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डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सुशासन का सशक्तिकरण
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 6:20PM by PIB Delhi
डिजिटल रूप से सशक्त और नागरिक-केंद्रित भारत का निर्माण
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के माध्यम से भारत के गवर्नेंस में एक मौलिक बदलाव आया है। सार्वजनिक सेवाएं, जो कभी व्यापक कागजी कार्रवाई और फिजिकल कार्यालयों पर निर्भर थीं, अब एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध हैं। पिछले 12 वर्षों में, डीपीआई ने नागरिकों, सरकारों और संस्थानों को एक अभूतपूर्व स्तर पर जोड़ा है। इसने गवर्नेंस को अधिक त्वरित, पारदर्शी और नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाया है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के आर्थिक विकास के एक मुख्य आधार के रूप में भी उभरा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 12–14 प्रतिशत का योगदान देती है और अगले दशक में इसके 20 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। 'स्टेट ऑफ इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी रिपोर्ट 2026' के अनुसार, भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था और चौथे स्थान पर स्थित जी20 अर्थव्यवस्था है। जैसा कि भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, डिजिटल गवर्नेंस का निरंतर विस्तार सर्विस डिलीवरी को मजबूत कर रहा है, आर्थिक अवसरों को सक्षम बना रहा है और विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है।
भारत में डिजिटल आत्मनिर्भरता के प्रमुख पड़ाव
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग: भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
'मेक इन इंडिया' के दृष्टिकोण विजन से प्रेरित होकर, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है। प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस), इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) और मॉडिफाइड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी 2.0) सहित प्रमुख पहलों ने भारत में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत किया है।

- इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन में 7 गुना वृद्धि: इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ हो गया है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना वृद्धि: इसी अवधि के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ हो गया है।
- तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र: इलेक्ट्रॉनिक सामान अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गया है, जिसका निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 47.96 अरब अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) तक पहुंच गया है।
- रोजगार और महिलाओं की भागीदारी: इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम लगभग 25 लाख नौकरियों को सपोर्ट करता है, जिसमें कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी लगभग 30 प्रतिशत है।
भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ सेमीकॉन 2.0 (Semicon 2.0) को मंजूरी दी है। आईएसएम 1.0 (आईएसएम 1.0) के तहत ₹1.64 लाख करोड़ मूल्य की 12 सेमीकंडक्टर इकाइयों को स्वीकृत किया गया है। तीन सुविधाएं पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, जबकि एक अन्य इकाई का संचालन इसी वर्ष शुरू होने की उम्मीद है।
मोबाइल फोन: विकास का एक प्रमुख कारक

- ग्लोबल मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब: भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है। मोबाइल फोन वित्त वर्ष 2014-15 में 153वां सबसे बड़ा निर्यात आइटम था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया है।
- मोबाइल फोन उत्पादन में 33 गुना वृद्धि: उत्पादन 2014-15 के ₹18,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹6.27 लाख करोड़ हो गया है।
- मोबाइल फोन निर्यात में 165 गुना बढ़ोतरी: इसी अवधि के दौरान निर्यात ₹1,500 करोड़ से बढ़कर ₹2.59 लाख करोड़ हो गया है।
- रोजगार और महिलाओं की भागीदारी: मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सृजित 12 लाख नौकरियों में से, कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत है।
बेहतर टेलीकम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर
- टेलीफोन कनेक्टिविटी: टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या वर्ष 2014 के 93.3 करोड़ से बढ़कर जून 2026 के अंत तक 134.8 करोड़ से अधिक हो गई है।
- बेहतर टेली-डेंसिटी: टेली-डेंसिटी 2014 के 75.23% से बढ़कर जून 2026 के अंत तक 94.31% हो गई है।
- वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबर: जून 2026 में एक्टिव वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबर की संख्या 1201.06 मिलियन तक पहुँच गई।
इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी

- इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में चार गुना वृद्धि: इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 के अंत तक 109.2+ करोड़ हो गई है।
- किफायती मोबाइल डेटा: वायरलेस डेटा की कीमत 2014 के ₹308/जीबी से भारी गिरावट के साथ 2026, में ₹7.51/जीबी रह गई है, जिससे डिजिटल सेवाएं अधिक सस्ती और सुलभ हो गई हैं।
- मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड: Ookla के ग्लोबल स्पीडटेस्ट इंडेक्स के अनुसार, औसत मोबाइल ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड मार्च 2022 के 13.67 एमबीपीएस (Mbps) से बढ़कर दिसंबर 2025 में 132.00 एमबीपीएस (Mbps) हो गई है।
- देशव्यापी 5G रोलआउट: 5G सेवाएं अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध हैं। जून 2026 में 5G बेस ट्रांसफॉर्मर स्टेशनों (बीटीएस) की संख्या बढ़कर 5.63 लाख तक पहुंच गई है।
- ग्रामीण मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार: बीएसएनएल और अन्य ऑपरेटरों द्वारा अब कुल 6.31 लाख गांवों को 4G सेवाओं से कवर किया जा चुका है।
- भारतनेट पहल के तहत कनेक्टिविटी: जून 2026 तक, 2.21 लाख ग्राम पंचायतें सेवा सर्विस-रेडी हैं, जो 8.5 लाख रूट किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल से जुड़ी हुई हैं।
- पीएम-वाणी (PM-WANI): पीएम-वाणी पब्लिक डेटा ऑफिसों और अन्य इकोसिस्टम पार्टनर्स के नेटवर्क के जरिए किफायती पब्लिक वाई-फाई उपलब्ध कराता है। 28 फरवरी 2026 तक, देशभर में 4 लाख से अधिक हॉटस्पॉट लगाए जा चुके हैं। मई 2026 में शुरू किए गए नए सुधारों से अब क्यूआर-आधारित ऑथेंटिकेशन, 15, 30 और 60 मिनट के वाई-फाई प्लान और स्टैंडर्ड हॉटस्पॉट नाम की सुविधा मिलने लगी है।
भारत 6G युग के लिए हो रहा है तैयार
भारत 6G विजन का उद्देश्य 2030 तक स्वदेशी अनुसंधान, बौद्धिक संपदा (आईपी), मानक विकास और अगली पीढ़ी के दूरसंचार इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत को 6G तकनीक में वैश्विक लीडरों में शामिल करना है।
यूपीआई: सहज डिजिटल भुगतान का आधार
वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है। यह ट्रांजैक्शन की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान सिस्टम बन गया है।

- ट्रांजैक्शन की संख्या: यूपीआई ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹314.23 लाख करोड़ मूल्य के कुल 24,161.69 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए।
- भारत का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान नेटवर्क: यूपीआई 55.49 करोड़ से अधिक व्यक्तियों, 6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवाएं प्रदान करता है और 731 बैंकों को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर जोड़ता है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनता है।
- भारत के डिजिटल पेमेंट में यूपीआई की हिस्सेदारी: वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के कुल डिजिटल पेमेंट ट्रांजेक्शन में अकेले यूपीआई की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत रही।
- मासिक ट्रांजेक्शन में अभूतपूर्व वृद्धि: भारत भर में यूपीआई को तेजी से अपनाए जाने के कारण इसके मासिक ट्रांजेक्शन वर्ष 2016 के महज 0.01 करोड़ प्रति माह से बढ़कर 2025 तक 2,000 करोड़ से अधिक प्रति माह हो गए।
- यूपीआई का वैश्विक विस्तार: यूपीआई अब सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस और कंबोडिया जैसे 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है।
- ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी ): ओएनडीसी एक ऐसा खुला डिजिटल वाणिज्य नेटवर्क बना रहा है, जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद खरीदारों और विक्रेताओं को आपस में जोड़ता है।
- जून 2026 तक, इसके 20 करोड़ से अधिक खरीदार, 5 लाख विक्रेता, 1,000 शहरों में उपस्थिति और लगभग 90 लाख मासिक ट्रांजेक्शन हो चुके हैं।
