इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
‘उमंग’ और डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण का विस्तार
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 1:40PM by PIB Delhi
प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण करने और नागरिकों को सशक्त बनाने के माननीय प्रधानमंत्री जी के दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत सरकार ने जुलाई, 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया था। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत, सरकार ने डिजिटल पहुंच में सुधार और निर्बाध रूप से नागरिक-केंद्रित सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं, जिनमें ‘उमंग’ (नए युग के शासन के लिए एकीकृत मोबाइल अनुप्रयोग) और डिजिलॉकर प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं।
31 जुलाई, 2026 की स्थिति के अनुसार पूरे भारत में ‘उमंग’ (नए युग के शासन के लिए एकीकृत मोबाइल अनुप्रयोग) प्लेटफ़ॉर्म पर लगभग 2,575 सेवाएं [केंद्र सरकार की : 880; राज्य सरकारों की : 1,695] उपलब्ध हैं और डिजिलॉकर प्लेटफ़ॉर्म पर 5,437 प्रकार के दस्तावेज़/सेवाएं [केंद्र सरकार के : 661; राज्य सरकारों के : 4,776] उपलब्ध हैं।
उमंग के 11.66 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं, जो पिछले 3 वर्ष में लगभग 798 करोड़ लेन-देन के साक्षी बने हैं और डिजिलॉकर के 72.43 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और पिछले 3 वर्ष में उन्होंने लगभग 72.86 करोड़ दस्तावेजों का अभिगम किया है।
सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच में सुधार के लिए सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के नेटवर्क का विस्तार किया है। सीएससी नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाएं प्रदान करते हैं। इनमें सरकार, बैंकिंग, वित्तीय, बीमा, पेंशन और उपयोगिता भुगतान सेवाएं शामिल हैं। 30 जून, 2026 की स्थिति के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर पर 4,07,122 सीएससी कार्य कर रहे थे। इनमें से 70,069 सीएससी का संचालन ग्राम स्तरीय महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा था।
ग्रामीण, दूरदराज और तुलनात्मक रूप से कम सेवा उपलब्धता वाले क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच में सुधार और निर्बाध सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करने के लिए किए गए अन्य प्रमुख उपाय नीचे दिए गए हैं:
- मोबाइल और वेब-आधारित पहुंच: उमंग और डिजिलॉकर प्लेटफ़ॉर्म मोबाइल अनुप्रयोग और वेब पोर्टल दोनों के माध्यम से उपलब्ध हैं, जो नागरिकों को किसी भी समय और कहीं भी सरकारी सेवाओं तक पहुंच स्थापित करने में सक्षम बनाते हैं।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के साथ एकीकरण: उमंग और डिजिलॉकर को प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के घटकों जैसे आधार, ई-साइन, एपीआई सेतु और अन्य प्रमुख डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों के साथ एकीकृत किया गया है, जो निर्बाध रूप से और कागज़ रहित सेवा प्रदायगी को सक्षम बनाता है।
- सुरक्षित और कागज़ रहित शासन: दोनों प्लेटफ़ॉर्म सुरक्षित प्रमाणीकरण, डिजिटल दस्तावेज़ सत्यापन और सहमति-आधारित साझाकरण की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे कुशल सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करते हुए भौतिक यात्राओं और कागज़-आधारित प्रक्रियाओं की आवश्यकता कम हो जाती है।
- डिजिटल साक्षरता और जागरूकता: सरकार ‘पीएमजीदिशा’ (प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान) जैसी पहलों के माध्यम से डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देती है और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाती है।
- बहुभाषी और सुलभ सेवाएं: उमंग और डिजिलॉकर कई भारतीय भाषाओं में सेवाएं प्रदान करते हैं और डिजिटल सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने के लिए पहुंच और उपयोगकर्ता अनुभव में लगातार सुधार करते हैं।
- सेवाओं का निरंतर विस्तार: उमंग और डिजिलॉकर पर अधिक से अधिक नागरिक-केंद्रित सेवाओं और डिजिटल दस्तावेजों को एकीकृत करने के लिए सरकारी विभागों और राज्य सरकारों को नियमित रूप से ऑनबोर्ड किया जाता है।
यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 07-08-2026 को राज्यसभा में दी।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2298171)
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