सहकारिता मंत्रालय
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सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी

प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 5:04PM by PIB Delhi

विगत तीन वर्षों के दौरान सहकारिता मंत्रालय ने "सहकार से समृद्धि" की परिकल्‍पना के अधीन सहकारी क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और सुशासन को प्रोत्‍साहन देने के लिए अनेक सुधारात्‍मक उपाय किए हैं । की गई प्रमुख पहलें और उनके परिणाम निम्‍नानुसार हैं:-

  1. प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्‍स) के कंप्‍यूटरीकरण की परियोजना: मंत्रालय 2,516 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ कार्यशील पैक्स के कंप्‍यूटरीकरण के लिए केंद्रीय प्रायोजित परियोजना कार्यान्वित कर रहा है, जिसे अब बढ़ाकर 2925.39 करोड़ रुपये कर दिया गया है जिसमें सभी कार्यशील पैक्स को ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) आधारित कॉमन राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाकर उन्हें राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के माध्यम से नाबार्ड के साथ लिंक करना है । यह ईआरपी-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर के माध्यम से उनकी प्रचालन दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करने के उद्देश्य से किया गया है । यह परियोजना मानकीकृत लेखांकन, संपरीक्षा, एमआईएस, ऑनलाइन सेवा प्रदाय और विभिन्न राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्‍स के साथ एकीकरण की सुविधा प्रदान करती है, जिससे सदस्यों को कुशल शासन और बेहतर सेवा प्रदाय सक्षम होता है । प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्‍स) के कंप्‍यूटरीकरण परियोजना के अधीन 63,686 पैक्स को ईआरपी-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर में ऑनबोर्ड किया गया है, 54,707 पैक्स को ई-पैक्स के रूप में घोषित किया गया है और दिनांक 15.07.2026 तक सॉफ्टवेयर के माध्यम से 51.58 करोड़ से अधिक के डिजिटल लेनदेन किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर पारदर्शिता बढ़ी है, सेवा प्रदाय और वित्तीय प्रबंधन में सुधार हुआ है

  डिजिटल प्रौद्योगिकी और पारदर्शिता को प्रोत्‍साहित करने के लिए ई-पैक्‍स सॉफ्टवेयर में निम्‍नलिखित विशेषताएं शामिल हैं:

