कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
राष्ट्रीय कृषि मशीनीकरण नीति
प्रविष्टि तिथि:
11 AUG 2026 4:33PM by PIB Delhi
3738. श्री परषोत्तमभाई रुपालाः
क्या कृषि और किसान कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) क्या सरकार का अनुसंधान के लिए एक राष्ट्रीय संस्थागत तंत्र की स्थापना सहित दक्षिण कोरिया, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, इजराइल और ऑस्ट्रेलिया से सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं को अपनाते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय कृषि मशीनीकरण नीति तैयार करने का विचार है;
(ख) क्या सरकार का विशेष रूप से सीमांत किसानों के लिए मशीनीकरण को गति प्रदान करने के लिए इंटेलिजेंट कृषि रोबोट, महिला-अनुकूल कृषि उपकरणों, कौशल विकास को बढ़ावा देने और घरेलू तथा विदेशी निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का विचार है; और
(ग) क्या सरकार का घरेलू कृषि मशीनीकरण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दक्षिण कोरिया और अन्य तकनीकी रूप से उन्नत देशों के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायिक साझेदारी स्थापित करने का विचार है और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?
उत्तर
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री (श्री रामनाथ ठाकुर)
(क) और (ख): राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) की समग्र योजना के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित योजना 'कृषि मशीनीकरण उप-मिशन' (एसएमएएम) को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संबंधित राज्य सरकारों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों और उन क्षेत्रों तक कृषि मशीनीकरण की पहुंच बढ़ाना है जहां फार्म पावर की उपलब्धता कम है, साथ ही छोटे भू-जोत और कृषि मशीनों के व्यक्तिगत स्वामित्व की उच्च लागत के कारण उत्पन्न होने वाले प्रतिकूल पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं की समस्या का सामना करने के लिए 'कस्टम हायरिंग सेंटर्स' को बढ़ावा देना है।
इस योजना के तहत किसानों को कृषि मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए मशीनों की लागत के 40-50% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना 250 लाख रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत के 40% की वित्तीय सहायता के साथ कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) की स्थापना में भी सहयोग करती है। 30 लाख रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत के 80% की वित्तीय सहायता के साथ कृषि मशीनरी बैंक (एफएमबी) की स्थापना में भी सहयोग किया जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों के एफएमबी के लिए वित्तीय सहायता परियोजना लागत के 95% तक है। एसएमएएम के तहत प्रिसिजन कृषि हेतु उपकरण, ड्रोन और अन्य उन्नत मशीनीकरण प्रौद्योगिकियां और महिला-अनुकूल कृषि उपकरण सहित आधुनिक कृषि मशीनरियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। एसएमएएम उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि मशीनरी के परीक्षण और प्रमाणीकरण, क्षमता निर्माण, डेमॉन्सट्रेशन और प्रशिक्षण में भी सहयोग करता है।
एसएमएएम के साथ-साथ, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना भी लागू की गई है। इसका उद्देश्य रियायती कृषि मशीनरी उपलब्ध कराकर, कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित करके और पराली जलाने को कम करने के लिए अन्य उपाय करके सतत फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देना है। वर्ष 2023-24 से, सीआरएम योजना को आरकेवीवाई के तहत एसएमएएम में एकीकृत किया गया है, जिसमें केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का वित्त पोषण अनुपात है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत कृषि दक्षता में सुधार और कृषि कार्यबल की शारीरिक मेहनत को कम करने के लिए बागवानी मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जाता है। एमआईडीएच के तहत पौध संरक्षण उपकरणों सहित, बिजली से चलने वाली मशीनों और औजारों की खरीद, और नई मशीनों के आयात जैसे कार्यकलापों के लिए सहायता प्रदान की जाती है। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) के तहत, सीएचसी और एफएमबी जैसी पात्र कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए ब्याज अनुदान, ऋण गारंटी कवरेज और मध्यम से दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण के रूप में सहायता प्रदान की जाती है।
कृषि मशीनरी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से किया जाता है। इसमें सात संस्थान शामिल हैं, जिनमें भारत भर में 105 केंद्रों वाली छह अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाएं (एआईसीआरपी), दो अखिल भारतीय नेटवर्क परियोजनाएं और चार कंसोर्टिया अनुसंधान प्लेटफॉर्म शामिल हैं। सरकार वैश्विक तकनीकी विकास की निरंतर समीक्षा करती है और भारतीय कृषि की दक्षता, उत्पादकता और स्थिरता में सुधार के लिए उपयुक्त नवाचारों और सर्वोत्तम पद्धतियों को अपनाती है।
सरकार कृषि मशीनरी निर्माण क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देती है, जिससे वैश्विक मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) को घरेलू उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए बढ़ावा मिलता है। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलता है, कृषि मशीनरी इकोसिस्टम मजबूत होता है और भारतीय कृषि में उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाना सुविधाजनक हो जाता है। आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने के लिए विनिर्माण, नवाचार और मशीनीकरण सेवाओं में घरेलू और निजी क्षेत्र के उद्यमों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाता है। कृषि मशीनरी और डिजिटल मशीनीकरण समाधान विकसित करने वाले कृषि स्टार्टअप को आरकेवीवाई-कृषि और संबद्ध क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए लाभकारी दृष्टिकोण कार्यक्रम (रफ्तार) के तहत इनक्यूबेशन, नवाचार चुनौतियों और वित्तपोषण के माध्यम से सहायता प्राप्त होती है। सरकार सीएचसी और किराए पर मशीनरी देने संबंधी (मशीनरी रेंटल) प्लेटफार्मों के माध्यम से निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाली मशीनीकरण सेवा वितरण को बढ़ावा देती है, जिससे किसानों को उपकरण खरीदने के बजाय किराए पर लेने की सुविधा मिलती है। सरकार ने गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देने और निर्माताओं के लिए तेजी से बाजार पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कृषि मशीनरी के परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया है।
(ग): वर्तमान में, कृषि मशीनरी के लिए विशेष रूप से दक्षिण कोरिया या अन्य तकनीकी रूप से उन्नत देशों के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी अंतरण और व्यावसायीकरण साझेदारी स्थापित करने का कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं है। तथापि, मौजूदा संस्थागत तंत्रों के तहत कृषि क्षेत्र में कृषि मशीनीकरण सहित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, जिसमें कृषि मशीनरी भी शामिल है, विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से किया जाता है। इस प्रकार के सहयोग में सहयोगात्मक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी अंतरण, क्षमता निर्माण, विशेषज्ञता का आदान-प्रदान और संबंधित समझौतों के प्रावधानों के अनुसार अन्य पारस्परिक रूप से सहमत कार्यकलाप शामिल हैं।
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RC/MS
(रिलीज़ आईडी: 2297670)
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