- ई-सरस (eSaras) और इंडियाहैंडमेड (Indiahandmade) के साथ इसके इंटीग्रेशन ने 11 से अधिक बायर ऐप्स के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), बुनकरों और कारीगरों के लिए बाजार तक पहुँच का विस्तार किया है, जबकि 'सहायक' व्हॉट्सएप बॉट (Sahayak WhatsApp Bot) 5 भाषाओं में छोटे व्यवसायों की सहायता कर रहा है।
- गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM): जेम (GeM) ने पब्लिक प्रोक्योरमेंट को पारदर्शी, कुशल और पेपरलेस बनाकर इसमें बड़ा बदलाव लाया है।
- जून 2026 तक, इसने ₹18.4 लाख करोड़ से अधिक का कुल ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) दर्ज किया, जिसमें वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹5 लाख करोड़ शामिल हैं। इसके साथ ही, इसने 11 लाख से अधिक एमएसएमई को सरकारी बाजारों तक पहुँच प्राप्त करने में सक्षम बनाया।
- स्वायत्त (SWAYATT) पहल: महिला और युवा-संचालित उद्यमों के लिए स्टार्टअप रनवे—'स्वायत्त' पहल स्टार्टअप्स, महिलाओं और युवाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को सीधे सरकारी खरीदारों तक पहुँच प्रदान करके 'जेम'(GeM) के माध्यम से समावेशी सार्वजनिक खरीद को बढ़ावा देती है।
- वित्तीय वर्ष 2025–26 तक, महिला-संचालित व्यवसायों ने ₹83,323 करोड़ और स्टार्टअप्स ने कुल ऑर्डर मूल्य में ₹54,005.8 करोड़ दर्ज किए, जो इस पहल की बढ़ती पहुँच को दर्शाता है।
जी2सी (G2C - सरकार से नागरिक) सेवाओं में क्रांति लातीं ई-गवर्नेंस पहलें
- डिजीलॉकर: डिजीलॉकर कागजी दस्तावेजों की जगह एक सुरक्षित डिजिटल वॉलेट की सुविधा दे रहा है। 31 जुलाई 2026 तक, इस प्लेटफॉर्म पर 72 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं और 934 करोड़ से अधिक दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं।
- उमंग (UMANG): उमंग सरकारी सेवाओं के लिए एक सिंगल डिजिटल गेटवे बन गया है। इसकी सेवाएं 2017 की 166 सेवाओं से बढ़कर 23 जुलाई 2026 तक 2,585 सेवाएं हो गई हैं। इसके ट्रांजेक्शन भी 4.6 करोड़ से बढ़कर 23 जुलाई 2026 तक 798 करोड़ से अधिक हो गए हैं, जो इसके व्यापक डिजिटल उपयोग को दर्शाता है।
- आधार (Aadhaar): आधार ने सुरक्षित और त्वरित डिजिटल ऑथेंटिकेशन के लिए एक विश्वसनीय बायोमेट्रिक पहचान प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया है। आधार जनरेशन वर्ष 2010-11 के 0.42 करोड़ से बढ़कर जुलाई 2026 तक 145 करोड़ से अधिक हो गई है।
- कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी): सीएससी सरकार से नागरिक (G2C) ई-सेवाओं के लिए फिजिकल एक्सेस पॉइंट प्रदान करते हैं, जिससे सरकारी कार्यालयों जाने की आवश्यकता कम हो जाती है। जून 2026 तक, पूरे भारत में 5.16 लाख से अधिक सीएससी कार्यरत थे।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी): आधार-लिंक्ड डीबीटी के माध्यम से 56 मंत्रालयों की 318 योजनाओं के कल्याणकारी लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। इसके तहत अब तक देश भर में ₹52 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे खातों में स्थानांतरित की जा चुकी है। विस्तार से पढ़ें: डिजिटल इंडिया पहल
शिक्षा तक पहुँच को बढ़ावा देते डिजिटल प्लेटफॉर्म्स
- दीक्षा (DIKSHA): दीक्षा पाठ्यक्रम से जुड़ा कंटेंट, क्यूआर-कोड युक्त पाठ्यपुस्तकें, शिक्षक प्रशिक्षण और सुलभ शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराता है। 10 अगस्त 2026 तक, इस प्लेटफॉर्म पर 2.35 करोड़ पंजीकृत उपयोगकर्ता और 3.58 लाख दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं।
- स्वयं (SWAYAM): स्वयं कक्षा 9वीं से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएशन स्तर तक के मुफ़्त कोर्स प्रदान करता है। 10 अगस्त 2026 तक, इस प्लेटफॉर्म पर विभिन्न विषयों के 20,000 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं और कुल नामांकन 6.5 करोड़ से अधिक हो चुका है।
- स्वयं प्रभा (SWAYAM Prabha): स्वयं प्रभा GSAT-15 उपग्रह का उपयोग करके 40 डीटीएच चैनलों के माध्यम से 24x7 उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण करता है। इससे छात्र बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी पढ़ाई तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं।
- पीएम ई-विद्या (PM e-Vidya): पीएम ई-विद्या निरंतर और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'दीक्षा', 'स्वयं', 'स्वयं प्रभा', कम्युनिटी रेडियो और शैक्षणिक टेलीविजन को एक साथ जोड़ता है।
- ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR): APAAR छात्रों को उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और सत्यापित करने के लिए एक यूनिक डिजिटल एकेडमिक पहचान प्रदान करता है। जून 2026 तक 33.74 करोड़ से अधिक APAAR आईडी बनाई जा चुकी हैं।
परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त कदम: एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र
31 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश किए गए 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' में कड़े दंड और समयबद्ध न्याय प्रणाली का प्रस्ताव है। इस विधेयक के तहत, व्यक्तिगत रूप से गड़बड़ी करने वाले दोषियों को 5 से 10 साल की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। सेवा प्रदाताओं (सर्विस प्रोवाइडर्स) पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना और 8 साल का प्रतिबंध लगाया जाएगा, जबकि संगठित परीक्षा-धांधली सिंडिकेट्स को 7 से 10 साल की जेल और कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना भुगतना होगा। जांच 2 महीने के भीतर, आरोप पत्र दाखिल होने के 3 महीने के भीतर सुनवाई और याचिका स्वीकार होने के 3 महीने के भीतर उच्च न्यायालय में अपीलों का निपटारा किया जाना अनिवार्य है।
भारत के डिजिटल वर्कफोर्स को सशक्त बनाती पहलें
- फ्यूचरस्किल प्राइम (FutureSkills PRIME): यह शिक्षार्थियों को आज के तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य के लिए आवश्यक अत्याधुनिक डिजिटल स्किल्स से लैस करता है। 10 अगस्त 2026 तक, डिजिटल स्किलिंग के लिए इस प्लेटफॉर्म पर 34 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।
- स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH): सिद्ध (SIDH) कौशल विकास (स्किलिंग), डिजिटल लर्निंग और रोजगार के अवसरों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाता है। 2 अगस्त 2026 तक, इस पर 20.10 मिलियन पंजीकरण दर्ज हो चुके हैं, 3,643 सेल्फ-पेस्ड कोर्स उपलब्ध हैं और 1 मिलियन से अधिक अवसर उत्पन्न किए गए हैं।
- राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT): नाइलिट (NIELIT) भारत भर में अपने 56 केंद्रों और 9,000 से अधिक भागीदार संस्थानों के माध्यम से 'अवेयरनेस इन कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स' (एसीसी) और 'कोर्स ऑन कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स' (सीसीसी) सहित डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास कार्यक्रम प्रदान करता है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 31.92 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।
- इंडिया-एआई मिशन: इंडिया-एआई मिशन एआई शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और जिम्मेदार एआई अपनाने को मजबूत कर रहा है। यह इंडिया-एआई कोश जैसी पहलों के माध्यम से स्कूलों, उच्च शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एआई कौशल विकास को बढ़ावा दे रहा है। विस्तार से पढ़ें: एआई के साथ भारत का सशक्तिकरण एवं रूपांतरण
डिजिटल क्षेत्र में भारत का बढ़ता प्रभाव
भारत का बढ़ता डिजिटल प्रभाव नागरिकों, व्यवसायों और संस्थानों के सरकार और अर्थव्यवस्था के साथ जुड़ने के तरीके को बदल रहा है। तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम त्वरित सेवाएं, अधिक पारदर्शिता और व्यापक पहुँच सुनिश्चित कर रहा है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) नवाचार, उद्यमिता और समावेशी विकास के लिए एक मजबूत नींव तैयार कर रहा है। उभरती प्रौद्योगिकियों एवं उन्नत तकनीकों का बढ़ता इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर खोल रहा है और वैश्विक स्तर पर भारत की डिजिटल उपस्थिति को मजबूत कर रहा है। डिजिटल क्षमताएं गवर्नेंस को अधिक जवाबदेह, कुशल और नागरिक-केंद्रित भी बना रही हैं। यह बदलाव तकनीक को आर्थिक अवसरों और सामाजिक विकास के एक प्रमुख माध्यम के रूप में स्थापित कर रहा है। ये सभी प्रगति मिलकर एक डिजिटली सशक्त और 'विकसित भारत' की नींव को मजबूत कर रही हैं।
संदर्भ सूची
संचार मंत्रालय
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
वित्त मंत्रालय
पीआईबी बैकग्राउंडर
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
डिजिटल इंडिया की प्रमुख पहलें
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की स्थिति 2026
पीआईबी रिसर्च
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सुशासन का सशक्तिकरण
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पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2298503)
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