  1. समग्र कार्यात्‍मक कवरेज: इस सॉफ्टवेयर में 22 ईआरपी मॉड्यूल्‍स शामिल हैं जो पैक्‍स प्रचालन के पूरे स्पेक्ट्रम को शामिल करते हैं, जिसमें क्रेडिट (ऋण उत्पत्ति, मंजूरी, संवितरण और वसूली), जमा, लेखांकन, संपरीक्षा, सदस्य प्रबंधन, प्रापण और पैक्स के अन्य व्यावसायिक कार्य शामिल हैं ।
  2. मानकीकृत, CAS-MIS अनुरूप लेखांकन: यह सॉफ्टवेयर कॉमन एकाउंटिंग सिस्‍टम और मैनेजमेंट इन्‍फॉर्मेशन सिस्‍टम (सीएएस-एमआईएस) मानदंडों के अनुरूप लेखा बहीखातों और वित्तीय विवरणियां तैयार करता है, जिससे देश भर के पैक्स में लेखांकन प्रथाओं में एकरूपता आती है ।
  3. अंतरप्रचालनीयता और एकीकरण: यह सॉफ्टवेयर आधार-सक्षम सेवाओं, राज्‍य सहकारी बैंकों/जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस), प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) उपकरणों, कॉमन सेवा केंद्रों (सीएससी), राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) और राज्य-विशिष्ट पोर्टलों के साथ एकीकरण का समर्थन करता है, जो पैक्स को एक बड़े डिजिटल परितंत्र के हिस्से के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाता है
  4. डिजिटल ऋण प्रदाय: यह सॉफ्टवेयर एंड-टू-एंड ऋण उत्पत्ति, केसीसी प्रोसेसिंग और मोबाइल एप्लिकेशन सहायता जैसी सुविधाएं प्रदान करता है, जिससे सदस्यों को त्‍वरित एवं अधिक पारदर्शी ऋण प्रदाय की सुविधा प्राप्‍त होती है ।
  5. सुरक्षित क्‍लाउड आर्किटेक्‍चर: सभी ऑनबोर्ड किए गए पैक्स का डेटा उचित साइबर सुरक्षा उपायों के साथ सुरक्षित, केंद्रीकृत क्लाउड-आधारित स्टोरेज पर रखा जाता है जो स्टैंडअलोन स्थानीय सिस्‍टमों और भौतिक रिकॉर्ड पर निर्भरता को खत्‍म करता है ।  
  6. आंतरिक नियंत्रण और ऑन-सिस्‍टम ऑडिट: सॉफ्टवेयर में मेकर-चेकर कार्यात्‍मकता और एक ऑन-सिस्टम ऑडिट मॉड्यूल शामिल है, जो लेनदेन की निरंतर निगरानी और सिस्टम पर सीधे सांविधिक ऑडिट करने में सक्षम बनाता है ।
  7. डैशबोर्ड्स, एनालिटिक्स और एमआईएस: निगरानी और निर्णय समर्थन के लिए उच्च स्तरीय हितधारकों के लिए डैशबोर्ड्स, एनालिटिक्स और एमआईएस रिपोर्टें उपलब्ध हैं ।
  8. बहुभाषी क्षमता: इस सॉफ्टवेयर की एक प्रमुख विशेषता इसकी बहुभाषी क्षमता है, जो पैक्‍स कर्मियों को क्षेत्रीय भाषाओं में सॉफ्टवेयर चलाने में सक्षम बनाती है । वर्तमान में, यह सॉफ्टवेयर 20 भाषाओं में उपलब्ध है ।
  9. राज्‍य-विशिष्‍ट अनुकूलन: जबकि कोर सॉफ्टवेयर देश भर में आम है, यह राज्य-विशिष्ट उप-विधियों, उत्पादों, प्रक्रियाओं और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को समायोजित करने के लिए अनुकूलन योग्य है ।
  10. अब तक, पैक्स के 4.02 करोड़ उधारकर्ताओं के ऋण विवरण, जो 2.3 लाख करोड़ रुपये है, का डिजिटलीकरण किया जा चुका है और ई-पैक्स पर अधिकृत हितधारकों के लिए उपलब्ध है ।
  11. 5.49 करोड़ जमाकर्ताओं के जमा विवरण जो लगभग 37,000 करोड़ रुपये है, को भी डिजिटल किया गया है ।
  12. 10.30 करोड़ सदस्यों के सदस्यता रिकॉर्ड अब ईपैक्स पर उपलब्ध हैं । ये पैक्स-वार, सदस्य-वार रिकॉर्ड, जो अब तक केवल भौतिक स्‍वरूप द्वारा उपलब्ध थे, अब ईपैक्स पर हैं।
  13. सीएससी पोर्टल को ई-पैक्स के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे पैक्‍स को कॉमन सेवा केंद्रों के रूप में कार्य करने और जन-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाया गया है । पीएमकेएसके, एग्रीस्टैक और पीएमबीजेके के साथ एकीकरण उन्नत चरणों में है ।
  14. नाबार्ड ईपैक्स के माध्यम से ऋण प्रक्रिया के एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण को कार्यान्वित करने की प्रक्रिया में है जिसके बाद कृषि ऋण पोर्टल (केआरपी) के साथ एकीकरण किया जा रहा है, ताकि कुशल ऋण मंजूरी और संवितरण के साथ-साथ सदस्यों को ब्याज अनुदान के लाभ का लक्षित प्रदाय सुनिश्चित किया जा सके ।
