कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों का प्रभाव

प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 3:39PM by PIB Delhi

सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में चिन्हित कौशल की कमी को दूर करने के लिए तैयार और कार्यान्वित किए जाते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए, संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के अग्रणि‍यों के नेतृत्व में 36 क्षेत्र कौशल परिषद (एसएससी) स्थापित की गई हैं। इन परिषदों को संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने और कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है। विकसित हो रही कौशल आवश्यकताओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन और डिजिटल सहयोग टूल सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप बनाया गया है।

भारत सरकार के कौशल भारत मिशन (सिम) के तहत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न स्‍कीमों, जैसे कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) और राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन स्‍कीम (एनएपीएस) के अंतर्गत कौशल विकास केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से देश भर में समाज के सभी वर्गों को कौशलीकरण, पुनर्कौशलीकरण और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। कौशल भारत मिशन का उद्देश्य भारत के युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है, जिसमें ऑटोमेशन और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियाँ भी शामिल हैं।  इनमें से कुछ पहलों में निम्‍नलिखित शामिल हैं:

  • पीएमकेवीवाई के तहत, आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं के लिए एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी आदि जैसे क्षेत्रों में इंडस्ट्री 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष रूप से नए युग/भविष्य के कौशल वाले जॉब-रोल को तैयार किया गया है।
  • प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क, एआई प्रोग्रामिंग, साइबर सुरक्षा, ड्रोन प्रौद्योगिकी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
  • एमएसडीई ने राष्ट्रीय स्तर पर एसओएआर (स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस) पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य स्कूली छात्रों (कक्षा 6-12) में एआई जागरूकता और मूलभूत कौशल विकसित करना और शिक्षकों में एआई साक्षरता का निर्माण करना है। यह कार्यक्रम सभी भौगोलिक क्षेत्रों में एआई शिक्षा की समान पहुंच सुनिश्चित करके डिजिटल विभाजन को पाटने का प्रयास करता है, जिससे समावेशी और भविष्य के लिए तैयार कौशलीकरण के राष्ट्रीय कार्यसूची को समर्थन मिलता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने आईटी-आईटीईएस क्षेत्र कौशल परिषद (नैसकॉम) के साथ मिलकर फ्यूचर स्किल्स प्राइम प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अन्य डिजिटल कौशलों संबंधी पाठ्यचर्या प्रदान करके शिक्षार्थियों को 11 उभरती प्रौद्योगिकियों का ज्ञान प्रदान करना है। युवाओं के कौशली‍करण को बढ़ावा देने के लिए, नैसकॉम ने भविष्य के कौशलों से संबंधित जॉब रोल्‍स में 146 योग्यताएं सृजित की हैं।

 

उद्योग की बदलती मांग के अनुरूप तालमेल के लिए एमएसडीई द्वारा उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से की गई कुछ पहलों में निम्‍न शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियम और मानक स्थापित करने वाले एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है। एनसीवीईटी उद्योग निकायों को अवार्डिंग बॉडीज (एबी) और/या मूल्यांकन एजेंसियों (एए) के रूप में मान्यता देता है।
  • अवार्डिंग बॉडीज से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार चिन्हित व्यवसायों के साथ मैप करें तथा उद्योग से मान्यता प्राप्त करें।
  • एनसीवीईटी ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार 10209 योग्यताओं को अनुमोदन किया है, जिनमें से 2975 योग्यताएं वैध और सक्रिय हैं, जबकि 7234 योग्यताएं संग्रहीत हैं। कुल योग्यताओं में से 678 योग्‍यताओं को एनसीवीईटी द्वारा भविष्य के कौशल योग्यताओं की श्रेणी में रखा गया है।
  • प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) आईटीआई के छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए उद्योगों के सहयोग से फ्लेक्सी समझौता ज्ञापन योजना और प्रशिक्षण की दोहरी प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है।
  • राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट, ऑटोडेस्क, एडब्ल्यूएस, शेल आदि जैसी आईटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
  • उद्योग के लिए तैयार कार्यबल को उभरते आर्थिक अवसरों से संरेखित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में अहमदाबाद और मुंबई में दो (02) भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) स्थापित किए गए हैं।
  • संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के अग्रणि‍यों के नेतृत्व में 36 क्षेत्र कौशल परिषदों (एसएससी) की स्थापना की गई है, जिन्हें संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 में व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ अधिक एकीकृत करने और अकादमिक एवं व्यावसायिक शिक्षा के बीच सुगम आवागमन को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप, यूजीसी और एआईसीटीई के सहयोग से विकसित शिक्षुता-आधारित डिग्री कार्यक्रम (एईडीपी) डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों में नामांकित छात्रों को उनके पाठ्यचर्या के अभिन्न अंग के रूप में शिक्षुता प्रशिक्षण प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। यह कार्यक्रम रोजगार क्षमता को बढ़ाता है, परिणाम-आधारित अधिगम को बढ़ावा देता है, उद्योग-अकादमिक संबंधों को मजबूत करता है और उद्योग-संबंधी कौशल प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है।
  • उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशलीकरण और रोजगार क्षमता परिवर्तन (पीएम सेतु) स्‍कीम के तहत हब और स्पोक मॉडल में 1,000 सरकारी आईटीआई (200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई) को उन्नत किया जाएगा, जिसमें स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल सामग्री और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप नए पाठ्यक्रम शामिल हैं।

 

सरकार कौशल भारत मिशन के अंतर्गत कौशलीकरण पहलों की समय-समय पर समीक्षा करती है, जिसमें नामांकन, प्रमाणन, नियोजन, स्वरोजगार के परिणाम और नियोक्ताओं के  फीडबैक का आकलन करके रोजगार क्षमता और भविष्य के कौशल को मजबूत करने में उनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाता है। ये समीक्षाएँ पाठ्यचर्या के निरंतर अद्यतन करने, उद्योग सहयोग और कार्यान्वयन पद्धतियों में सुधार का समर्थन करती हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कौशलीकरण कार्यक्रम विकसित हो रही प्रौद्योगिकी प्रवृत्तियों और श्रम बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप बने रहें। व्यापक कौशल विकास योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन एमआईएस-आधारित निगरानी, ​​तृतीय-पक्ष आकलन और लाभार्थियों की प्रतिक्रिया के माध्यम से भी किया जाता है।

कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री जयन्‍त चौधरी ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एसकेएस/एसवी


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