मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने भारत के पशुधन सेक्‍टर में हुई अत्‍यधिक वृद्धि पर प्रकाश डाला


केसीसी के तहत 50 लाख से अधिक किसानों को ऋण से जोड़ा गया; 6.4 लाख किसानों ने डिजिटल प्रशिक्षण में भाग लिया

वैज्ञानिक प्रजनन और चारा विकास को राष्ट्रीय स्तर पर गति प्रदान की गई

घर-घर जाकर पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा और रोग नियंत्रण को सुदृढ़ किया गया

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2026 4:12PM by PIB Delhi

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने भारत के पशुधन सेक्‍टर में उठाए गए प्रमुख कदमों की घोषणा की, जिसमें संस्थागत ऋण विस्तार, डिजिटल पहुंच और पशुधन उत्पादकता का विस्तृत विवरण शामिल है।

पशुपालन करने वाले किसानों के लिए ऋण की उपलब्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की गई। वित्त वर्ष 2025-26 में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 50.42 लाख हो गई, जो 2021-22 में 15.08 लाख थी। भारत का वार्षिक दूध उत्पादन 2024-25 में 247.87 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो घरेलू मांग (243 मिलियन टन) से कहीं अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल डेयरी निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

दीर्घकालिक उपज और आनुवंशिक गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय राज्यों में अपनी प्रमुख योजनाओं का सक्रिय रूप से विस्तार कर रहा है:

राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम): वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों में सहायता करने के लिए भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग ने दिसंबर 2014 से स्वदेशी नस्लों के विकास और संरक्षण, मवेशियों की आबादी के आनुवंशिक उन्नयन और दूध उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) कार्यान्वित किया है, जिससे दूध उत्पादन किसानों के लिए अधिक लाभदायक बन सके।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम): देश में वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देने और चारे की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से, भारत सरकार का पशुपालन एवं डेयरी विभाग वित्तीय वर्ष 2014-15 से राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना लागू कर रहा है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना का उद्देश्य रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास, प्रति पशु उत्पादकता में वृद्धि करना है और इस प्रकार व्‍यापक कार्यक्रम के अंतर्गत मांस, बकरी के दूध, अंडे और ऊन के उत्पादन में वृद्धि करना है। एनएलएम योजना की अवधारणा उद्यमियों को विकसित करना है ताकि असंगठित क्षेत्र में उपलब्ध उत्पादों के लिए फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज स्थापित किया जा सके और उन्हें संगठित क्षेत्र से जोड़ा जा सके।

भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) के अंतर्गत तमिलनाडु में पिछले पांच वर्षों के दौरान पशुधन विकास को बढ़ावा देने और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए की गई प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:-

  • एनएलएम-ईडीपी के तहत व्यक्तियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), संयुक्त देयता समूहों (जेएलजी), किसान सहकारी संगठनों (एफसीओ) और धारा 8 कंपनियों को 50 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी प्रदान की जाती है। एनएलएम योजना पशुधन और मुर्गीपालन के नस्ल विकास, चारा और पशु आहार विकास, अनुसंधान एवं विकास, पशुधन बीमा और विस्तार पर केंद्रित है।
  • एलएचडीसीपी के तहत सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पशुधन रोगों जैसे कि खुरपका एवं मुंहपका रोगों (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (पीपीआर) और क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) की रोकथाम के लिए टीकाकरण हेतु शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अन्य पशुधन रोगों के टीकाकरण, उभरते और विदेशी रोगों के नियंत्रण, प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ बनाने, रोग निगरानी, ​​प्रशिक्षण और जागरूकता जैसे राज्य-प्राथमिकता प्राप्त गतिविधियों के लिए साझा आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • किसानों के घर-घर जाकर पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए 245 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (एमवीयू) के संचालन हेतु तमिलनाडु राज्य को साझा आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

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पीके/केसी/एसकेजे/एसएस


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