कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
कौशल प्रशिक्षण केंद्रों के लिए परिणाम आधारित वित्त पोषण
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 3:38PM by PIB Delhi
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के सहयोग से कौशल परिणाम निधि (एसओएफ) की घोषणा की है। इसे एक अभिनव, परिणाम-आधारित सार्वजनिक-निजी मिश्रित वित्तपोषण प्रणाली के रूप में तैयार किया गया है, जिसके लिए 530 करोड़ रुपये की प्रस्तावित निधि है। इसमें से 225 करोड़ रुपये मंत्रालय द्वारा प्रतिबद्ध किए गए हैं तथा 305 करोड़ रुपये निजी क्षेत्र के वित्तदाताओं (निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और परोपकारी निधियों) से जुटाए जाएंगे। एसओएफ के अंतर्गत वित्तपोषण मॉडल को गतिविधि अथवा निवेश-आधारित मॉडल से परिणाम-आधारित मॉडल में परिवर्तित किया गया है। पैनलबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को किए जाने वाले भुगतान को पूर्वपरिभाषित रोजगार संबंधी लक्ष्यों की प्राप्ति तथा उनके स्वतंत्र सत्यापन से सीधे जोड़ा गया है।
एसओएफ में समावेशन पर विशेष बल दिया गया है, जिसके अंतर्गत महिला अभ्यर्थियों तथा निम्न-आय वाले परिवारों के युवाओं जैसे प्राथमिकता वाले सामाजिक समूहों को लक्षित कर सहायता प्रदान की जाती है। एसओएफ के अंतर्गत अभ्यर्थियों तक पहुंच, उनको जुटाने तथा प्रशिक्षण केंद्रों का वंचित क्षेत्रों में आवंटन भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है, ताकि जनसांख्यिकीय एवं भौगोलिक दृष्टि से विविधतापूर्ण कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।
एसओएफ के अंतर्गत भुगतान तंत्र में अभ्यर्थी के नामांकन के समय प्रशिक्षण प्रदाताओं को कोई कार्यक्रमगत भुगतान नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए सहमत कुल प्रशिक्षण लागत को तीन सत्यापित पड़ावों: प्रमाणीकरण (30 प्रतिशत), रोजगार में नियुक्ति (40 प्रतिशत) तथा तीन माह तक रोजगार में बने रहना (30 प्रतिशत) के आधार पर विभाजित किया जाएगा। यद्यपि लागत को इष्टतम बनाए रखने के लिए भुगतान के पड़ावों को तीन माह तक रोजगार में बने रहने की अवधि से संबद्ध किया गया है, तथापि एसओएफ में दीर्घावधि परिणामों पर निगरानी रखने के लिए सुदृढ़ आंकड़ा प्रणालियों को भी शामिल किया गया है।
पारंपरिक कौशलीकरण कार्यक्रमों से हटकर, जिनमें सुनिश्चित रोजगार के बिना प्रशिक्षण प्रारंभ किया जाता है, एसओएफ के अंतर्गत मांग-आधारित एवं नियोक्ता-नेतृत्व वाले प्रशिक्षण मॉडल की शुरुआत की गई है। इसमें प्रशिक्षण भागीदार वास्तविक बाजार में उपलब्ध रिक्तियों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण की योजना तैयार करते हैं। प्रशिक्षित एवं प्रमाणित अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के अवसरों में सुधार लाने हेतु प्रशिक्षण भागीदारों के प्रोत्साहनों को नियोक्ताओं एवं उद्योग के हितों के अनुरूप किया गया है। इसके अतिरिक्त, कौशल मेले और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेले जैसी मौजूदा व्यवस्थाएं भी प्रमाणित अभ्यर्थियों को रोजगार एवं शिक्षुता के अवसर उपलब्ध कराने में सहायता करेंगी। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय का स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) प्लेटफॉर्म, कौशल संवर्धन के लिए एक व्यापक एवं सुलभ प्लेटफॉर्म होने के साथ-साथ, देश के युवाओं को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल पाठ्यक्रम, रोजगार के अवसर तथा उद्यमिता संबंधी सहायता भी उपलब्ध कराता है। सिद्ध को श्रम और रोजगार मंत्रालय के राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल के साथ एकीकृत किए जाने के माध्यम से अभ्यर्थियों को अपनी पसंद के भौगोलिक क्षेत्रों में रोजगार एवं शिक्षुता के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/एसकेएस/एसवी
(रिलीज़ आईडी: 2298454)
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