पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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संसद प्रश्न: गहरा समुद्र मिशन

प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 12:39PM by PIB Delhi

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन चेन्नई स्थित राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) को गहरे महासागर से पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स के विश्वसनीय और टिकाऊ संग्रहण हेतु प्रौद्योगिकियां विकसित करने का दायित्व सौंपा गया है। एक समुद्री तल खनन प्रणाली विकसित की गई है, जिसके लिए गतिशीलता और प्रणाली-शक्ति परीक्षण अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (आईएसए) द्वारा आवंटित मध्य हिंद महासागर बेसिन (सीआईओबी) स्थल पर 5270 मीटर की गहराई पर सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। इसके अतिरिक्त, एनआईओटी ने आईएसए दिशानिर्देशों के अनुसार नोड्यूल संग्रहण और क्रशिंग घटकों के विकास का कार्य भी किया है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने हिंद महासागर में राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में पाए जाने वाले समुद्री खनिजों, विशेष रूप से पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स (पीएमएन) और पॉलीमेटैलिक सल्फाइड्स (पीएमएस) के अन्वेषण के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (आईएसए) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। संसाधन मूल्यांकन और पर्यावरण प्रभाव आकलन का अध्ययन आईएसए के निर्धारित संविदात्मक दायित्वों और दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाता है। अन्वेषण अनुबंध के तहत भारतीय अनुबंध क्षेत्रों में आधारभूत पर्यावरणीय स्थितियों को स्थापित करने और गहरे समुद्र के परितंत्र पर अन्वेषण गतिविधियों के संभावित प्रभावों का आकलन करने के लिए बहुविषयक समुद्र विज्ञान अध्ययन किए जाते हैं। वर्तमान में, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल में केवल गहरे समुद्री तल के खनिजों के अन्वेषण से संबंधित गतिविधियों की अनुमति है।

यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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