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राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइनर सम्मेलन 2026 में भारत के हथकरघा क्षेत्र को सशक्त बनाने हेतु डिजाइन-आधारित नवाचार का प्रदर्शन

प्रविष्टि तिथि: 10 AUG 2026 7:23PM by PIB Delhi

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय ने आज नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइनर सम्मेलन 2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, प्रख्यात फैशन डिजाइनरों, वस्त्र विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, क्लस्टर डिजाइनरों, मास्टर बुनकरों, निर्यातकों, खुदरा विक्रेताओं तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया और डिजाइन-आधारित नवाचार तथा बाजारोन्मुख उत्पाद विकास के माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने पर विचार-विमर्श किया।

 

वस्त्र मंत्रालय की सचिव, श्रीमती नीलम शमी राव ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) सुश्री अमृत राज, वस्त्र मंत्रालय के उप महानिदेशक (डीडीजी) श्री अखिलेश कुमार तथा अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। गणमान्य व्यक्तियों ने राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइन प्रतियोगिता 2026 के अंतर्गत चयनित उत्पादों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में आठ राज्यों के नौ हथकरघा क्लस्टरों—मिरनचक क्लस्टर, पूर्व बर्धमान क्लस्टर, वनिता क्लस्टर, देव भूमि भराड़ी क्लस्टर, द्वारका क्लस्टर, खुरकुल क्लस्टर, रिडरोल क्लस्टर, इंफाल पूर्व तथा कोंडापालकला क्लस्टर—में किए गए अभिनव डिजाइन हस्तक्षेपों एवं समकालीन उत्पाद विकास पहलों को प्रदर्शित किया गया।

 

अपने उद्घाटन संबोधन में वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र का भविष्य भारत के बुनकरों के कौशल पर ही नहीं, बल्कि मजबूत संस्थागत समर्थन पर भी निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र 35 लाख से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है तथा मंत्रालय के सहयोगी तंत्र के अंतर्गत 29 बुनकर सेवा केंद्र और 357 हथकरघा क्लस्टर विकास कार्यक्रम उत्पादन, क्षमता तथा बाजार संपर्क को सुदृढ़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष डिजाइन की दृष्टि से संभावनाशील 80 क्लस्टरों को एक संरचित डिजाइन प्रक्रिया से जोड़ा गया तथा लगभग 80 डिजाइनरों को प्रत्यक्ष रूप से इस उद्देश्य से लगाया गया है कि डिजाइन को प्रीमियम मूल्य निर्धारण और बुनकरों की अधिक आय में रूपांतरित किया जा सके। उन्होंने आने वाले वर्षों में इस पारितंत्र को और सुदृढ़ करने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई।

गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने भारतीय हथकरघा उत्पादों के मूल्य, प्रतिस्पर्धात्मकता तथा सततता को बढ़ाने में डिजाइन की उत्प्रेरक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बदलती बाजार मांगों के अनुरूप पारंपरिक शिल्पों को सक्षम बनाने के लिए डिजाइनरों और बुनकरों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने संबंधी मंत्रालय के निरंतर प्रयासों को रेखांकित किया।

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइन प्रतियोगिता 2026 का पुरस्कार समारोह रहा, जिसमें परिधान, गृह साज-सज्जा, शिल्प पुनरुद्धार तथा निर्णायक मंडल की विशेष सम्मान श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले क्लस्टर डिजाइनरों को सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों के माध्यम से ऐसे उत्कृष्ट डिजाइन हस्तक्षेपों को मान्यता दी गई, जिन्होंने पारंपरिक शिल्पकला को समकालीन सौंदर्यबोध तथा बदलती बाजार प्राथमिकताओं के साथ प्रभावी ढंग से समन्वित किया है।

सम्मेलन में तीन विषयगत पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया, जिनके विषय थे—डिजाइन नवाचार एवं बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता, सतत क्लस्टर विकास एवं भारतीय हथकरघा का भविष्य, तथा भारतीय हथकरघा में मूल्य सृजन के लिए डिजाइन थिंकिंग। प्रमुख डिजाइनरों, शिक्षाविदों तथा उद्योग विशेषज्ञों ने उभरते उपभोक्ता रुझानों, सततता, ब्रांडिंग, निर्यात, प्रौद्योगिकी के एकीकरण तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हथकरघा उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए।

 

प्रदर्शनी को प्रतिभागियों से उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली। इसमें चयनित क्लस्टरों में संरचित डिजाइन हस्तक्षेपों के माध्यम से विकसित अभिनव हथकरघा उत्पादों की झलक प्रस्तुत की गई। प्रदर्शनी ने समकालीन, उच्च-मूल्य वाले उत्पादों के सृजन के साथ-साथ भारत की विविध बुनाई विरासत के संरक्षण में डिजाइनर-बुनकर सहयोग की अपार संभावनाओं को प्रदर्शित किया।

राष्ट्रीय हथकरघा डिजाइनर सम्मेलन 2026 ने हथकरघा क्षेत्र में डिजाइन को नवाचार, मूल्य संवर्धन तथा बाजार विस्तार के प्रमुख प्रेरक के रूप में स्थापित करने संबंधी वस्त्र मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। सम्मेलन के दौरान हुए विचार-विमर्श एवं साझा किए गए ज्ञान से डिजाइनर-बुनकर पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ करने, सतत आजीविका को बढ़ावा देने तथा भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में सहायता मिलने की अपेक्षा है।

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पीके/केसी/पीके


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