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मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत वित्तीय सहायता
प्रविष्टि तिथि:
11 AUG 2026 5:31PM by PIB Delhi
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीएमएफआरआई) मछली पकड़ने की गतिविधियों की लगातार निगरानी करने के साथ ही विशेष रूप से जैविक अनुसंधान करता है। आंध्र प्रदेश सहित तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में वास्तविक समय सर्वेक्षण (रियल-टाइम सर्वे) के माध्यम से तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य पर नजर रखता है। इसी तरह भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई) ईईजेड में व्यवस्थित खोजपूर्ण सर्वेक्षण करता है। इससे समुद्र की तलहटी और खुले समुद्र में रहने वाली मछलियों के स्टॉक के बारे में शुरुआती डेटा मिलता है, जो मछली पकड़ने के दबाव, जलवायु में बदलाव, प्रदूषण और प्राकृतिक वास के नुकसान के असर का आकलन करने में मदद करता है। इन संस्थानों से मिले वैज्ञानिक सबूत बताते हैं कि पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं कुछ प्रजातियों के फैलाव, उनकी संख्या और मौसम के हिसाब से उनकी उपलब्धता पर असर डालते हैं, लेकिन सिर्फ जलवायु में बदलाव और समुद्री प्रदूषण की वजह से समुद्री मछलियों के कुल उत्पादन पर कोई सीधा और पक्का असर साबित नहीं हुआ है।
इसके अलावा,आईसीएआर-सीएमएफआरआई की भारत की समुद्री मछली स्टॉक की स्थिति (2022)' रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ईईजेड में आंकी गई 135 समुद्री मछली स्टॉक में से 91.1% स्टॉक स्थायी स्तर पर हैं।
मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग 2020-21 से आंध्र प्रदेश सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को संचालित कर रहा है। पीएमएमएसवाई के तहत सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 21,461.03 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 9,571.09 करोड़ रुपये है। आंध्र प्रदेश के लिए 2,328.89 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिसमें 681.38 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा भी शामिल है। पीएमएमएसवाई मछली की उपलब्धता बढ़ाने और मछुआरों की आजीविका को सुधारने के लिए लंबे समय तक संसाधन बढ़ाने वाले उपायों, जैसे कि आर्टिफिशियल रीफ (कृत्रिम चट्टानें) लगाना और 'सी रैंचिंग' (समुद्र में मछली पालन) को भी बढ़ावा देता है। मत्स्यपालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) के तहत आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ब्याज अनुदान के लिए 4,979.04 करोड़ रुपये के साथ 6,657.57 करोड़ रुपये की कुल लागत से 253 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
विभाग राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के माध्यम से पीएमएमएसवाई के तहत समूह दुर्घटना बीमा योजना (जीएआईएस) को लागू करता है। 2021-22 से 2026-27 अवधि के दौरान केंद्र सरकार ने 167.64 लाख मछुआरों को इंश्योरेंस कवरेज देने के लिए 130.68 करोड़ रुपये जारी किए, जो हर साल औसतन 33.52 लाख मछुआरों के बराबर है। बीमाकृत मछुआरों और निपटाए गए दावों का राज्य-वार विवरण अनुबंध-I में दिया गया है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश सरकार ने 2023-24 से 2025-26 के दौरान 63,840 लाभार्थियों को डीजल सब्सिडी के तौर पर 150.00 करोड़ रुपये देने की जानकारी दी है। साथ ही, 2025-26 और 2026-27 में मछली पकड़ने पर लगी रोक की अवधि के दौरान 2,55,731 समुद्री मछुआरों को 511.46 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