  15. एग्रीस्टैक पोर्टल के साथ एकीकरण के माध्यम से किसान प्रोफाइल, किसानों की भूमि और फसल के विवरण, के साथ-साथ स्‍केल ऑफ फाइनेंस (एसओएफ) के विवरण का उपयोग ईपैक्स प्रणाली में ऋण प्रोसेसिंग और मंजूरी के लिए किया जा सकता है । इसके अलावा, ईपैक्स के माध्यम से स्वीकृत ऋणों का विवरण सामान्य पहचानकर्ता के रूप में आधार का उपयोग करके केआरपी के साथ साझा किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि ऋणदाताओं को आधार-प्रमाणन द्वारा ब्याज अनुदान लाभ दिया जा सके ।
  16. ई-पैक्स को डीसीसीबी के कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस (सीबीएस) के साथ एकीकृत करने के लिए एक चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीति का पालन किया जाता है ताकि सात दिन में ऋण प्रदाय और "पेपरलेस से कैशलेस" लक्ष्य दोनों को सक्षम किया जा सके । चूंकि इस एकीकरण में ई-पैक्स और सीबीएस, दोनों स्तरों पर काम करना शामिल है, इसलिए डीसीसीबी के सीबीएस वेंडरों को भी इस प्रक्रिया में भाग लेने की आवश्यकता होती है। प्रारंभिक ध्यान टीसीएस वेंडरों पर है, जो 16 राज्यों में 168 बैंकों (एसटीसीबी/डीसीसीबी) को कवर करता है, और तदुपरांत  एकीकरण को अन्य सीबीएस विक्रेताओं तक विस्तारित किया जाएगा ।
  • xvii. मेकर-चेकर नियंत्रण: सॉफ्टवेयर मेकर-चेकर कार्यक्षमता प्रदान करता है, जिससे लेनदेन को प्राधिकरण से पहले सत्यापन के कई स्तरों से गुजरना पड़ता है, जिससे आंतरिक नियंत्रण मजबूत होता है और प्रचालन जोखिम कम होता है ।
  1. राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में सहकारी समितियों के पंजीयक कार्यलयों के कंप्‍यूटरीकरण की योजना: मंत्रालय द्वारा दिनांक 30.01.2024 को वर्ष 2023-24 से तीन वर्षों के लिए ₹94.59 करोड़ के बजटीय परिव्‍यय से राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में सहकारी समितियों के पंजीयक के कार्यालयों के कंप्‍यूटरीकरण की एक केंद्रीय प्रायोजित परियोजना लॉन्‍च की है । यह मंत्रालय की "आईटी इंटरवेंशंस के माध्यम से सहकारी समितियों के सशक्तीकरण" की अंब्रेला योजना का हिस्सा है । इस परियोजना का लक्ष्‍य सहकारी समितियों के लिए सुगम व्‍यवसाय में वृद्धि करना और सभी राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में सहकारी समितियों तथा आरसीएस कार्यालयों के बीच पारदर्शी, कागज़रहित और डिजिटल परितंत्र का सृजन करना है । परियोजना के अधीन राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को हार्डवेयर प्रापण, सॉफ्टवेयर विकास, रखरखाव एवं उन्नयन, आदि के लिए अनुदान प्रदान किया जा रहा है । इस योजना के अधीन विकसित किया जाने वाला सॉफ्टवेयर संबंधित राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के सहकारिता अधिनियमों के अनुरूप होगा । वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 और वित्तीय वर्ष 2026-27 (15 जुलाई, 2026 तक) के दौरान, कुल 35 राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों ने अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं तथा राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को भारत सरकार के हिस्से के रूप ₹43.21 करोड़ की राशि जारी की गई है।
  2. कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (ARDBs) का कंप्‍यूटरीकरण: दीर्घकालिक सहकारी ऋण संरचना को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा 13 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों में फैले कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) की 1,851 इकाइयों के कंप्‍यूटरीकरण की परियोजना को अनुमोदित किया गया है । नाबार्ड इस परियोजना की कार्यान्‍वयन एजेंसी है । अब तक 10 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों से प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए हैं जिसमें 1422 इकाइयों को मंजूरी दी गई है । इसके अलावा, हार्डवेयर प्रापण, डिजिटलीकरण और सपोर्ट सिस्‍टम स्‍थापित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24, वित्तीय वर्ष 2024-25, वित्तीय वर्ष 2025-26 और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 9 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को भारत सरकार के हिस्‍से के रूप में 16.74 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं । 
