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में सुधार में मदद मिलेगी।
केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से अब ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के औसत घंटे वित्त वर्ष 2014 में 12.5 घंटे से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 22.6 घंटे हो गए हैं और शहरी क्षेत्रों में भी यह वित्त वर्ष 2014 में 22.1 घंटे से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 23.4 घंटे हो गए हैं।
परिशिष्ट
नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख उपायः
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों और पूलिंग स्टेशनों के विकास, साझा अवसंरचना द्वारा बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमताओं के अधिकतम उपयोग को सक्षम बनाना;
- ii. नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर पूर्वानुमान के लिए और ग्रिड संचालकों को नवीकरणीय ऊर्जा की परिवर्तनशीलता और अनिश्चितता को प्रबंधित करने में सहायता करने के लिए क्षेत्रीय ऊर्जा प्रबंधन केंद्रों की स्थापना।
- केंद्र सरकार ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत अंतर-राज्यीय पारेषण परियोजनाओं के लिए बजटीय सहायता प्रदान की है।
- iv. ग्रिड संचालन को सुदृढ़ बनाया गया है, जिसमें बेहतर पूर्वानुमान, समय-निर्धारण, वास्तविक समय प्रेषण और सहायक सेवाएं शामिल हैं, ताकि संतुलन लागत कम की जा सके;
- वास्तविक समय बिजली बाजार और लचीलेपन तंत्र जैसे बाजार सुधार किये गये हैं जिससे मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रणाली एकीकरण में कम लागत आ रही है;
- vi. केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के सामान्य नेटवर्क एक्सेस विनियम, 2022 के तृतीय संशोधन से नवीकरणीय ऊर्जा पूलिंग स्टेशनों पर उपलब्ध मार्जिन का आकलन कर सौर और गैर-सौर घंटों के लिए अलग-अलग कनेक्टिविटी प्रदान की जा रही है। इससे मौजूदा पारेषण संरचना का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर समग्र प्रणाली लागत कम हुई है;
- मिश्रित परियोजनाओं के लिए कनेक्टिविटी मात्रा का आकलन समग्र नवीकरणीय ऊर्जा मात्रा अनुकूलित करने के लिए किया जा रहा है, जिससे कुशल ग्रिड उपयोग को सुगम बनाया जा सके;
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में नियोजित वृद्धि के अनुरूप अंतरराज्यीय पारेषण नेटवर्क मजबूत बनाया जा रहा है। इसके अलावा, समग्र ग्रिड विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं के लिए अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली को अंतरराज्यीय पारेषण नेटवर्क से संबद्ध किया जा रहा है।
- ix. ग्रिड में स्थिर वोल्टेज स्तर बनाए रखने के लिए प्रतिक्रियाशील बिजली प्रवाह को गतिशील रूप से समायोजित करने हेतु कई अत्याधुनिक स्थैतिक तुल्यकालिक क्षतिपूर्ति यंत्र और स्थैतिक क्षतिपूर्ति यंत्र लगाए जा रहे हैं;
- उच्च रैंप दर वाले जनरेटर (जैसे, जल विद्युत या गैस) को भी लोड उत्पादन संतुलन बनाए रखने के लिए अधिकतम उपयोग किया जा रहा है।
- xi. भारी उद्योग मंत्रालय ने उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण पर उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना शुरू की है, जिसे मई 2021 में 18,100 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ 50 गीगावाट की घरेलू उन्नत रसायन सेल विनिर्माण क्षमता स्थापित करने के लिए अनुमोदित किया गया है। इसमें से 10 गीगावाट ग्रिड स्केल स्टेशनरी स्टोरेज अनुप्रयोगों के लिए निर्धारित है।
- मार्च 2022 में, कृषि मंत्रालय ने उत्पादन, पारेषण और वितरण परिसंपत्तियों की सहायक सेवाओं के साथ-साथ बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की खरीद और उपयोग के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित किए हैं।
- वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीएसई और पीएसपी) की खरीद के लिए टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली दिशानिर्देश अधिसूचित किए गए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर भंडारण खरीद के लिए एक पारदर्शी तंत्र निर्मित हुआ है।
- ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ढांचा सितंबर 2023 में जारी किया गया था, जो भंडारण प्रौद्योगिकियों की तैनाती, बाजार एकीकरण और नियामक सुविधा के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान करता है।
- xv. केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 3,760 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन के साथ 13.22 गीगावॉट क्षमता की बीईएस परियोजनाएं कार्यान्वयन अधीन हैं। बीईएस की बढ़ती मांग के अनुसार विद्युत मंत्रालय ने जून 2025 में विद्युत प्रणाली विकास कोष से 5,400 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के साथ ही 30 गीगावॉट क्षमता की बीईएस परियोजना विकसित करने के लिए एक और वीजीएफ योजना को मंजूरी दी है।
- जून 2025 तक संचालित होने वाली बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम परियोजनाओं और जून 2025 तक निर्माण कार्य आवंटित होने वाली हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी गई है, जिसके बाद छूट में प्रतिवर्ष 25 प्रतिशत की कमी की जाएगी। को-लोकेटेड बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीएसईएस) परियोजनाओं के लिए, जून 2028 तक संचालित होने वाली परियोजनाओं के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली - आईएसटीएस शुल्क में 100 प्रतिशत छूट को बढ़ाया गया है। पीएसपी परियोजनाओं के लिए, जून 2028 तक निर्माण कार्य आवंटित होने वाली परियोजनाओं के लिए आईएसटीएस शुल्क में 100 प्रतिशत छूट को बढ़ाया गया है।
- विद्युत मंत्रालय ने दिनांक 01.08.2025 के आदेश द्वारा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से जल विद्युत उत्पादन संयंत्रों, ऑफस्ट्रीम ओपन लूप और ऑनस्ट्रीम पीएसपी के लिए सहमति की सीमा 1,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3,000 करोड़ रुपये कर दी है। इसके अतिरिक्त, ऑफस्ट्रीम क्लोज्ड लूप पीएसपी को प्राधिकरण से सहमति लेने की आवश्यकता से छूट दी गई है।
- फरवरी 2025 में, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणाली के सह-स्थापन संबंधी एक सलाह जारी की। इसमें सौर ऊर्जा की प्रेषण क्षमता में सुधार के लिए कम से कम दो घंटे की अवधि के लिए स्थापन सौर क्षमता को कम से कम 10 प्रतिशत की भंडारण क्षमता रखने की संस्तुति की गई है।
- सितंबर 2025 में विद्युत नियमों में संशोधन द्वारा ऊर्जा भंडारण प्रणाली उपभोक्ताओं द्वारा विकसित करने, स्वामित्व रखने, पट्टे पर लेने या संचालित करने की अनुमति दी गई है, जिससे स्वामित्व और व्यावसायिक मॉडलों की सीमा विस्तारित हुई है।
***
पीके/केसी/एकेवी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2297315)
आगंतुक पटल : 100