पीएमएमएसवाई के तहत भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग मछली संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से मछली पकड़ने पर रोक और कम काम वाले मौसम (लीन सीजन) के दौरान सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े सक्रिय पारंपरिक मछुआरा परिवारों को आजीविका और पोषण संबंधी सहायता प्रदान करता है। इसके अलावा तटीय इलाकों में मछलियों की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर कई तरह के उपाय कर रहा है। इनमें तट के किनारे कृत्रिम रीफ बनाना, 'सी रैंचिंग' (समुद्र में मछलियाँ छोड़ना) करना और मछलियों के प्रजनन के अहम समय के दौरान हर साल एक जैसा मछली पकड़ने पर रोक लगाने का नियम लागू करना शामिल है।
अनुबंध- I
पीएमएमएसवाई के तहत वित्तीय सहायता के संबंध में विवरण:
|
क्रम संख्या
|
राज्यों के नाम
|
बीमाकृत मछुआरों की संख्या
|
निपटाये गए दावे
|
निपटाई गई राशि
|
|
(i)
|
(ii)
|
(iii)
|
(vii)
|
(viii)
|
|
1
|
अरुणाचल प्रदेश
|
4,173
|
0
|
0
|
|
2
|
असम
|
8,83,630
|
4
|
15,23,746
|
|
3
|
बिहार
|
7,50,000
|
3
|
15,00,000
|
|
4
|
छत्तीसगढ़
|
11,02,377
|
12
|
57,50,000
|
|
5
|
गोवा
|
14,540
|
1
|
5,00,000
|
|
6
|
गुजरात
|
4,91,237
|
10
|
50,00,000
|
|
7
|
हरियाणा
|
8,076
|
0
|
0
|
|
8
|
हिमाचल प्रदेश
|
54,988
|
6
|
25,75,000
|
|
9
|
झारखंड
|
8,36,991
|
4
|
20,00,000
|
|
10
|
कर्नाटक
|
3,62,371
|
21
|
1,05,00,000
|
|
11
|
मध्य प्रदेश
|
5,04,264
|
1
|
5,00,000
|
|
12
|
महाराष्ट्र
|
5,25,519
|
25
|
1,25,00,000
|
|
13
|
मणिपुर
|
8,534
|
1
|
5,00,000
|
|
14
|
मेघालय
|
4,280
|
0
|
0
|
|
15
|
ओडिशा
|
53,91,593
|
102
|
4,70,14,059
|
|
16
|
पंजाब
|
15,959
|
0
|
0
|
|
17
|
राजस्थान
|
24,426
|
2
|
10,00,000
|
|
18
|
सिक्किम
|
2,905
|
0
|
0
|
|
19
|
तमिलनाडु
|
27,81,317
|
591
|
28,13,16,727
|
|
20
|
तेलंगाना
|
18,53,832
|
948
|
47,03,89,005
|
|
21
|
त्रिपुरा
|
1,81,724
|
0
|
0
|
|
22
|
उत्तर प्रदेश
|
5,19,570
|
5
|
20,21,385
|
|
23
|
उत्तराखंड
|
18,115
|
0
|
0
|
|
24
|
पश्चिम बंगाल
|
8,499
|
0
|
0
|
|
|
कुल
|
1,63,48,920
|
1,736
|
84,45,89,922
|
|
केंद्र-शासित प्रदेश
|
|
|
|
|
1
|
अंडमान और निकोबार
|
65,087
|
3
|
15,00,000
|
|
2
|
दिल्ली
|
1,881
|
0
|
0
|
|
3
|
दमन और दीव
|
38,267
|
0
|
0
|
|
4
|
जम्मू और कश्मीर
|
1,25,309
|
5
|
25,00,000
|
|
5
|
लक्षद्वीप
|
11,142
|
2
|
5,18,224
|
|
6
|
लद्दाख
|
2,674
|
0
|
0
|
|
7
|
पुडुचेरी
|
1,71,456
|
28
|
1,25,75,000
|
|
|
कुल
|
4,15,816
|
38
|
1,70,93,224
|
|
|
कुल योग
|
1,67,64,736
|
1,774
|
86,16,83,146
|
मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2298025)
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