  3. राष्‍ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी): देश भर में सहकारी समितियों से संबंधित कार्यक्रमों/ योजनाओं हेतु नीति निर्माण और कार्यान्‍वयन में हितधारकों की सुविधा के लिए राज्‍य सरकारों के सहयोग से देश में सहकारी समितियों का एक व्‍यापक डेटाबेस विकसित किया गया है।  एनसीडी पोर्टल को दिनांक 08.03.2024 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा लॉन्‍च किया गया था । इस डेटाबेस में अब तक 30 विभिन्न क्षेत्रकों की लगभग 8.6 लाख सहकारी समितियों, जिनसे लगभग 32 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं, के डेटा शामिल हैं ।
  4. राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) पोर्टल 3.0 का शुभारंभ: अद्यतित/उन्नत संस्करण एनसीडी पोर्टल 3.0 को आधिकारिक तौर पर माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 06.07.2026 को लॉन्च किया गया था । एनसीडी पोर्टल 3.0 कई नई सुविधाएँ प्रदान करता है जिनमें ओटीपी-आधारित सुरक्षित लॉगइन, सहकारी समिति-स्तरीय उपयोगकर्ता पहुंच और डैशबोर्ड, एआई चैटबॉट, ग्राम-स्तरीय जीआईएस मैपिंग, भाषिनी एकीकरण के माध्यम से बहुभाषी समर्थन, डेटा के रियल-टाइम अद्यतन के लिए राज्य आरसीएस पोर्टलों के साथ एपीआई एकीकरण, फीडबैक तंत्र, तथा कॉल प्रबंधन और तकनीकी हेल्पडेस्क सहायता, बेहतर सुरक्षा एवं तीव्र एक्‍सेस के लिए डेटाबेस आदि शामिल हैं ।
  5. एनसीडी जियोटैग मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ: एनसीडी जियोटैग मोबाइल एप्लिकेशन को सभी कार्यशील सहकारी समितियों की जीपीएस अवस्थिति (अक्षांश और देशांतर) को कैप्चर करने के लिए विकसित किया गया है । इसे दिनांक 06.07.2026 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा लॉन्च किया गया था । यह मोबाइल एप्लिकेशन एनसीडी पोर्टल पर सहकारी समितियों की सटीक जियो-टैगिंग और जीआईएस-आधारित मैपिंग को भी सक्षम करेगा ।
  6. सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक (CRCS) के कार्यालय का कंप्‍यूटरीकरण: ऑनलाइन पंजीकरण, उप-विधियों में संशोधन और समयबद्ध सेवा प्रदाय को सक्षम करने हेतु बहुराज्य सहकारी समितियों के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम बनाने के लिए सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक कार्यालय को कंप्‍यूटरीकृत किया गया है ।
  7. सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क: सरकार ने सहकारी समितियों की राज्य-वार और क्षेत्र-वार मूल्यांकन और रैंकिंग करने के लिए दिनांक 24 जनवरी 2025 को सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क लॉन्च किया । यह रैंकिंग फ्रेमवर्क राज्य के आरसीएस को प्रमुख मापदंडों, जैसे ऑडिट अनुपालन, प्रचालन कार्यकलापों, वित्तीय प्रदर्शन, अवसंरचना और बुनियादी पहचान सूचना के आधार पर सहकारी समितियों के प्रदर्शन का आकलन करने में सक्षम बनाता है । राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पोर्टल के माध्‍यम से राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों द्वारा 12 प्रमुख क्षेत्रों, अर्थात् पैक्स, डेयरी, मात्स्यिकी, शहरी सहकारी बैंक, आवासन, क्रेडिट और थ्रिफ्ट, खादी एवं ग्राम उद्योग, कृषि प्रसंस्‍करण/औद्योगिक, हस्‍तशिल्‍प, हथकरघा, वस्‍त्र और बुनकर, बहुउद्देशीय और सहकारी चीनी समितियों की राज्‍य, जिला और प्रखंड स्‍तर पर रैंकिंग प्रदान कर सकते हैं । इस रैंकिंग प्रणाली का लक्ष्‍य सहकारी समितियों के बीच पारदर्शिता, विश्‍वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्‍साहित कर अंततः उनके विकास को बढ़ावा देना है ।
