मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए आवंटन
प्रविष्टि तिथि:
11 AUG 2026 5:40PM by PIB Delhi
भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने वित्त वर्ष 2020-21 से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 20,750 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) लागू की है। पीएमएमएसवाई के अंतर्गत मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतारने के केंद्रों, मछली बाजारों, शीत भंडारण, बर्फ संयंत्रों, थोक मछली बाजारों, हैचरी, प्रजनन बैंकों आदि सहित मत्स्य पालन अवसंरचना के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 से लागू की गई मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों सहित विभिन्न पात्र संस्थाओं को मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना के विकास के लिए रियायती वित्त प्रदान करती है। इन योजनाओं (पीएमएमएसवाई और एफआईडीएफ) के तहत अनुमोदित प्रमुख अवसंरचना गतिविधियों में- 184 मछली पकड़ने के बंदरगाह और मछली उतारने के केंद्र, 775 शीत भंडारण और बर्फ संयंत्र, 1,394 जीवित मछली बिक्री इकाइयाँ, 6,018 मछली कियोस्क, 117 खुदरा मछली बाजार, 24 थोक मछली बाजार, मछली परिवहन सुविधाओं की 28,489 इकाइयाँ जिनमें 13,718 आइस बॉक्स वाली मोटरसाइकिलें, 8,527 आइस बॉक्स वाली साइकिलें, 4,257 ऑटो रिक्शा, 1,577 इंसुलेटेड ट्रक और 410 रेफ्रिजरेटेड ट्रक शामिल हैं।
बढ़ते शुल्क और बदलते वैश्विक व्यापार पैटर्न के बावजूद, भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात 2025-26 के दौरान 19.72 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जिसका मूल्य 73,890 करोड़ रुपये (8.46 अरब अमेरिकी डॉलर) था। समुद्री खाद्य निर्यात में मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी 2013-14 में 2% से बढ़कर 2024-25 में 11% हो गई। समुद्री निर्यात 128 से अधिक देशों को किया गया। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहा, जिसके बाद चीन, यूरोपीय संघ (ईयू), दक्षिण पूर्व एशिया (एसईए), जापान, मध्य पूर्व और अन्य देश आते हैं।
समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात की सतत वृद्धि के लिए, भारत सरकार के मत्स्य विभाग ने वाणिज्य विभाग, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) और निर्यात निरीक्षण परिषद के सहयोग से निर्यात बाजारों में विविधता लाने के लिए विभिन्न पहलें की हैं। इन पहलों में भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर जागरूकता कार्यक्रम, हितधारकों के साथ परामर्श, मूल्यवर्धन पर चिंतन शिविरों का आयोजन, निर्यात के लिए नए बाजारों की पहचान और व्यापार सुगमता बढ़ाने के लिए मौजूदा बाजारों में भारत की उपस्थिति को मजबूत करना, व्यापार प्रतिनिधिमंडलों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों के माध्यम से निर्यात को बढ़ावा देना, क्रेता-विक्रेता बैठकें (बीएसएम) और प्रतिवर्ती क्रेता-विक्रेता बैठकें (आरबीएसएम) आयोजित करना, समुद्री खाद्य निर्यात पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन करना और बाजार पहुंच को सुगम बनाने के लिए विदेशों में भारतीय दूतावासों के साथ सहयोग करना शामिल है। मत्स्य विभाग ने संभावित साझेदार देशों के दूतावासों और उच्चायोगों के साथ सहयोग के रास्ते तलाशने और मत्स्य क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार सहयोग को मजबूत करने के लिए कई गोलमेज बैठकें भी की हैं।
इसके अलावा, भारत सरकार का मत्स्य विभाग, पीएमएमएसवाई के तहत विविध जलीय कृषि को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें सीबास, कोबिया, पोम्पानो, मड क्रैब, जीआईएफटी तिलापिया, ग्रूपर, पेनायस मोनोडॉन, स्कैम्पी और समुद्री शैवाल जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य नए निर्यात बाजारों की पहचान करना और भारतीय समुद्री भोजन की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए मौजूदा बाजारों को मजबूत करना है।
भारत सरकार का मत्स्य विभाग मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने, जैव सुरक्षा और गुणवत्ता अनुपालन को मजबूत करने, स्वचालन और अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) सहयोग को प्रोत्साहित करने और सतत मत्स्य विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अतिरिक्त, सरकार आयात करने वाले देशों के साथ स्वच्छता और पादप स्वच्छता (एसपीएस) संबंधी मुद्दों, निर्यात प्रमाणन आवश्यकताओं और बाजार पहुंच संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर संपर्क में है, साथ ही प्रयोगशाला अवसंरचना, अवशेष निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणालियों को मजबूत कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन विभाग ने बताया है कि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पशुधन रोगों जैसे कि फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (पीपीआर) और क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) की रोकथाम के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, अन्य पशुधन रोगों के टीकाकरण, उभरते और विदेशी रोगों के नियंत्रण, प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ बनाने, रोग निगरानी, प्रशिक्षण और जागरूकता जैसे राज्य-प्राथमिकता प्राप्त गतिविधियों के लिए भी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को साझा आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, एफएमडी, ब्रुसेलोसिस, पीपीआर और क्लासिकल स्वाइन फीवर के लिए क्रमशः 147.05 करोड़, 3.19 करोड़, 6.74 करोड़ और 0.26 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। लंपी स्किन डिजीज के लिए कुल 34.62 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। किसानों के घर तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए 4019 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (एमवीयू) के संचालन हेतु 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को साझा आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। पशुधन रोगों के प्रकोप की संख्या 2019 में 132 से घटकर 2025 में 40 रह गई है।
यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/पीएस
(रिलीज़ आईडी: 2297852)
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