विधि एवं न्याय मंत्रालय
न्यायालयों में महिलाओं के अनुकूल बुनियादी ढांचा
प्रविष्टि तिथि:
13 AUG 2026 3:53PM by PIB Delhi
न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचा सुविधाओं के विकास की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। हालांकि, राज्य सरकारों और केन्द्र शासित प्रदेशों के संसाधनों को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार वर्ष 1993-94 से जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के लिए बुनियादी ढांचा सुविधाओं के विकास हेतु केन्द्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) लागू कर रही है। इस योजना के अंतर्गत पांच घटक शामिल हैं, अर्थात् न्यायालय कक्ष, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयां, अधिवक्ताओं के लिए हॉल, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष।
न्यायालय कक्षों में महिलाओं के अनुकूल बुनियादी ढांचे सहित विशिष्ट पहलू उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उच्च न्यायालय की भवन बुनियादी ढांचा समिति न्यायालय कक्षों के डिजाइन तथा सीएसएस के अंतर्गत वित्त पोषित परियोजनाओं को मंजूरी देती है। हालांकि, सीएसएस के दिशा-निर्देशों में न्यायालय कक्षों के लिए मानदंड और विनिर्देश निर्धारित किए गए हैं, जो सर्वोच्च न्यायालय की राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (एनसीएमएस) समिति की सिफारिशों तथा विभिन्न राज्यों और केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) द्वारा अपनाए गए मानदंडों और कार्य प्रणालियों पर आधारित हैं।
यह जानकारी कानून और न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/केपी
(रिलीज़ आईडी: 2299115)
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