वस्‍त्र मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

परिधान निर्यात

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2026 1:34PM by PIB Delhi

केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि  हस्‍तशिल्‍प सहित भारत के वस्त्र और अपैरल के निर्यात में, वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 तक की अवधि के दौरान लगभग 4.5% की कंपाउंड वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई, जो वर्ष 2019-20 में 2,49,250 करोड़ रुपए से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 3,25,339 करोड़ रुपए हो गई। वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 तक के वस्‍त्र और रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यात का वर्ष-वार विवरण निम्‍नलिखित है:

हस्‍तशिल्‍प सहित भारत का वस्‍त्र अपैरल निर्यात (मूल्य करोड़ रुपये में)

वर्ष

2019-20

2020-21

2021-22

2022-23

2023-24

2024-25

2025-26

 

 

 

 

 

 

 

निर्यात मूल्य

249250

233304

331330

294289

297004

319573

325339

 

 

 

 

 

 

 

स्रोत: डीजीसीआईएस, अनंतिम डेटा (पूर्णांक)

प्रमुख निर्यातक राज्यों से निर्यात मूल्य का विवरण अनुलग्नक-I पर दिया गया है। हस्तशिल्प सहित वस्त्र और रेडीमेड गारमेंट, वर्ष 2025-26 में देश भर के 548 जिलों से निर्यात किए गए थे। वर्ष 2025-26 के दौरान हस्तशिल्प सहित वस्‍त्र और रेडीमेड गारमेंट निर्यात करने के शीर्ष दस जिले तिरुपुर (38,677 करोड़ रुपए), गौतम बुद्ध नगर (21,095 करोड़ रुपए), बेंगलुरु शहरी (16,205 करोड़ रुपए), गुरुग्राम (15,104 करोड़ रुपए), मुंबई (12,479 करोड़ रुपए), पानीपत (11,448 करोड़ रुपए), सूरत (10,478 करोड़ रुपए), अहमदाबाद (9,366 करोड़ रुपए), लुधियाना (7,099 करोड़ रुपए) और ठाणे (6,321 करोड़ रुपए) थे।

(स्रोत: डीजीसीआईएस, अनंतिम डेटा (पूर्णांक)

सरकार क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा पर पड़ने वाले प्रभाव के आकलन पर निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और उद्योग एसोसिएशनों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत कर रही है। चुनौतियों के उपरांत भी, हस्तशिल्प सहित भारत का वस्त्र और अपैरल का निर्यात वर्ष 2025-26 में 3,25,339 करोड़ रुपए था, जो वर्ष 2024-25 में 3,19,573.2 करोड़ रुपए पर 1.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करता है। वर्ष के दौरान 100 से अधिक गंतव्यों में निर्यात वृद्धि दर्ज की गई (स्रोत: डीजीसीआईएसएंडएस)। सरकार ने उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें सीमा शुल्क शीर्ष 5201 के तहत आने वाले कपास के आयात पर सीमा शुल्क से दिनांक 1 जून से दिनांक 31 अक्टूबर 2026 तक अस्थायी छूट; प्‍यूरीफाइड टेरेफ्थैलिक एसिड (पीटीए) और मोनो-इथीलाइन ग्लाइकोल (एमईजी) सहित मैन-मेड फाइबर (एमएमएफ) मूल्य श्रृंखला में प्रमुख इनपुट पर सीमा शुल्क से अस्थायी छूट; मैन-मेड फाइबर (एमएमएफ) मूल्य श्रृंखला में जीएसटी दरों का रेशनेलाइजेशन आदि शामिल हैं।

दिनांक 01.07.2020 को पोर्टल लॉंच होने की शुरूआत से दिनांक 31.03.2026 तक, वस्त्र क्षेत्र में उद्यम पोर्टल (एनआईसी 2-अंकीय कोड 13 और 14) पर कुल 36,00,012 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पंजीकृत और सक्रिय थे। दिनांक 01.04.2023 से दिनांक 31.03.2026 तक की अवधि के दौरान, पोर्टल पर वस्‍त्र क्षेत्र में कुल 24,73,634 एमएसएमई (एनआईसी 2-अंकीय कोड 13 और 14) पंजीकृत किए गए, जबकि इसी अवधि के दौरान विभिन्न कारणों से 7,894 एमएसएमई इकाइयों के बंद होने की सूचना मिली। इस प्रकार, बंद होने के रूप में रिपोर्ट किए गए एमएसएमई की संख्या पिछले तीन वर्षों के दौरान पंजीकृत कुल एमएसएमई का लगभग/केवल 0.32% है। दिनांक 01.04.2023 से दिनांक 31.03.2026 तक की अवधि के दौरान उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर दर्ज बंद हो चुके एमएसएमई का राज्‍य-वार विवरण वस्त्र क्षेत्र में और रोजगार पर उसके संबंधित प्रभाव का विवरण अनुलग्नक-II पर दिया गया है।

