पंचायती राज मंत्रालय
ई-ग्रामस्वराज के माध्यम से पंचायतों में डिजिटल अभिशासन को सुदृढ़ करना
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 2:34PM by PIB Delhi
पंचायती राज मंत्रालय, 'राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान' (आरजीएसए) के तहत 'ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना' (एमएमपी) को लागू कर रहा है। इसका उद्देश्य सभी राज्यों में डिजिटल सक्षमता के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के कामकाज में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और जवाबदेही को मज़बूत बनाना है। पंचायती राज संस्थाओं में नियोजन, वित्तीय प्रबंधन और सेवा प्रदायगी में वृद्धि करने के लिए 'ई-ग्राम स्वराज' ऐप को कई डिजिटल शासन प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया है। प्रमुख एकीकरण इस प्रकार हैं:
- सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस): ऑनलाइन निधि प्रबंधन, लेखांकन और विक्रेताओं और लाभार्थियों को शुरू से अंत तक (एंड-टू-एंड) डिजिटल भुगतान के लिए।
- सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) : पंचायती राज संस्थाओं द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को पारदर्शी और कुशल तरीके से सुगम बनाना।
- बीएसएनएल : पंचायतों को ई ग्राम स्वराज के माध्यम से नए इंटरनेट कनेक्शन के लिए आवेदन करने और भारतनेट कनेक्शन के बिल भुगतान को सुविधाजनक बनाना।
- भाषिणी : प्लेटफॉर्म की पहुँच को बेहतर बनाने के लिए बहुभाषी और एआई-आधारित भाषा अनुवाद और वॉयस-बेस्ड सेवाएं उपलब्ध कराना।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) : पंचायती राज संस्थाओं द्वारा स्थानीय नियोजन और निर्णय लेने में सहायता के लिए मौसम संबंधी जानकारी प्रदान करना।
ये एकीकरण सभी राज्यों के लिए ईग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराए गए हैं और उम्मीद है कि इससे ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाली देश भर की सभी ग्राम पंचायतों को लाभ होगा।
इसके अलावा, पंचायती राज मंत्रालय ने 'सभासार' लॉन्च किया है। यह एआई-आधारित 'वॉयस-टू-टेक्स्ट' बैठक सारांश उपकरण टूल है, जो ग्राम सभा की कार्यवाही को व्यवस्थित रूप से कैप्चर करता है और उसका सारांश बनाने में मदद करता है। साथ ही, यह निर्धारित समय सीमा में होने वाली ग्राम सभा के बैठकों की संख्या, उनके प्रकार और लोगों की भागीदारी जैसे अहम पैरामीटरों की निगरानी में भी सहयोग करता है। यह प्लेटफॉर्म चर्चाओं के अनुसार, निर्णयों और भागीदारी की जानकारी को कैप्चर करता है, और इसे तैयार किए गए कार्यवृत्त को पंचायत पदाधिकारियों को समीक्षा, सत्यापन और अंतिम स्वीकृति के लिए उपलब्ध कराया जाता है। सभासार सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए उपलब्ध करा दिया गया है।
वित्त वर्ष 2025-26 में सभी राज्यों में कुल 2,58,725 ग्राम पंचायतों और उनके समकक्ष निकायों में से 2,55,251 (98.65%) ने अपने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को ई-ग्राम स्वराज पर अपलोड कर दिया है और 2,45,839 ग्राम पंचायतों और समकक्ष निकायों (95%) ने ई-ग्राम स्वराज-पीएफ़एमएस इंटरफ़ेस के माध्यम से रु.57,337 करोड़ का भुगतान किया है। इसके अलावा, कुल 1,35,956 ग्राम पंचायतों और समकक्ष निकार्यों ने बैठकों के स्वचालित सारांश तैयार करने के लिए 'सभासार' टूल का उपयोग किया है और सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में बैठकों के 3,57,020 से अधिक कार्यवृत की प्रक्रिया पूरी की गई है।
इन पहलों से डिजिटल कार्यप्रवाह और वास्तविक समय में निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, मानकीकृत नियोजन और वित्तीय प्रबंधन प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करके जवाबदेही में सुधार करने, डैशबोर्ड और रिपोर्ट के माध्यम से साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करने, मैनुअल सुधारों को कम करने और पंचायत गतिविधियों के नियोजन, लेखांकन, निगरानी और कार्यान्वयन के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करके शासन के आसान होने की उम्मीद है।
यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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(रिलीज़ आईडी: 2298163)
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