शिक्षा मंत्रालय
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संसद में प्रश्न: यूजीसी विनियम, 2025 का मसौदा

प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 6:34PM by PIB Delhi

शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है और संसद तथा राज्य विधानमंडलों दोनों को इस संबंध में कानून बनाने का अधिकार है। भारत के संविधान की अनुसूची सातवीं की सूची 1 की प्रविष्टि 66 के अनुसार, उच्च शिक्षा या अनुसंधान तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों में समन्वय एवं मानकों के निर्धारण के लिए कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम, 1956 की धारा 26 (1) (ई) यूजीसी को विश्वविद्यालय के शिक्षण स्टाफ में नियुक्त होने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए आवश्यक योग्यताओं को परिभाषित करने संबंधी विनियम बनाने का अधिकार देती है, जिसमें उस शिक्षा शाखा को ध्यान में रखा जाता है जिसमें उससे शिक्षण देने की अपेक्षा की जाती है। यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 26 (1) (जी) यूजीसी को विश्वविद्यालयों में मानकों के रखरखाव और कार्य एवं सुविधाओं के समन्वय को विनियमित करने संबंधी विनियम बनाने का अधिकार देती है।

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता संबंधी यूजीसी विनियमों का मसौदा, 2025, 6 जनवरी 2025 को यूजीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया था। इसके अतिरिक्त, यूजीसी ने सभी राज्यों के उच्च शिक्षा विभागों के प्रधान सचिवों; सभी राज्यों की उच्च शिक्षा परिषदों; सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपतियों के कार्यालयों; आईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर, आईआईएससी; और अन्य नियामक निकायों से प्रतिक्रिया मांगी थी।

यूजीसी ने विनियमों को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए परामर्श जारी रखने का निर्णय लिया है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित प्रावधानों पर व्यक्त किए गए सभी विचारों, जिनमें कुलपतियों की नियुक्ति से संबंधित विचार भी शामिल हैं, को विनियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया के अभिन्न अंग के रूप में विधिवत रूप से विचार किया जाए।

यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में लिखित जवाब में दी ।

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