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व्यापार के लिए तैयार भारत का निर्माण


व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देना, उद्यमों को सशक्त बनाना

प्रविष्टि तिथि: 13 AUG 2026 5:01PM by PIB Delhi

उद्यम-नेतृत्व वाली वृद्धि को सक्षम बनाना

भारत अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मना रहा है। इस अवसर पर देश आत्मनिर्भर, कठिन स्थिति से उबरने की क्षमता और विकासशील अर्थव्यवस्था की बुनियाद को और मजबूत कर रहा है। सरकार ने अनुपालन संबंधी बोझ को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और सभी आकार के उद्यमों के लिए अधिक अवसर सर्जित करने के उद्देश्य से सुधार कार्य किए हैं।

ये प्रयास डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम, सरलीकृत निगमन प्रक्रियाओं, व्यापक बाजार पहुंच, वित्त तक बेहतर पहुंच और विश्वास-आधारित विनियमन के माध्यम से व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा दे रहे हैं।

 

भारत के कारोबारी माहौल में सुधार लाना

डिजिटल सिंगल-विंडो क्लीयरेंस से लेकर बड़े पैमाने पर नियामक सुधार तक, इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य पूर्वानुमानित और सुविधा-संचालित व्यावसायिक वातावरण बनाना है।

  • राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (एनएसडब्ल्यूएस): यह एकल खिड़की डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार स्वीकृतियों की पहचान करने और उनके लिए आवेदन करने में मार्गदर्शन करता है। यह प्रणाली 32 केंद्रीय मंत्रालयों और 34 राज्यों में 686 से अधिक केंद्रीय और राज्यों की 7,498  स्वीकृतियों तक पहुंच प्रदान करती है। 2021 में शुरू होने के बाद से, एनएसडब्ल्यूएस ने 8.29 लाख से अधिक स्वीकृतियाँ प्रदान की हैं (नवंबर, 2025)
  • स्टार्टअप इंडिया (2016): इस पहल का उद्देश्य उद्यमियों को सहयोग देना और सशक्त स्टार्टअप इकोसिस्टम का निर्माण करना है। इसका लक्ष्य भारत को नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी सर्जित करने वालों का देश बनाना है। डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2016 में 502 से बढ़कर 12 अगस्त 2026 तक 2.47 लाख से अधिक हो गई।

 

  • SPICe+ फॉर्म (2020):  यह वेब-आधारित फॉर्म केंद्र सरकार केमंत्रालयों और विभागों से 11 सेवाओं को एकीकृत करता है।  यह फॉर्म नाम आरक्षण, निगमन, डीआईएन आवंटन, पैन जारी करना, टीएएन जारी करना, ईपीएफओ पंजीकरण, ईएसआईसी पंजीकरण, व्यावसायिक कर पंजीकरण, बैंक खाता खोलना, जीएसटीआईएन आवंटन और दुकानों और प्रतिष्ठानों के पहली बार पंजीकरण तथा दिल्ली में निगमित होने वाली सभी नई कंपनियों के लिए स्थापना सहित 10 आवश्यक प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है। इससे प्रक्रियात्मक बोझ कम होता है, समय की बचत होती है और व्यवसायों पर अनुपालन का भार कम होता है।
  • MCA21 V3: MCA21 प्रोजेक्ट भारत के बाज़ार परिदृश्य में पारदर्शिता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने वाली भविष्योन्मुखी और  एआई-संचालित पहल है। यह प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों और सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) से संबंधित संपूर्ण पंजीकरण और निगमन सेवाओं के लिए उपयोग किया जाता है। 2001 से 2025 के बीच, इसने 3.84 करोड़ आवेदनों पर कार्रवाई की, जिनमें से 3.33 करोड़ को सीधी प्रक्रिया (स्ट्रेट थ्रू प्रोसेस) के माध्यम से मंजूरी दी गई।
  • उद्यम पंजीकरण (2020): सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए निःशुल्क, कागज रहित और स्व-घोषणा आधारित प्रणाली प्रदान करता है। उद्यम पोर्टल पर एमएसएमई पंजीकरण अक्टूबर 2020 में 0.10 लाख से बढ़कर 13 अगस्त 2006 तक 9.27 लाख से अधिक हो गया।
  • व्यापार सुधार कार्य योजना (बीआरएपी): 2015 में शुरू की गई बीआरएपी, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में नियमों को सरल बनाकर और पारदर्शिता बढ़ाकर व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देती है। इसमें एकल-खिड़की मंजूरी, भूमि, श्रम, निरीक्षण, कराधान, पर्यावरण अनुमोदन और अन्य क्षेत्रों में सुधार शामिल हैं।

 

