कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
प्रौद्योगिकी आधारित फसल निगरानी प्रणाली
प्रविष्टि तिथि:
11 AUG 2026 4:28PM by PIB Delhi
3688. श्री दर्शन सिंह चौधरीः
क्या कृषि और किसान कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) क्या सरकार प्रौद्योगिकी-आधारित फसल निगरानी प्रणाली को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने के लिए सैटेलाइट, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियां प्रयुक्त का प्रयोग कर रही है;
(ख) पिछले तीन वर्षों में इस उद्देश्य से शुरू की गई परियोजनाओं का राज्य-वार ब्यौरा क्या है और कवरेज क्या है, आवंटित और उपयोग की गई निधि कितनी है तथा फसल आकलन, कीट और रोग प्रबंधन, सिंचाई योजना एवं फसल बीमा दावों के सत्यापन जैसे क्षेत्रों में मुख्य उपलब्धियां क्या हैं; और
(ग) क्या सरकार द्वारा राज्यों के सहयोग से किसानों को फसल से जुड़ी तात्कालिक सलाह देने के लिए इन प्रणालियों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), डिजिटल कृषि मिशन, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन और अन्य कृषि योजनाओं के साथ जोड़ने के लिए कोई विशेष कार्य योजना कार्यान्वित की जा रही है?
उत्तर
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री (श्री रामनाथ ठाकुर)
- से (ग): भारत सरकार प्रौद्योगिकी-आधारित फसल निगरानी प्रणालियों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सेटेलाइट, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी विभिन्न आधुनिक प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करती है।
- रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) का उपयोग:
- फसल (अंतरिक्ष, कृषि-मौसम विज्ञान और भूमि-आधारित प्रेक्षणों का उपयोग करके कृषि उत्पादन का पूर्वानुमान): यह मल्टीस्पेक्ट्रल और सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) सेटेलाइट डेटा का उपयोग करके प्रमुख फसलों के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर कटाई-पूर्व उत्पादन का पूर्वानुमान प्रदान करता है। इसमें 20 राज्यों की 11 प्रमुख फसलें (धान, गेहूं, जूट, कपास, गन्ना, सोयाबीन, तुअर, चना, सरसों, मसूर और रबी ज्वार) शामिल हैं।
- आपदा निगरानी एवं आकलन: एमएनसीएफसी प्रभावी फसल प्रबंधन के लिए नियमित रूप से रिमोट बेस्ड इनपुट जैसे वनस्पति स्थिति मानचित्र, मृदा नमी की स्थिति, सूखा स्थिति आकलन, बाढ़ के कारण जलप्लावन और ओलावृष्टि के प्रभाव आदि प्रदान करता है।
- कृषि निर्णय सहायता प्रणाली: यह सेटेलाइट, मौसम, मृदा, क्रॉप सिग्नेचर, जलाशय और भूजल डेटा के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी सहित भूस्थानिक और गैर-भूस्थानिक डेटा को एकीकृत और मानकीकृत करती है। यह सरकार को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता करती है और अनुसंधान संस्थानों और कृषि प्रौद्योगिकी उद्योग द्वारा नवीन समाधानों में सहयोग करती है। कृषि-डीएसएस पर उपलब्ध जानकारी का उपयोग फसल बोने के पैटर्न और फसल विविधीकरण की पहचान करने के लिए फसल मानचित्र तैयार करने, सूखा/बाढ़ की निगरानी करने और किसानों द्वारा फसल बीमा दावों के निपटान के लिए प्रौद्योगिकी/मॉडल-आधारित उपज आकलन के लिए किया जाता है।
- येस-टेक (प्रौद्योगिकी आधारित उपज आकलन प्रणाली): पीएमएफबीवाई के अंतर्गत येस-टेक पहल में ग्राम पंचायत-स्तर पर उपज आकलन और दावा निपटान के लिए सेटेलाइट आधारित फसल उपज मॉडल शामिल हैं। येस-टेक को 12 राज्यों में धान, गेहूं और सोयाबीन की फसलों के लिए कार्यान्वित किया जा रहा है।
- विंड्स (मौसम सूचना नेटवर्क और डेटा सिस्टम): विंड्स भारत भर में मौसम संबंधी डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए पीएमएफबीवाई के अंतर्गत एक राष्ट्रीय पहल है। इसके तहत ब्लॉक/तहसील/तालुक स्तर पर स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और ग्राम पंचायत स्तर पर स्वचालित वर्षामापी (एआरजी) के नए नेटवर्क के साथ मौजूदा मौसम नेटवर्क को और सुदृढ़ करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में, विंड्स कार्यक्रम 7 राज्यों में कार्यान्वित किया जा रहा है।
कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (एसएमएएम) के तहत किसान ड्रोन की खरीद के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के कृषि स्नातकों, लघु एवं सीमांत किसानों को 50% तक की सहायता प्रदान करके ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अन्य किसानों को किसान ड्रोन खरीदने के लिए लागत के 40% की वित्तीय सहायता दी जा रही है। किसान ड्रोन के कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए भी लागत के 40% की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। एसएमएएम योजना के तहत कुल 2122 ड्रोन वितरित/अनुमोदित किए जा चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, 'नमो ड्रोन दीदी' केंद्रीय क्षेत्र योजना का उद्देश्य उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव सहित कृषि अनुप्रयोगों के लिए किसानों को किराये पर ड्रोन सेवाएँ उपलब्ध कराने के साथ चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन उपलब्ध कराना है। उर्वरक विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एसएचजी की ड्रोन दीदियों को 1094 ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं। इन सभी एसएचजी सदस्यों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा अधिकृत रिमोट पायलट संगठनों (आरपीटीओएस) में प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग:
- राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस): यह प्रणाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग का उपयोग करके फसलों में कीटों के प्रकोप का पता लगाती है और फसल की गुणवत्ता सुधारने के लिए समय पर हस्तक्षेप करके उपज के नुकसान को कम करती है। यह उपकरण किसानों को कीटों की तस्वीरें लेने की सुविधा देता है, जिससे उन्हें कीटों के हमलों से बचाव और फसल के नुकसान को कम करने में सहायता मिलती है। वर्तमान में, यह 73 फसलों के लिए 436 कीटों को कवर करता है। सेटेलाइट आधारित फसल मानचित्रण के लिए खेत की तस्वीरों का उपयोग करते हुए एआई-आधारित विश्लेषण का उपयोग फसल-मौसम मिलान और बोई गई फसलों की निगरानी में किया जा रहा है। अब तक, इस एप्लिकेशन के माध्यम से 35,565 एडवाइजरी जारी की जा चुकी हैं।
- भारत विस्तार: भारत विस्तार (कृषि संसाधनों तक पहुंच हेतु आभासी एकीकृत प्रणाली) कृषि के लिए एक बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) है। यह प्लेटफॉर्म किसानों को एआई-सक्षम, रियल टाइम और स्थान-विशिष्ट कृषि एडवाइजरी तथा सरकारी योजनाओं और कृषि सहायता सेवाओं तक पहुंच प्रदान करता है। अब तक, इस प्लेटफॉर्म ने 5.9 लाख से अधिक किसानों को सेवा प्रदान की है और किसानों के 93 लाख से अधिक प्रश्नों का समाधान किया है। यह केंद्र सरकार की 18 योजनाओं, फसल और पशुधन संबंधी एडवाइजरी, मौसम पूर्वानुमान, मंडी मूल्य, कीट और रोग की पहचान, मृदा स्वास्थ्य आधारित सुझावों, शिकायत निवारण आदि के संबंध में जानकारी प्रदान करता है। यह प्लेटफॉर्म चैटबोट (वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन) और एक विशिष्ट टेलीफोन लाइन के माध्यम से उपलब्ध है।
- किसान सारथी: कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को फसल-विशेष के संबंध में एडवाइजरी प्रदान करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विकसित आईसीटी-आधारित मंच किसान सारथी का उपयोग कर रहे हैं। देशभर से 2.97 करोड़ से अधिक किसान इस मंच पर पंजीकृत हैं।
डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत एग्रीस्टैक परियोजना और अन्य आरएस-आईएस पहलें विभिन्न योजनाओं के साथ मिल कर व्यापक डिजिटल सेवाओं में सहयोग करती हैं। इनका उद्देश्य पीएम-किसान योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आधारित खरीद, उर्वरक बुकिंग और पीएमएफबीवाई के तहत दावों का पारदर्शी, कुशल, सटीक और समय पर निपटान करके लाभार्थियों को सटीक रूप से लक्षित करना है। ये सेवाएं महाराष्ट्र में आपदा राहत वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण को आधे घंटे के भीतर स्वीकृत करने और खरीद योजनाओं में किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बेहतर पहुंच जैसी सेवाओं की त्वरित डिलीवरी को भी सक्षम बनाती हैं। इसके अतिरिक्त, किसान आईडी का उपयोग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत नामांकन, पीएम-आशा की मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खरीद और फसल एवं इनपुट नियोजन में सहायता के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड से लिंक करने के लिए किया जा रहा है। साथ ही, डिजिटल फसल सर्वेक्षण डेटा का उपयोग लगभग रियल टाइम में फसल उत्पादन अनुमान जनरेट करने के लिए किया जा रहा है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत, प्राकृतिक खेतों/समूहों की जियो-रेफ्रेंसिंग कृषि मैपर (Krishi Mapper) एप्लिकेशन के अंतर्गत कैप्चर की जाती है।
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RC/MS
(रिलीज़ आईडी: 2297665)
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