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केंद्रीय वस्त्र मन्त्री  ने आईआईएचटी (IIHT) सूत्र 2026 का उद्घाटन किया, भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों का प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन


हथकरघा शिक्षा के रूपांतरण के लिये उद्योग, अनुसंधान और शैक्षिक भागीदारी को मजबूत करने हेतु तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित

प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 6:05PM by PIB Delhi

कपड़ा विकास आयुक्त (हैंडलूम), वस्त्र मन्त्रालय, भारत सरकार का कार्यालय आज डॉ. आम्बेडकर अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र, नई दिल्ली में आईआईएचटी (IIHT) सूत्र 2026 — भारतीय हैंडलूम प्रौद्योगिकी संस्थानों का राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटनात्मक आयोजन कर रहा है।

यह प्रथम-प्रकार का राष्ट्रीय मंच नीति-निर्माताओं, शैक्षणिक जगत, उद्योग-नेताओं, अनुसंधान संस्थाओं, प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों और विद्यार्थियों को एकत्रित कर रहा है ताकि हथकरघा शिक्षा के भविष्य और भारत के हथकरघा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने में इसकी भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके।

भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान("IIHTs): भारतीय हैंडलूम क्षेत्र का भविष्य बुनना — शिक्षित करें। नवोन्मेष करें। रूपान्तरित करें।" विषय के अन्तर्गत आयोजित यह सम्मेलन तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, नवोन्मेष, उद्यमिता और उद्योग सहयोग के क्षेत्र में भारतीय हैंडलूम प्रौद्योगिकी संस्थानों को उत्कृष्टता के केन्द्रों के रूप में पुनःस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सम्मेलन का उद्घाटन श्री गिरिराज सिंह, केन्द्रीय वस्त्र मन्त्री ने किया। उद्घाटन सत्र में श्रीमती नीलम शामि राव, सचिव (वस्त्र), डॉ. बीना एम., हथकरघा विकास आयुक्त तथा सरकार, उद्योग, शैक्षणिक जगत और हैंडलूम क्षेत्र के अन्य विशिष्ट गणमान्य उपस्थित थे।

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अपने संबोधन में केन्द्रीय वस्त्र मन्त्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र न केवल देश की सांस्कृतिक विरासत का श्रेष्ठ अभिव्यक्ति है, बल्कि यह आजीविका, महिलाओं के सशक्तिकरण, निर्यात और सतत आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है। उन्होंने कहा कि भारत की हैंडलूम परम्पराओं का संरक्षण तकनीकी प्रगति, नवोन्मेष, उद्यमिता और अनुसंधान के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने IIHTs की उस अहम भूमिका पर बल दिया जो उत्पादन क्षमता वृद्धि, डिज़ाइन नवोन्मेष, तकनीकी उन्नयन और हैंडलूम क्षेत्र की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता में कुशल प्राविधिकों के विकास में निभानी चाहिए।

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मन्त्री ने यह भी बताया कि छह केन्द्रीय  हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों  और पाँच राज्य हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों ने पिछले सात दशकों में कई पीढ़ियों के कुशल पेशेवरों का निर्माण किया है, जो आज उद्योग, उद्यमिता, निर्यात, अनुसंधान और सार्वजनिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने हाल में बी.टेक. कार्यक्रमों के विस्तार, अनुसंधान पहलों के सुदृढ़ीकरण, प्रयोगशालाओं और अवसंरचना के आधुनिकीकरण, छात्र सहायता उपायों और अन्तर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।

श्रीमती नीलम शामि राव, सचिव (वस्त्र) ने अपने संबोधन में कहा कि हैंडलूम शिक्षा को निरंतर आधुनिक बनाये रखना आवश्यक है। पाठ्यक्रमों को उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप करना, उद्योग साझेदारी को सशक्त करना, अनुप्रयुक्त अनुसंधान को बढावा देना और नवोन्मेष-प्रेरित अध्ययन को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि IIHTs को ऐसे संस्थानों के रूप में विकसित होना चाहिए जो न केवल रोजगार हेतु स्नातकों को तैयार करें, बल्कि वस्त्र और हैंडलूम क्षेत्रों में उद्यमिता, नेतृत्व और अनुसंधान के लिये सक्षम भी बनायें।

