गृह मंत्रालय
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मादक पदार्थों की तस्करी के मामले

प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 4:51PM by PIB Delhi

गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जानकारी दी कि सरकार ने मादक पदार्थों सहित सीमा पार तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

 

(i) सीसीटीवी, ड्रोन, स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली, पैन, टिल्ट और ज़ूम (पीटीजेड) कैमरा, नाइट विज़न डिवाइस (एनवीडी) जैसे उन्नत निगरानी उपकरणों की तैनाती।

(ii) सुरक्षा बलों की सतर्कता और गतिशीलता बढ़ाने के लिए बाड़बंदी, सीमा चौकियों, सड़कों तथा हेलीपैड का विकास।

(iii) अवैध गतिविधियों की निगरानी के लिए गश्त, नाका पॉइंट और मोबाइल टीमों के माध्यम से क्षेत्र पर नियंत्रण बढ़ाना।

(iv) स्थापित प्लेटफार्मों के माध्यम से वास्तविक समय में सूचना साझा करने के लिए खुफिया एजेंसियों और अन्य संगठनों के बीच घनिष्ठ सहयोग।

(v) लोगों और वस्‍तुओं की नियंत्रित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए निर्दिष्ट प्रवेश/निकास बिंदुओं की पहचान और प्रबंधन।

 

नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 15 अगस्त 2020 को 272 चिन्हित सबसे संवेदनशील जिलों में शुरू किया गया था। अगस्त 2023 से इसे देश के सभी जिलों में विस्तारित कर दिया गया है। नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य आम जनता तक पहुंचना और उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालय परिसरों और स्कूलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए मादक पदार्थों के सेवन के बारे में जागरूकता फैलाना है। सभी राज्यों के निरंतर सहयोग से, एनएमबीए ने देश भर में आयोजित व्यापक जागरूकता और आउटरीच गतिविधियों के माध्यम से 29.05 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचने और उन्हें जागरूक करने में सफलता प्राप्त की है, जिनमें 11.05 करोड़ से अधिक युवा और 7.81 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। 1.17 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र इस अभियान से जुड़ चुके हैं।

मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के लिए केंद्र-राज्य ढांचे को सुदृढ करने हेतु सरकार ने कई उपाय किए हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

(i) अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और मादक पदार्थों के दुरुपयोग की चुनौती से निपटने के लिए, मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न दस्तावेज़ (2026-2029) दिनांक 26.06.2026 को जारी किया गया है। इस विज़न दस्तावेज़ को संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/एजेंसियों और राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रत्येक केंद्रीय मंत्रालय/विभाग/एजेंसी के लिए विशेष रूप से उल्लिखित कार्य बिंदुओं और समय-सीमाओं के अनुसार कार्यान्वित किया जाना है। विज़न दस्तावेज़ में उल्लिखित चार प्रमुख फोकस क्षेत्र निम्नलिखित हैं: -

 

  1. प्रवर्तन (खुफिया जानकारी और संचालन)
  2. पूर्ववर्ती और सिंथेटिक दवाओं का नियंत्रण
  3. मांग एवं हानि न्यूनीकरण
  4. क्षमता निर्माण एवं समन्वय

 

(ii) भारत में मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग को नियंत्रित करने के क्षेत्र में केंद्रीय और राज्य मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए एक चार-स्तरीय (केंद्रीय स्तर पर सर्वोच्च और कार्यकारी समिति तथा राज्य स्तर पर राज्य और जिला स्तरीय समिति) नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) तंत्र की स्थापना की गई। राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठकों की अध्यक्षता मुख्य सचिव करते हैं, जबकि जिला स्तरीय एनसीओआरडी बैठकें प्रवर्तन, खुफिया जानकारी साझा करने और निवारक उपायों की समीक्षा के लिए जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में आयोजित की जाती हैं।

 

(iii) नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा विकसित एनसीओआरडी पोर्टल, जिला स्तर से लेकर केंद्रीय स्तर तक सभी हितधारकों के लिए एक व्यापक गेटवे और ज्ञान प्रबंधन प्रणाली के रूप में कार्य करता है।

 

(iv) राज्य में महत्वपूर्ण मादक पदार्थों के मामलों की जांच पर चर्चा करने के लिए संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं, जिनमें सभी संबंधित केंद्रीय और राज्य एजेंसियां ​​भाग लेती हैं। अब तक केंद्रीय स्तर पर 11 और राज्य स्तर पर 75 जेसीसी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।

 

(v) प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में अपर महानिदेशक/महानिरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में एक समर्पित मादक पदार्थ विरोधी कार्य बल (एंटीएफ) की स्थापना की जाती है, जो राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए एनसीओआरडी सचिवालय के रूप में कार्य करता है और विभिन्न स्तरों पर एनसीओआरडी बैठकों में लिए गए निर्णयों के अनुपालन पर अनुवर्ती कार्रवाई करता है।

 

(vi) एनसीबी ने देशभर में सक्रिय आदतन मादक पदार्थों के अपराधियों की एक सूची राज्य पुलिस के साथ साझा की है। यह सूची पहचान करने और उचित निवारक कार्रवाई शुरू करने में सुविधा प्रदान करने के लिए प्रसारित की गई थी, जिसमें बार-बार और उच्च जोखिम वाले मादक पदार्थों के तस्करों के विरूद्ध मादक पदार्थों और मनोरोग पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम (पीआईटीएनडीपीएस) अधिनियम, 1988 के तहत हिरासत पर विचार करना शामिल है। मादक कानून प्रवर्तन एजेंसियों (डीएलईए) ने पीआईटीएनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है और 2025 के दौरान देशभर में 810 आदतन मादक पदार्थों के अपराधियों और जून 2026 तक 427 अपराधियों के खिलाफ हिरासत आदेश जारी किए हैं।

राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा वर्ष 2024 से संबंधित प्रकाशित नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2022-2024 के दौरान मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत राज्यवार/केंद्र शासित प्रदेशवार और मादक पदार्थों की जब्ती अनुलग्नक-I में दी गई है।

 

नोट- अनुलग्‍नक देखने के लिए यहां क्लिक करें।

 

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पीके/केसी/एसकेजे/वाईबी


(रिलीज़ आईडी: 2298465) आगंतुक पटल : 72
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