  8. राज्‍य के आरसीएस पोर्टल को एपीआई के माध्यम से एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकरण में राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को सुविधा प्रदान करना: सहकारिता मंत्रालय ने राज्य की सहकारी समितियों के संपूर्ण डेटा को एनसीडी पोर्टल से संबंधित आरसीएस पोर्टल पर प्राप्‍त करने हेतु एक मानक एपीआई का विकास किया है और इस मानक एपीआई विनिर्देश दस्‍तावेज तथा डाटाबेस स्‍कीम को राज्‍यों के साथ दिनांक 27.05.2025 को साझा किया है । तदुपरांत, मंत्रालय ने आरसीएस पोर्टलों से एनसीडी पोर्टल पर लाइव, इवेंट ड्रिवन डेटा पुशिंग के लिए पुश  APIs (एंड प्‍वॉइंट APIs) पर दिनांक 22.09.2025 को एक दस्‍तावेज साझा किया है जिससे रियल टाइम अद्यतन और नया पंजीकरण डाटा सुनिश्चित हो सके । इस प्रक्रिया को और भी स्‍पष्‍ट करने के लिए दिनांक 14.11.2025 को सभी राज्‍यों/संघ राज्यक्षेत्रों को एक परामर्शी सहित समग्र चेक-लिस्‍ट जारी की गई । एकीकरण योजना के अनुसार, राज्यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने स्‍तर पर रिवर्स/पुल एपीआई का विकास सुनिश्चित करें और एनसीडी पोर्टल के साथ सफल एकीकरण के लिए चेकलिस्‍ट के अनुसार आरसीएस कंप्‍यूटरीकरण को पूरा करें । दिनांक 15.07.2026 की स्थिति के अनुसार राजस्‍थान, छत्तीसगढ़, बिहार, मिजोरम और सिक्किम राज्यों तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के संघ राज्‍यक्षेत्रों ने एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकरण पूर्ण कर लिया है । इस दो-तरफा एकीकरण से विभिन्‍न प्‍लेटफॉर्म्‍स पर सहकारी डेटा का सिंक्रोनाइजेशन सुनिश्चित होगा ।
  9. डिजिटल सेवाएं और प्रौद्योगिकी एकीकरण: पैक्‍स के लिए विकसित ईआरपी-आधारित सॉफ्टवेयर कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS), राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD), कॉमन सेवा केंद्र (CSC) और अन्य डिजिटल सेवा प्लेटफॉर्म्‍स जैसे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्‍स के साथ एकीकरण का समर्थन करता है, जिससे पैक्‍स, जीवंत बहुउद्देशीय आर्थिक संस्थानों के रूप में कार्य करने और अपने सदस्यों को विविध सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनता है ।   
  10. शासन संरचना का सशक्‍तीकरण: मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र में शासन, जवाबदेही और सुगम व्‍यवसाय में सुधार के लिए राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस की स्थापना, राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 का निर्माण, पारदर्शी और पेशेवर रूप से प्रबंधित सहकारी समितियों को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी-चालित निगरानी प्रणाली सहित कई नीतिगत और संस्थागत सुधार किए हैं ।
  11. शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को व्यापार विस्तारण हेतु नई शाखाएं खोलने की अनुमति: शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की पूर्वानुमति के बिना पिछले वित्तीय वर्ष में मौजूदा शाखाओं की संख्या का 15% (अधिकतम 10 शाखाएं) नई शाखाएँ खोल सकेंगे ।
  12. शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को आरबीआई  द्वारा अपने ग्राहकों को डोर-स्टेप सेवाएं प्रदान करने की अनुमति: शहरी सहकारी बैंकों द्वारा अब डोर-स्टेप बैंकिंग सुविधा प्रदान की जा सकती है I इन बैंकों के खाताधारक अब अपने घर पर ही विभिन्न बैंकिंग सुविधाएं जैसे नकद निकासी, नकद जमा, केवाईसी, डिमांड ड्राफ्ट और पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र, आदि का लाभ प्राप्त कर सकेंगे I
  13. शहरी सहकारी बैंकों के लिए अंब्रेला संगठन: भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन से शहरी सहकारी बैंक क्षेत्र के लिए एक अम्ब्रेला संगठन (यूओ) के रूप में नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनयूसीएफडीसी) की स्‍थापना की गई जो लगभग 1,500 शहरी सहकारी बैंकों को आवश्‍यक आईटी अवसंरचना और प्रचालनात्‍मक सहयोग प्रदान कर रहा  है । इसने डिजि लोन और डिजि पे जैसी विभिन्न सेवाएं लॉन्‍च की हैं ।