हथकरघा विकास आयुक्त डॉ. बीना एम. ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि IIHT सूत्र वस्त्र मन्त्रालय की एक दीर्घकालिक संस्थागत पहल है जिसका उद्देश्य भारतीय हैंडलूम प्रौद्योगिकी संस्थानों के लिये एक सहयोगी राष्ट्रीय मंच का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि यह पहल सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थाओं, अनुसंधान संस्थाओं और पूर्व छात्रों के बीच भागीदारी को सुदृढ़ करेगी तथा IIHTs को नवोन्मेष, स्थिरता, उद्यमिता और तकनीकी उन्नयन का समर्थन करने वाले भविष्य-तैयार संस्थानों के रूप में उभारने में सहायक होगी।

उद्घाटन सत्र का एक प्रमुख आकर्षण तीन रणनीतिक समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान था, जो पूरक क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिये तैयार किए गए हैं:

  • ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ लि. के साथ उद्योग भागीदारी — पाठ्यक्रम समृद्धि, इंटर्नशिप, उद्योग अनुभव, कौशल विकास और सहयोगी पहलों के लिये।
  • नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन के साथ अनुसंधान और तकनीकी भागीदारी — सहयोगी अनुसंधान, परीक्षण, नवोन्मेष, तकनीकी समर्थन और क्षमता निर्माण के लिये।
  • इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ मेनेजमेंट, सम्भलपुर के साथ शैक्षणिक और प्रबंधन भागीदारी — नेतृत्व विकास, उद्यमिता, नवोन्मेष, संकाय विकास और संस्थागत क्षमता निर्माण के लिये।

इन साझेदारियों से IIHTs तथा प्रमुख उद्योग, अनुसंधान और प्रबंधन शिक्षा संस्थानों के बीच निकट संवाद और समन्वय स्थापित होने की अपेक्षा है, जिससे हथकरघा क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और प्रासंगिकता में सुधार होगा।

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कार्यक्रम के दौरान भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (IIHTs )के मेधावी छात्रों को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिये स्वर्ण पदक और रैंक प्रमाणपत्र प्रदान किये गए। मंत्रालय ने "हैंडलूम परिवर्तनकर्ता" नामक एक प्रकाशन भी जारी किया, जो उन प्रतिष्ठित IIHT पूर्व छात्रों की उपलब्धियों का सम्मान करता है जिन्होंने उद्योग, उद्यमिता, निर्यात, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवा में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

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केंद्रीय मन्त्री ने IIHTs पर मन्त्रालय की एक फिल्म "भारत का हैंडलूम भविष्य बुनना" भी जारी की, जो भारतीय हैंडलूम प्रौद्योगिकी संस्थानों की यात्रा, उपलब्धियाँ और भविष्य की दृष्टि को दर्शाती है। यह फिल्म IIHTs द्वारा कुशल पेशेवरों के विकास तथा भारत के हैंडलूम क्षेत्र के रूपांतरण में उनके योगदान को उजागर करती है।

सम्मेलन में छात्र नवोन्मेष, संस्थागत उपलब्धियाँ, प्रत्यक्ष प्रदर्शन, अनुसंधान पहलें और IIHTs द्वारा अंगीकृत उभरती प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन भी रखा गया। प्रतिभागियों को विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और पूर्व छात्रों से संवाद करने का अवसर मिला तथा उन्होंने संस्थानों की तकनीकी और शैक्षणिक क्षमताओं का अनुभव किया।

दोपहर के पश्चात आयोजित तकनीकी सत्र में "उद्योग–अकादमी सहयोग के माध्यम से हैंडलूम शिक्षा को मजबूत करना: पाठ्यक्रम, कौशल और भविष्य-तैयारी" विषय पर एक पैनल चर्चा हुई। उद्योग, शैक्षणिक जगत, अनुसंधान संस्थाओं और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के प्रतिनिधियों ने पाठ्यक्रम सुधार, उद्योग भागीदारी, अनुप्रयुक्त अनुसंधान, उद्यमिता, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, कौशल विकास और संस्थागत सहयोग पर विचार-विमर्श किया, जो बदलते वस्त्र और हैंडलूम क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप अगली पीढ़ी के पेशेवरों को तैयार करने हेतु आवश्यक हैं।

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IIHT सूत्र 2026 रणनीतिक साझेदारियों, नवोन्मेष, अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता के माध्यम से भारतीय हैंडलूम प्रौद्योगिकी संस्थानों को सुदृढ़ करने तथा बदलते हुए भारतीय हैंडलूम क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य-तैयार पेशेवरों को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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पीके/केसी/एमएम/एसएस  


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