मंत्रालय ने पर्यावरण के अनुकूल प्रसंस्करण मानकों और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके भारतीय वस्त्र उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए, दिनांक 31.03.2021 तक एकीकृत वस्‍त्र पार्क (एसआईटीपी) योजना को क्रियान्वित किया; यद्यपि, इस योजना को अब केवल जारी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए वस्‍त्र क्लस्टर विकास योजना (टीसीडीएस) की व्‍यापक योजना के तहत समाहित कर लिया गया है। इस योजना के तहत, 50 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 33 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा, मंत्रालय ने वस्‍त्र उद्योग को आवश्यक पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने और मौजूदा प्रसंस्करण कलस्‍टरों के साथ-साथ विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में नए प्रसंस्‍करण पार्कों में नए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी)/सीईटीपी के अपग्रेडेशन को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना (आईपीडीएस) को दिनांक 31.03.2021 तक क्रियान्वित किया। तथापि, यह योजना अब केवल जारी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए क्रियान्वित की जा रही है। टीसीडीएस और आईपीडीएस के एसआईटीपी और सीपीसीडीएस घटक के तहत निधि उपयोग का विवरण अनुलग्नक-III पर है।

इसके अलावा, संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एटीयूएफएस) जनवरी 2016 में शुरू की गई थी जो दिनांक 31 मार्च, 2022 तक वैध थी। वर्तमान में दिनांक 31.03.2022 तक सृजित यूआईडी के लिए एटीयूएफएस के अंतर्गत केवल प्रतिबद्ध देनदारियों का ही निपटान किया जा रहा है। वर्ष 2016-17 से वर्ष 2025-26 तक की अवधि के दौरान, इस योजना के तहत, 8611.82 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है।

सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता, पर्यावरण और सस्‍टेनेबिलिटी मानकों को पूरा करने में वस्‍त्र इकाइयों की मदद करने के लिए कई पहल की हैं, जिसमें केंद्रीय बजट 2026-27 में सर्कुलर इकोनॉमी प्रौद्योगिकियों और टेक्‍सटाइल वेस्‍ट मैनेजमेंट, रिसाइकलिंग, सस्‍टेनेबल पैकेजिंग और रिसाइकल किए गए फाइबर के विकास और पूरे भारत में उच्‍च-मूल्‍य उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए घोषित टेक्‍स-इको पहल शामिल है। सस्‍टेनेबल उत्पादन, प्रमाणन और निर्यात से संबंधित मुद्दों का समाधान करने के लिए एक पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस (ईएसजी) टास्क फोर्स का गठन किया गया है, साथ ही सर्कुलर संवाद और क्लस्टर एक्सचेंज मैकेनिज्म जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से इंडस्‍ट्री नॉलेज शेयरिंग करने की सुविधा प्रदान की गई है। वस्त्र समिति ने अपसाइकल्ड उत्पादों की खरीद को बढ़ावा देने के लिए स्‍टैंडिंग कॉंफ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेस (स्कोप) और गवर्मेंट ई-मार्केट प्‍लेस (जीईएम) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। अन्य वैश्विक पायलट परियोजनाओं में शामिल हैं (i) वस्‍त्र फैशन आपूर्ति श्रृंखला से हानिकारक रसायनों को समाप्‍त करने, यूएनआईडीओ के साथ साझेदारी में कार्यान्वित और फैशन आपूर्ति श्रृंखला में हानिकारक रसायनों को समाप्‍त करने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और अपशिष्‍ट को कम करने के लिए ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (जीईएफ) द्वारा वित्त पोषित; और (ii) भारतीय वस्‍त्र क्षेत्र के सर्कुलेरिटी की ओर ट्रांजिशन (इन-टेक्‍स इंडिया) में तेजी लाना, लाइफ साइकिल असेसमेंट (एलसीए) और प्रोडक्ट एनवायरनमेंटल फुटप्रिंट (पीईएफ) पद्धतियों का उपयोग करके सर्कुलर बिजनेस मॉडल को बढ़ाने के लिए यूएनईपी के समन्‍वय से कार्यान्वित किया गया।

सरकार ने वस्त्र और अपैरल क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं क्रियान्वित की हैं और विभिन्न पहलें की हैं। इनमें पीएम मेगा एकीकृत वस्‍त्र क्षेत्र और अपैरल (पीएम मित्र) पार्क योजना, वस्त्र हेतु उत्पादन-सम्‍बद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम), वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण हेतु योजना-समर्थ, और निर्यात संवर्धन मिशन के तहत बाजार पहुंच सहायता और ब्याज अनुदान सहित विभिन्न घटकों की शुरुआत शामिल है। निर्यात पर, सरकार ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और कर छूट (आरओडीटीईपी) योजना और राज्य और केंद्रीय करों और लेवियों की छूट (आरओएससीटीएल) योजना को दिनांक 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है; और निर्यात सुविधा हेतु रेजिलेंस एवं लॉजिस्टिक्स पहल (रिलीफ) योजना आदि शुरू की है। सरकार ने  प्राथमिकता वाले 40 देशों को कवर करते हुए एक फोकस्‍ड निर्यात संवर्धन और बाजार विविधीकरण कार्यनीति भी अपनाई है। भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) सहित सोलह मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पहले से ही लागू हैं। इसके अलावा, यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ एफटीए वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हो गयी है, तथापि, भारत ने न्यूजीलैंड के साथ एक एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते भारतीय वस्त्र और अपैरल क्षेत्र को अपने निर्यात को बढ़ाने और बाजार विविधीकरण करने का अवसर प्रदान करते हैं।

समग्र रूप से, इन उपायों ने निर्यात बाजारों में विविधता लाने, बाजार पहुंच और गुणवत्ता मानकों में सुधार करने और भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद की है।

हस्तशिल्प  सहित भारत का राज्‍य-वार वस्त्र और अपैरल निर्यात

(मूल्‍य करोड़ रुपए में)

क्र.