  14. सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों की तरह बकाया ऋणों का वन टाइम सेटलमेंट करने की अनुमतिसहकारी बैंक अब बोर्ड-अनुमोदित नीतियों के माध्यम से तकनीकी राइट-ऑफ करने सहित उधारकर्ताओं के साथ निपटान की प्रक्रिया भी प्रदान कर सकेंगे ।
  15. सहकारी बैंकों के लिए लाइसेंस शुल्क घटाया गया: AePS हेतु सहकारी बैंकों को 'आधार सक्षम भुगतान प्रणाली' (AePS) में ऑनबोर्ड करने के लाइसेंस शुल्क को लेनदेन की संख्या से लिंक करके घटा दिया गया है । सहकारी वित्तीय संस्थानों को उत्‍पादन-पूर्व चरण में अब यह सुविधा पहले तीन महीनों तक निःशुल्क प्राप्त होगी ।  इससे ऑनबोर्ड हुए बैंकों के सदस्यों को बायोमीट्रिक्‍स के माध्‍यम से अपने घर पर ही बैंकिंग की सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी ।
  16. भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने दिनांक 01.08.2025 को आधार समर्थित भुगतान प्रणाली (AePS) में सहकारी समितियों को ऑनबोर्ड होने के लिए एक नई संरचना की शुरूआत की है। अब, केवल एसटीसीबी को प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता एजेंसियों (एयूए)/ईकेवाईसी उपयोगकर्ता एजेंसियों (केयूए) के रूप में शामिल होने की आवश्यकता है; डीसीसीबी को राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से उप एयूए/केयूए के रूप में इसका नि:शुल्क उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।
  17. सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय): ग्रामीण सहकारी बैंकों  को प्रौद्योगिकीय सेवाएं प्रदान करने और उनके सशक्‍तीकरण के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन  के बाद सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय) प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई है। इसने ग्रामीण सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए 13  सेवाएं लॉन्‍च की हैं ।
  18. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 07.10.2025 की अपनी अधिसूचना के माध्‍यम से ग्रामीण सहकारी बैंकों को अपने एकीकृत ऑम्‍बड्समैन योजना में शामिल किया है । इससे ग्रामीण सहकारी बैंकों के कार्यों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी ।
  19. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 04.12 2025 के मास्‍टर निदेश द्वारा राज्‍य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) को स्‍वचालित माध्‍यम से नई शाखाएं (अधिकतम 10) खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है । पात्रता के अध्‍यधीन राज्‍य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक अब बिना विलंब के अपनी नई शाखाएं खोल सकेंगे और अपने व्‍यवसाय का विस्‍तार कर सकेंगे ।
  20. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 28.11.2025 के मास्‍टर निदेश द्वारा ग्रामीण और शहरी सहकारी बैंकों को आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए वित्तीय मानदंडों में शिथिलता प्रदान की है   सकल एनपीए का 7% से कम होना और शुद्ध एनपीए का 3% से अधिक न होने एवं शुद्ध लाभ की शर्तों की पूर्वापेक्षाओं को हटा दिया गया है । अब सहकारी बैंक अपने ग्राहकों को आसानी से आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर सकेंगे ।
  21. भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 04.12 2025 के मास्‍टर निदेश द्वारा व्‍यवसाय प्राधिकार के लिए पात्रता शर्तें मानदंड (ईसीबीए) जारी किया है जो पूर्व के वित्तीय सुदृढ़ और सुप्रबंधित (एफएसडब्‍ल्‍यूएम) प्रावधानों को अधिक्रांत करेंगे । इन मानदंडों से विगत दो वर्षों में कोई शास्ति के न होने से संबंधित उपबंध को हटा दिया गया है । अब सहकारी बैंक आसानी से नई शाखाएं खोल सकेंगे और अपने व्‍यवसाय का विस्‍तार कर सकेंगे ।
  22. सुशासन को प्रोत्‍साहन
  • ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए सहकारी शासन इंडेक्‍स

