सूचना और प्रसारण मंत्रालय
सरकार पीआईबी फैक्ट-चेकिंग, सार्वजनिक-सेवा प्रसारण और डिजिटल मीडिया नियमनों के जरिए विश्वसनीय सूचना के प्रसार के कार्य को मजबूत करने का प्रयास कर रही है
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 3:01PM by PIB Delhi
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), भारत सरकार की मुख्य सूचना प्रसार एजेंसी के तौर पर, विविध मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिए विभिन्न प्रकार से समय पर, विश्वसनीय और सटीक जानकारी पहुंचाने का कार्य करता है। ‘प्रसार भारती’ सार्वजनिक-सेवा प्रसारण के दायित्व को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है। विविध प्लेटफॉर्मों का उपयोग करके क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों सहित विभिन्न भाषाओं में सूचना पहुंचाई जाती है।
सरकार ने अपने कार्यक्रमों और नीतियों से संबंधित झूठे समाचारों (फेक न्यूज) को रोकने हेतु पीआईबी में एक फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) बनाई है। एफसीयू तथ्यों की जांच (फैक्ट-चेकिंग) एक व्यवस्थित प्रक्रिया के जरिए सरकारी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) और केन्द्र सरकार के अन्य संगठनों से जुड़े दावों की पुष्टि करती है। यह सत्यापित की गई सूचना को विविध प्लेटफॉर्मों के जरिए लोगों तक पहुंचाती है।
दूरदर्शन और आकाशवाणी अपने समाचार बुलेटिनों, कार्यक्रमों व डिजिटल प्लेटफॉर्मों के जरिए सत्यापित की गई सूचना को आगे पहुंचाते हैं। ‘डीडी न्यूज’ प्रसारण से पहले कई स्तरों वाली संपादकीय प्रक्रिया का पालन करता है। इस प्रक्रिया में तथ्यों की बारीकी से जांच, कई विश्वसनीय स्रोतों से पुनः सत्यापन (क्रॉस-वेरिफिकेशन) और संपादकीय समीक्षा शामिल है। गलत सूचना और झूठी बातों से निपटने हेतु पीआईबी फैक्ट चेक के कंटेंट को नियमित रूप से दूरदर्शन और आकाशवाणी के समाचारों एवं डिजिटल प्लेटफॉर्मों में शामिल किया जाता है।
सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 को अधिसूचित किया। ये नियम इंटरमीडियरीज के लिए जरूरी सावधानी बरतने संबंधी जिम्मेदारियां निर्धारित करते हैं और डिजिटल न्यूज के प्रकाशकों व ओटीटी प्लेटफॉर्मों के लिए आचार संहिता (कोड ऑफ एथिक्स) भी प्रदान करते हैं। इसमें शिकायतों के समाधान हेतु तीन-स्तरीय प्रणाली बनायी गई है, जिसमें प्रकाशकों द्वारा स्व-नियमन (सेल्फ-रेगुलेशन), स्व-नियमन संबंधी संस्थाएं और केन्द्र सरकार की निगरानी व्यवस्था शामिल है।
सरकार फिल्म और मीडिया सेक्टर को विभिन्न पहलों के जरिए बढ़ावा देती है। इनमें ‘फिल्मिक कंटेंट का विकास, संचार एवं प्रसार (डीसीडीएफसी) योजना, ‘इंडिया सिने हब (आईसीएच) और ‘नेशनल फिल्म हेरिटेज मिशन (एनएफएचएम)’ शामिल हैं। डीसीडीएफसी योजना फिल्म महोत्सव, भारतीय सिनेमा के प्रचार, अंतरराष्ट्रीय भागीदारी, संरक्षण और इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है। ‘इंडिया सिने हब’ सिंगल-विंडो प्रणाली के जरिए फिल्मों की शूटिंग की मंजूरी दिलाने में मदद करता है और भारत को फिल्मों की शूटिंग के पसंदीदा गंतव्य के तौर पर बढ़ावा देता है। एनएफएचएम भारत की फिल्मी विरासत के संरक्षण, बहाली, डिजिटलीकरण और संकलन (आर्काइविंग) का कार्य करता है।
सरकार मीडिया और प्रसारण के क्षेत्र में अपनी वैश्विक भागीदारी को मजबूत करके अंतरराष्ट्रीय मीडिया सहयोग को बढ़ावा देती है।
सरकार ने मई 2025 में मुंबई में प्रथम ‘वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (वेव्स 2025)’ का आयोजन किया। इस समिट ने “क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड” पहल के तहत भारत को कंटेंट सृजन का वैश्विक केन्द्र बनाने के विजन के साथ मीडिया और मनोरंजन सेक्टर को एक साथ लाया। इस समिट ने भारतीय सृजनकर्ताओं, निर्माताओं एवं स्टार्टअप को 100 से अधिक देशों के वैश्विक क्रेताओं, निवेशकों, ओटीटी प्लेटफॉर्मों और तकनीक से जुड़ी अग्रणी हस्तियों के साथ जुड़ने का एक मंच प्रदान किया।
प्रसारण के क्षेत्र में, ‘प्रसार भारती’ दुनिया भर के प्रसारण संगठनों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। वह ऐसा अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों के साथ कंटेंट को साझा करके और सहयोगी संगठनों के साथ प्रसारण संबंधी समझौतों के जरिए करता है। इसके अलावा प्रसारण में सहयोग, कंटेंट के आदान-प्रदान, पेशेवर विशेषज्ञता और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को साझा करने हेतु अलग-अलग देशों के प्रसारकों के साथ इसके 48 सक्रिय समझौता-ज्ञापन भी हैं।
यह जानकारी सूचना और प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज लोकसभा में डॉ. आलोक कुमार सुमन द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आर /डीए
(रिलीज़ आईडी: 2298530)
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