पंचायती राज मंत्रालय
सोलहवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित ग्रामीण स्थानीय निकाय (आरएलबी) अनुदान
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 2:36PM by PIB Delhi
सोलहवें वित्त आयोग (FC‑16) ने अनुशंसा अवधि 2026‑31 के लिए सभी 28 राज्यों, जिनमें छत्तीसगढ़ भी सम्मिलित है, में विधिवत गठित पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों हेतु कुल ₹4,35,236 करोड़ की अनुदान राशि की अनुशंसा की है। इस राशि में से, छत्तीसगढ़ राज्य हेतु ₹11,664 करोड़ की अनुशंसा की गई है।
वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग ने दिनांक 21.05.2026 के पत्र द्वारा सोलहवें वित्त आयोग (FC‑16) द्वारा अनुशंसित ग्रामीण स्थानीय निकाय अनुदानों के क्रियान्वयन हेतु परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। FC‑16 अनुदान दो घटकों — बेसिक ग्रांट तथा परफॉर्मेंस ग्रांट — में विभाजित हैं, जिनका अनुपात 80:20 है। बेसिक ग्रांट को आगे ‘टाइड’ और ‘अनटाइड’ अनुदानों में विभाजित किया गया है। बेसिक ग्रांट का 50 प्रतिशत भाग ‘टाइड ग्रांट’ के रूप में निर्धारित है, जबकि शेष 50 प्रतिशत बेसिक ग्रांट तथा संपूर्ण परफॉर्मेंस ग्रांट ‘अनटाइड’ हैं। टाइड ग्रांट ‘स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ तथा/या ‘जल प्रबंधन’ के लिए अभिप्रेत हैं, जबकि अनटाइड ग्रांट का उपयोग ग्रामीण स्थानीय निकाय संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित उनतीस विषयों के अंतर्गत स्थान विशिष्ट जरूरतों के लिए कर सकते हैं।
पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों के स्वयं के राजस्व (OSR) संकलन को सुदृढ़ करने हेतु निम्नलिखित उपाय किए हैं:–
(i) पंचायती राज मंत्रालय ने आई.आई.एम. अहमदाबाद के सहयोग से ग्राम पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता को मज़बूत बनाने के लिए 'स्वयं के राजस्व स्रोत' (ओएसआर) पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया है। यह मॉड्यूल निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों को यह समझने में मदद करता है कि कर और गैर-कर स्रोतों के माध्यम से ओएसआर कैसे उत्पन्न होता है। दिनांक 10.07.2026 की स्थिति के अनुसार, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आर.जी.एस.ए.) के तहत, 'स्वयं के राजस्व स्रोत' (ओएसआर) पर निर्मित विशेष मॉड्यूल के ज़रिए कुल 2,75,893 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है।
(ii) वर्ष 2025 में, पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों द्वारा अपने स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) को बढ़ाकर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए 'आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार' (ए.एन.पी.एस.ए.) शुरू किया।
(iii) पंचायती राज मंत्रालय ने समर्थ पंचायत पोर्टल भी विकसित किया है। यह एक समर्पित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो कर और गैर-कर मांगों के सृजन और संग्रह, कर रजिस्टर के रखरखाव और राजस्व की ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।
(iv) राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को उनके स्वयं के राजस्व (Own Source Revenue) के विधिक एवं संस्थागत ढाँचे को सुदृढ़ करने में सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से, मंत्रालय ने ‘स्वयं के राजस्व हेतु मॉडल नियम’ तैयार किए हैं, जिन्हें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विचारार्थ मार्गदर्शक रूपरेखा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये मॉडल नियम परामर्शात्मक प्रकृति के हैं तथा पंचायतों के स्वयं के राजस्व ढाँचे को सुदृढ़ करने हेतु संदर्भ के रूप में प्रयुक्त किए जाने के लिए अभिप्रेत हैं। राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश अपनी विद्यमान विधिक प्रावधानों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं तथा स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन मॉडल नियमों को पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से अपनाने, अनुकूलित करने अथवा संशोधित करने का विकल्प रख सकते हैं।
(v) अप्रैल, 2020 में शुरू की गई स्वामित्व (गाँवों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी द्वारा मानचित्रण) योजना का कार्यान्वयन ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति करों के विकास के लिए एक मजबूत नींव रखता है, जिससे अंततः आरएलबी के लिए स्वयं के राजस्व स्रोत ज़्यादा इकट्ठा होता है और वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनते हैं।
पंचायती राज संस्थाओं द्वारा राज्यों, जिनमें छत्तीसगढ़ भी सम्मिलित है, में केंद्रीय वित्त आयोग अनुदानों के वितरण एवं उपयोग में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा पर्यवेक्षण एवं निगरानी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, मंत्रालय ने अप्रैल 2020 से ‘ई‑ग्रामस्वराज’ वेब पोर्टल (https://egramswaraj.gov.in) प्रारंभ किया है। यह पोर्टल पंचायतों के सभी वित्तीय कार्यों — योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक — को एकीकृत करता है। इस प्रणाली से प्राप्त प्रगति संबंधी आँकड़े पोर्टल पर प्रदर्शित किए जाते हैं, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, ताकि राज्य, जिला एवं प्रखंड स्तर पर समवर्ती निगरानी की जा सके।
ई‑ग्रामस्वराज पोर्टल को पंचायतों के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे विक्रेताओं एवं सेवा प्रदाताओं को वास्तविक समय में डिजिटल भुगतान की सुविधा प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त, अप्रैल 2020 में ‘ऑडिट‑ऑनलाइन’ एप्लिकेशन प्रारंभ किया गया है, जो पंचायत खातों एवं उनके वित्तीय प्रबंधन का ऑनलाइन लेखा परीक्षण सक्षम बनाता है। यह उपकरण केंद्रीय वित्त आयोग की निधियों के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करता है तथा पंचायत स्तर पर वित्तीय पर्यवेक्षण को सुदृढ़ करता है।
यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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(रिलीज़ आईडी: 2298166)
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