सं.

राज्य का नाम

2019-

20

2020-

21

2021-

22

2022-

23

2023-

24

2024-

25

2025-

26

1

तमिलनाडु

49421

45923

65008

64162

59370

67863

68792

2

गुजरात

36405

37501

54858

40466

47603

50150

50947

3

हरियाणा

23246

22168

31444

29871

30156

34843

35060

4

महाराष्ट्र

30433

29629

39911

32102

35004

33611

32842

5

उत्तर प्रदेश

22330

20157

27221

29593

28464

31804

34829

6

कर्नाटक

17521

14172

20391

23350

22669

23961

24890

7

राजस्थान

9759

9056

13823

12702

13448

14560

15009

8

पंजाब

10753

9719

15739

12043

12421

11820

12306

9

मध्य प्रदेश

8026

9891

15711

10798

11510

11749

11752

10

पश्चिम बंगाल

7279

6672

9449

9704

9001

9629

9849

 

शेष राज्य

34079

28417

37775

29499

27356

29582

29063

 

सकल योग

249250

233304

331330

294289

297004

319573

325339

स्रोत: डीजीसीआईएस, अनंतिम डेटा (पूर्णांक)

 

उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर दर्ज वस्‍त्र क्षेत्र में बंद की गई कुल एमएसएमई और प्रभावित रोजगार के दिनांक 01/04/2023 से 31/03/2026 तक राज्‍य-वार विवरण (एनआईसी 2 अंक 13 और 14)

क्र.सं.

राज्य

एमएसएमई की  कुल संख्‍या

रोज़गार

1

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

7

10

2

आंध्र प्रदेश

283

1330

3

अरुणाचल प्रदेश

4

14

4

असम

79

1425

5

बिहार

209

1299

6

चन्डीगड़

5

13

7

छत्तीसगढ़

40

177

8

दिल्ली

54

358

9

गोवा

13

50

10

गुजरात

1402

9038

11

हरियाणा

108

823

12

हिमाचल प्रदेश

32

76

13

जम्मू और कश्मीर

174

886

14

झारखंड

74

380

15

कर्नाटक

467

3306

16

केरल

235

844

17

लद्दाख

6

27

18

लक्षद्वीप

0

0

19

मध्य प्रदेश

162

709

20

महाराष्ट्र

1276

6628

21

मणिपुर

44

306

22

मेघालय

0

0

23

मिज़ोरम

1

4

24

नागालैंड

3

38

25

ओडिशा

150

1670

26

पुद्दुचेरी

19

89

27

पंजाब

87

590

28

राजस्थान

552

2429

29

सिक्किम

1

4

30

तमिलनाडु

1309

17869

 

31

तेलंगाना

329

2283

32

दादरा और नगर हवेली

और दमन और दीव

6

19

33

त्रिपुरा

1

35

34

उत्तर प्रदेश

440

4161

35

उत्तराखंड

33

648

36

पश्चिम बंगाल

289

1836

 

कुल:-

7894

59374

(स्रोत: डीसीएमएसएमई)

 

योजना

राज्य

भारत सरकार का  अनुमोदित हिस्‍सा

(करोड़ रुपए में)

जारी किया गया और

उपयोग किया गया भारत सरकार का हिस्‍सा               

(करोड़ रुपए में)         

1. वस्‍त्र         क्लस्टर विकास योजना (टीसीडीएस)

i. एकीकृत वस्‍त्र पार्क योजना

(एसआईटीपी)

आंध्र प्रदेश

160.00

114.00

असम

40.00

20.00

गुजरात

516.00

432.00

हिमाचल प्रदेश

38.76

34.88

जे एंड के

39.70

35.73

कर्नाटक

32.01

32.01

महाराष्ट्र

451.47

404.45

पंजाब

116.56

112.00

राजस्‍थान

104.06

100.06

तमिलनाडु

222.65

147.95

तेलंगाना

49.69

46.08

पश्चिम बंगाल

68.06

56.86

कुल

1838.96

1536.02

 

 

 

 

ii. व्यापक पावरलूम क्लस्टर विकास योजना(सीपीसीडीएस)

तमिलनाडु

40.05

40.05

महाराष्ट्र

50.00

44.55

गुजरात

50.00

29.06

कर्नाटक

29.51

1.09

 

कुल

169.56

114.75

 

 

 

 

2. एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना     

(आईपीडीएस)

गुजरात

73.19

54.84

राजस्‍थान

273.09

159.85

कुल

346.28

214.69

 

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पीके/केसी/एसएस/एसके


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