उद्यम विकास के लिए वित्त की बाधा हटाना

क्रेडिट गारंटी, डिजिटल ऋण और प्राप्य वित्तपोषण, औपचारिक वित्त में, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लि प्रवेश को व्यापक बना रहे हैं।

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई): पीएमएमवाई (2015) वित्तीय पहुंच में मौजूद बाधाओं को दूर करती है और गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि आय सृजन गतिविधियों के लिए 20 लाख रुपये तक के बिना गारंटी वाले ऋण प्रदान करती है। 27 मार्च 2006 तक, इस योजना के अंतर्गत स्थापना के बाद से 57.79 करोड़ ऋणों के माध्यम से ₹40.07 लाख करोड़ के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं।
  • ऋण गारंटी योजना: यह योजना सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को बिना किसी संपार्श्विक सुरक्षा या तृतीय-पक्ष गारंटी के ऋण प्राप्त करने में सक्षम बनाती है, जिसमें 10 करोड़ रुपये तक की ऋण सुविधाओं के लिए सहायता प्रदान की जाती है। मार्च 2008 तक, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट (सीजीटीएमआईएसई) का कुल संचयी कवरेज 13.67 लाख करोड़ रुपये था, जिससे 1.41 करोड़ रुपये की गारंटी को लाभ हुआ।
  • क्रेडिट असेसमेंट मॉडल (सीएएम): सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा 2025 में शुरू किया गया, सीएएम डिजिटल रूप से प्राप्त और सत्यापित डेटा का उपयोग करके सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) ऋण आवंटन को स्वचालित बनाता है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच, इस मॉडल के तहत ₹52,900 करोड़ मूल्य के 3.96 लाख से अधिक एमएसएमई आवेदनों पर कार्रवाई की गई।
  • TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम): TReDS (टीआरईडीएसइलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है जो कई वित्तदाताओं के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के ट्रेड रिसीवेबल्स के वित्तपोषण और डिस्काउंटिंग की सुविधा प्रदान करता है। केंद्रीय बजट 2026-27 में टीआरईडीएस को मजबूत करने के लिए कई उपाय प्रस्तावित किए गए, जिनमें इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए क्रेडिट गारंटी तंत्र और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लेनदेन में इसका उपयोग शामिल है। यह प्लेटफॉर्म लगातार मजबूत होता जा रहा है और इनवॉइस डिस्काउंटिंग 2021-22 में ₹40,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹3.47 लाख करोड़ हो गई है।

 

अनुपालन से लेकर विश्वास-आधारित शासन तक

भारत के नियामक सुधार केवल प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर अनावश्यक आवश्यकताओं को कम करने, छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और व्यवसायों के लिए अधिक निश्चितता पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

  • जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026: 23 मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले 79 केंद्रीय अधिनियमों में 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और 784 प्रावधानों में संशोधन करता है यह छोटे और तकनीकी अपराधों के लिए आपराधिक दायित्व को कम करके विश्वास-आधारित शासन को मजबूत करता है।
  • नियामक अनुपालन का बोझ: इस पहल से नियमों को सरल बनाया गया है और अनुपालन लागत को कम करने और व्यापार करने में आसानी को मजबूत करने के लिए में अनावश्यक आवश्यकताओं को कम किया गया है। नवंबर 2025 तक 47,000 से अधिक अनुपालन कम किए गए हैं, जिनमें 16,108 सरलीकृत, 22,287 डिजिटलीकृत, 4,458 अपराधमुक्त और 4,270 अनावश्यक अनुपालन हटा दिए गए हैं।
  • जीएसटी 2.0: 2017 में लागू जीएसटी ने कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत राष्ट्रीय कर ढांचे से बदल दिया। सितंबर 2025 में घोषित सुधारों ने दरों को और अधिक तर्कसंगत बनाया और  सरल दो-दर संरचना की ओर कदम बढ़ाया, जिससे अनुपालन और लेनदेन लागत में कमी आई। पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 में लगभग 60 लाख से बढ़कर 31 जुलाई 2026 तक 1.68 करोड़ से अधिक हो गई, जो अधिक औपचारिककरण को दर्शाता है।
  • फेसलेस असेसमेंट स्कीम: यह योजना करदाता और कर अधिकारियों के बीच भौतिक संपर्क को समाप्त करती है। स्वचालित केस चयन, यादृच्छिक आवंटन और करदाता संचार के लिए  केंद्रीय सेल से बार-बार आने-जाने और प्रतीक्षा समय में कमी आती है। यह दृष्टिकोण मानकीकृत, वस्तुनिष्ठ और सुसंगत कर आकलन को बढ़ावा देता है, जिससे कर अनुपालन अधिक कुशल और पारदर्शी बनता है।

 

भारतीय व्यवसायों के लिए बढ़ते बाजार

भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना उद्यमों के लिए नए बाजार खोल रही है। रसद और बहुआयामी कनेक्टिविटी में निवेश  माल की आवाजाही तेज और अधिक कुशल तरीके से करने में व्यवसायों की मदद कर रहा है।