यह एसटीसीबी और डीसीसीबी में शासन मानकों का आकलन, मात्रा निर्धारण और शासन मानकों को बेंचमार्क करने के लिए नाबार्ड द्वारा विकसित अपनी तरह की पहला संरचना है, जो डैशबोर्ड और भूमिका-आधारित पहुंच के साथ एक डिजिटल पोर्टल द्वारा समर्थित है ।

परिणाम: आरसीबी के लिए सीजीआई पोर्टल 01 अप्रैल 2026 को लाइव हो गया, जिसने शासन को गुणात्मक, तुलनीय और निगरानी योग्य पैरामीटर में परिवर्तित किया और लक्षित उपचारात्मक कार्रवाई को सक्षम किया ।

  • वर्धित CAMELSC फ्रेमवर्क, सुपरसॉफ्ट और जोखिम आधारित पर्यवेक्षण

नाबार्ड ने आरसीबी में श्रेणीबद्ध तरीके से उन्नत CAMELSC फ्रेमवर्क की शुरुआत की है, जो जोखिम-आधारित पर्यवेक्षण की दिशा में एक आरंभिक कदम है जो निरीक्षण, अनुपालन ट्रैकिंग और पर्यवेक्षी एनालिटिक्‍स के लिए डिजिटल पर्यवेक्षी प्लेटफॉर्म सुपरसॉफ्ट द्वारा समर्थित शासन, आंतरिक नियंत्रण, आईटी जोखिम और साइबर-सुरक्षा मापदंडों को कैप्चर करता है ।

परिणाम: सहकारी क्षेत्र के लिए अधिक डेटा-चालित, दूरंदेशी और जोखिम-संवेदनशील पर्यवेक्षी परितंत्र  ।

  • आरबीआई मास्टर निर्देशों के अनुरूप मॉडल नीतियां

नाबार्ड ने आरसीबी द्वारा समान रूप से अपनाने के लिए आरबीआई के समेकित मास्टर निर्देशों के अनुरूप शासन, आईटी, साइबर सुरक्षा, संपरीक्षा, अनुपालन और जोखिम प्रबंधन को कवर करते हुए 26 मॉडल नीतियों का विकास शुरू किया है ।

  • शासन, क्षमता निर्माण और पर्यवेक्षी ओवरसाइट

कमजोर बैंकों के लिए संस्था-विशिष्ट टर्न अराउंड योजनाएं (टीएपी), प्रबंधन का व्यावसायीकरण, आंतरिक संपरीक्षा और बोर्ड स्तरीय संपरीक्षा/जोखिम समितियों को मजबूत करना और नाबार्ड के प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में निदेशकों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, ऋण, वसूली और संपरीक्षा स्‍टाफ का संरचित प्रशिक्षण ।

            मंत्रालय द्वारा किए गए सुधारात्मक उपायों ने सहकारी क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी को अपनाने, पारदर्शिता और सुशासन को उल्‍लेखनीय रूप से सशक्‍त किया है । इन पहलों ने ईआरपी-आधारित सॉफ्टवेयर, मानकीकृत लेखांकन प्रणाली, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, ऑनलाइन निगरानी, ऑडिट ट्रेल्स और रियल-टाइम मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) के माध्यम से सहकारी संस्थानों के डिजिटलीकरण को सक्षम किया है, जिसके परिणामस्वरूप प्रचालन दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार हुआ है ।

समग्र रूप से इन डिजिटल पहलों ने देश भर में सहकारी समितियों और उनके सदस्यों को सेवाओं के बेहतर प्रदायगी की सुविधा प्रदान करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने और कुशल शासन को बढ़ावा दिया है ।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

 

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AK/AP


(रिलीज़ आईडी: 2298370) आगंतुक पटल : 82
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