सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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महाराष्ट्र में पीएम-यशस्वी योजना के कार्यान्वयन की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है; छात्रवृत्ति कवरेज को बेहतर बनाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाये गये


2025-26 में महाराष्ट्र में मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति योजना के तहत ₹1,940 लाख जारी किए गए

प्रविष्टि तिथि: 10 AUG 2026 6:58PM by PIB Delhi

केंद्र सरकार ने बताया है कि महाराष्ट्र में पीएम- यशस्वी वृहद् योजना के कार्यान्वयन की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है, जिसके लिए मासिक वीडियो कॉन्फ्रेंस के साथ-साथ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर के कॉन्फ्रेंस भी आयोजित किये जाते हैं।

यह लिखित उत्तर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने लोकसभा में श्री भास्कर मुरलीधर भागरे, श्रीमती सुप्रिया सुले, प्रो. वर्षा एकनाथ गायकवाड़, श्री मोहिते पाटिल धैर्यशील राजसिंह और डॉ. अमोल रामसिंह कोल्हे के सवालों के जवाब में दिया।

पीएम-यशस्वी वृहद् छत्रवृत्ति योजना के अंतर्गत ओबीसी और अन्य के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति योजना, ओबीसी और अन्य के लिए मैट्रिक-उपरांत छात्रवृत्ति योजना, ओबीसी और अन्य के लिए स्कूलों में उच्च-स्तरीय शिक्षा योजना और ओबीसी और अन्य के लिए कॉलेजों में उच्च-स्तरीय शिक्षा योजना शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिक-उपरांत छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए, केंद्र सरकार स्वीकृत राष्ट्रीय आवंटन के आधार पर कार्यान्वयन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को धनराशि देती है, जबकि छात्रवृत्ति के लिए योग्य लाभार्थियों का चयन, सत्यापन और धनराशि वितरण संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है।

श्री वर्मा ने कहा कि मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिक-उपरांत ओबीसी छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए महाराष्ट्र को शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल में शामिल किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र में ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए पीएम-यशस्वी मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति योजना के तहत 1,079 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1,072 आवेदन आधार सत्यापित थे और 575 आवेदन सत्यापित किए गए थे।

ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए पीएम-यशस्वी मैट्रिक-उपरांत छात्रवृत्ति योजना के तहत, वित्त वर्ष 2025-26 में 1,971 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1,965 आधार सत्यापित थे और 576 आवेदन सत्यापित किए गए थे।

मंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति योजना के तहत महाराष्ट्र सरकार को 555.74 लाख जारी किए, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,940 लाख हो गया। वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए उस वर्ष कोई धनराशि जारी नहीं की गई।

मैट्रिक-उपरांत छात्रवृत्ति योजना के लिए, पिछले तीन वित्त वर्षों में कोई केंद्रीय सहायता जारी नहीं की गई थी। जवाब में कहा गया कि ऐसा वित्त वर्ष 2023-24 में प्रस्ताव न मिलने, वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य के एसएनए खाते में लंबित अप्रयुक्त राशि और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा राशि जारी करने में तकनीकी समस्या के कारण हुआ।

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ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए स्कूलों में उच्च-स्तरीय शिक्षा योजना के तहत, 2023-24 में 3,470 नये आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2,324 का अंतिम सत्यापन किया गया। 2024-25 में 2,192 नये आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1,195 का अंतिम सत्यापन हुआ। 2025-26 में 8,402 नये आवेदन मिले, जिनमें से 4,533 का अंतिम सत्यापन हुआ।

उच्च-स्तरीय शिक्षा योजना के तहत महाराष्ट्र को जारी धनराशि 2023-24 के 52.31 लाख से बढ़कर 2024-25 में 258.55 लाख और 2025-26 में 509.37 लाख हो गई।

ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी के लिए कॉलेजों में उच्च-स्तरीय शिक्षा योजना के तहत, 2023-24 में 363 नए आवेदन प्राप्त हुए और 342 का अंतिम सत्यापन हुआ। 2024-25 में 731 नए आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 611 का अंतिम सत्यापन हुआ।

कॉलेजों में में उच्च-स्तरीय शिक्षा योजना के तहत जारी की गयी धनराशि 2023-24 के 1,000.39 लाख से बढ़कर 2024-25 में 2,712.14 लाख और 2025-26 में 2,857.95 लाख हो गयी।

मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र में छात्रवृत्ति कवरेज कम होने की समस्या को दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। इनमें योग्य लाभार्थियों के बीच योजना के बारे में जागरूकता पैदा करना, शैक्षणिक संस्थानों और जिला अधिकारियों के साथ मिलकर आउटरीच में सुधार करना तथा आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया की नियमित निगरानी कर समय पर और सही वितरण सुनिश्चित करना शामिल है।

सरकार ने यह भी बताया है कि धनराशि वितरित करने में देरी, मुख्य रूप से राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा जमा अधूरे प्रस्ताव, पहले ही जारी की गयी धनराशि के लिए उपयोग प्रमाण पत्र जमा नहीं करने, कुछ राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों का एसएनए-स्पर्श प्लेटफॉर्म में शामिल न होने और बैंक खातों को आधार से लिंक न करने के कारण होती है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एसएनए-स्पर्श प्लेटफॉर्म में अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए कहा गया है ताकि धनराशि के वास्तविक-समय पर, उपयोग-आधारित निगरानी के माध्यम से धनराशि वितरण में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ सके।

सरकार महाराष्ट्र में पीएम-यशस्वी के तहत पहुंच बढ़ाने, सत्यापन और समय पर वितरण पर विशेष ध्यान देने के साथ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रस्तावों और उपयोग प्रमाण पत्रों के समय पर जमा किये जाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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पीके/केसी/जेके/एसएस


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