  • सरकारी -मार्केटप्लेस (GeM) (2016): GeM सार्वजनिक खरीद को डिजिटाइज़ करता है और विविध व्यवसायों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करता है। 6 अगस्त 2026 तक, GeM 1.37 लाख से अधिक सरकारी क्रेता संगठनों को लगभग 25 लाख विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से जोड़ता है। इसने 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कुल खरीद प्रक्रिया सुगम की। 2025-26 में 75 लाख से अधिक ऑर्डर पूरे किए गए।

 

  • पीएम गतिशक्ति (2021): यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एकीकृत अवसंरचना नियोजन और बहुआयामी कनेक्टिविटी को सक्षम बनाता है। यह प्लेटफॉर्म 58 मंत्रालयों/विभागों और 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 3,291 डेटा लेयर्स के साथ जोड़ता है। फरवरी 2026 तक, नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप ने 16.10 लाख करोड़ रुपये की 352 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया, जिनमें से 201 स्वीकृत हो चुकी हैं और 167 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। यह पहल व्यवसायों को उपयुक्त स्थानों की पहचान करने, निवेश की योजना बनाने और बहुआयामी कनेक्टिविटी और अवसंरचना तक अग्रिम पहुंच प्राप्त करने में सहायता करती है, जिससे व्यापार करने में आसानी मजबूत होती है।
  • ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (2022): यह ओपन डिजिटल कॉमर्स नेटवर्क को बढ़ावा देता है और व्यक्तिगत प्लेटफॉर्म पर निर्भरता को कम करता है। इसमें 616 से अधिक शहरों में 7.64 लाख विक्रेता हैं, जो व्यापक और अधिक समावेशी बाजार पहुंच का समर्थन करते हैं।

 

भारत की वैश्विक व्यापारिक उपस्थिति को मजबूत करना

भारत निर्यात प्रोत्साहन को बेहतर रसद, डिजिटल व्यापार सुविधा और मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमताओं के साथ मिलाकर वैश्विक बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

  • निर्यात प्रोत्साहन मिशन (2025): इस मिशन का उद्देश्य भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाना है, जिसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), पहली बार निर्यात करने वाले देशों, श्रम प्रधान क्षेत्रों और आंतरिक तथा कम निर्यात वाले क्षेत्रों के निर्यातकों पर विशेष बल दिया गया है। वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायता को एक ही ढांचे के अंतर्गत लाकर, यह मिशन निर्यात में आने वाली बाधाओं को कम करता है और व्यवसायों के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच को आसान बनाता है।
  • ट्रेड कनेक्ट -प्लेटफ़ॉर्म: यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित निर्यातकों को व्यापारिक जानकारी, बाज़ार के अवसर और वैश्विक खरीदारों तक पहुँच प्रदान करता है। अगस्त 2026 तक इसके 20 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हो चुके हैं और 40 लाख से अधिक मूल प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
  • ICEGATE (भारतीय सीमा शुल्क इलेक्ट्रॉनिक गेटवे): ICEGATE इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग और शुल्क भुगतान, दस्तावेज़ संशोधन, प्रश्नों का समाधान और धनवापसी प्रसंस्करण जैसी प्रक्रियाओं से सीमा पार व्यापार को अधिक कुशल बनाता है। बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की संख्या अप्रैल 2020 में 1.43 लाख से बढ़कर जून 2026 में 6.14 लाख से अधिक हो गई है, जो डिजिटल सीमा शुल्क प्रसंस्करण और व्यापार गतिविधि में वृद्धि को दर्शाती है।

 

सक्षम उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना

भारत में व्यापार करने की सुगमता का सफर व्यक्तिगत प्रक्रियाओं को सरल बनाने से आगे बढ़कर अधिक प्रतिक्रियाशील और उद्यम-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की ओर बढ़ रहा है। मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे, बाजारों और वित्त तक व्यापक पहुंच और नियामकीय निश्चितता में वृद्धि के साथ, व्यवसाय अवसरों का लाभ उठाने, सतत रूप से विस्तार करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं

 

संदर्भ

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2090097&reg=3&lang=2

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https://www.startupindia.gov.in/content/sih/en/about-startup-india-initiative.html

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वित्त मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2216047&reg=3&lang=2

https://www.icegate.gov.in/services/statistics-reports

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1643250&reg=3&lang=2

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2099226&reg=3&lang=2

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एमएसएमई

https://udyamregistration.gov.in/

PIB Archives

https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?id=150812&NoteId=150812&ModuleId=16&reg=48&lang=1

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https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/apr/doc202648842601.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2236804&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2232079&reg=3&lang=1

 

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