उप राष्ट्रपति सचिवालय
उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन की तंजावुर स्थित शास्त्र डीम्ड विश्वविद्यालय के रूबी और सिल्वर जुबली समापन समारोह में गरिमामय उपस्थिति
उपराष्ट्रपति ने कहा- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के.जी. कक्षा से लेकर पीएचडी तक शैक्षिक प्रगति का मार्गदर्शक स्तंभ
उपराष्ट्रपति ने कहा लोक परीक्षा सुधार भारत के युवाओं के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी प्रणाली के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता
भारत में उच्च शिक्षा सकल नामांकन अनुपात 2035 तक 30 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत होने की संभावना: उपराष्ट्रपति
साइबर सुरक्षा और नेटवर्किंग में शास्त्र-टाटा संचार साझेदारी; भारत के संप्रभु विकास में प्रासंगिक: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति का विद्यार्थियों से आह्वान; समय अनमोल है; सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीमित कर नवाचार और कौशल उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करें
प्रविष्टि तिथि:
17 AUG 2026 5:21PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज तंजावुर स्थित शास्त्र डीम्ड विश्वविद्यालय (मानित विश्वविद्यालय) परिसर में आयोजित रूबी और रजत जयंती समापन समारोह में भाग लिया और विश्वविद्यालय को उल्लेखनीय शैक्षणिक उत्कृष्टता हासिल करने पर बधाई दी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि शास्त्र विश्वविद्यालय की रूबी (40वीं वर्षगांठ) और रजत जयंती (25वीं वर्षगांठ) उसकी अतीत की महत्वपूर्ण प्रगति, वर्तमान में इसके अनुकूल प्रभाव और भविष्य में और अधिक उत्कृष्टता प्राप्त करने की आकांक्षा दर्शाती है।
उपराष्ट्रपति ने शास्त्र विश्वविद्यालय को तमिलनाडु के अग्रणी उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताते हुए राष्ट्रीय विकास में इसके योगदान की सराहना की।
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इस अवसर पर केन्द्र सरकार की शिक्षा नीति की चर्चा की। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की शिक्षा नीतियों को परिवर्तनकारी और प्रगतिशील बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के.जी. कक्षा से लेकर पीएचडी तक सभी स्तरों पर शैक्षिक प्रगति का मार्गदर्शक स्तंभ है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षा और अनुसंधान में, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन-एएनआरएफ, प्रधानमंत्री रिसर्च फैलोशिप-पीएमआरएफ, पीएम-विद्यालक्ष्मी और बहु-प्रवेश-बहु-निकास की लचीली व्यवस्था जैसी प्रमुख पहल ने भारत के उच्च शिक्षा ढांचे को सुदृढ बना दिया है।
उपराष्ट्रपति ने हाल में पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अधिनियम का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाना है और यह भारत के युवाओं को एक निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने देश में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ कर वर्ष 2035 तक लक्षित 50 प्रतिशत तक पहुंचने का विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कई उपायों से आत्मनिर्भर पारितंत्र निर्मित कर रही है जो विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों द्वारा सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने के साथ ही स्वयं की तकनीकी क्षमता विकसित करने में सक्षम है।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि वह समय काफी मूल्यवान होता है जब ऊर्जा से भरे युवा दृढ़ संकल्प के साथ असंभव लगने वाले लक्ष्यों को प्राप्त करने में जुटे होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया का उपयोग सीमित कर नवाचार और निरंतर कौशल उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। श्री राधाकृष्णन ने उनसे मादक पदार्थों से दूर रहने को भी कहा।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से मादक पदार्थों को ना कहने और अपने स्वास्थ्य तथा अपने जीवन को हां कहने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर शास्त्र विश्वविद्यालय की छह नई योजनाओं का शुभारंभ किया। इनमें
1. शास्त्र विश्वविद्यालय में लचीली और एकीकृत सुरक्षित प्रौद्योगिकियों के लिए टाटा संचार केंद्र
2. शास्त्र विशवविद्यालय का एकीकृत ए.आई. ढांचा
3. अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीयकरण के माध्यम से शैक्षणिक पहल गतिशीलता-शास्त्र मैत्री
4. संकाय और शोधार्थियों के क्षमता विकास के लिए शास्त्र शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार विकास संवर्धन कोष
5. प्रौद्योगिकी और नवाचार के उपयोग से उच्च शिक्षा में शिक्षण प्रणालियों के लिए डिजिटल संसाधन-दृष्टि
6. प्रोत्साहन, निष्ठा और सहभागिता के लिए शास्त्र-क्लब सदस्यता-स्माइल शामिल हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर आरम्भ की गई छह नई योजनाएं शास्त्र विश्वविद्यालय की भविष्य की प्रगति का आधार हैं। उन्होंने इन योजनाओं के उद्देश्यपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफलता की कामना की।
उपराष्ट्रपति ने साइबर सुरक्षा और नेटवर्किंग के अहम क्षेत्रों में शास्त्र विश्वविद्यालय के टाटा कम्युनिकेशंस के साथ हुए समझौते पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सहयोग भारत के संप्रभु विकास में सुदृढ और भरोसेमंद सुरक्षा ढांचा तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि ये पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत-2047 की दृष्टि योजना के अनुरूप हैं, जिनमें बुनियादी अवसंरचना विकास, शिक्षकों और छात्रों की क्षमता निर्माण, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता, सामाजिक जुड़ाव और उद्योग संगठनों से सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
श्री राधाकृष्णन ने शास्त्र विश्वविद्यालय के सभी प्रयासों में निरंतर सफलता की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह ज्ञान और उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में और अधिक विकसित होगा और 2047 में विकसित भारत के आदर्शों में योगदान देगा।
आयोजन में तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर; शास्त्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. आर. सेथुरमन; कुलपति प्रो. एस. वैद्यसुब्रमण्यम; डीन प्रो. एस. स्वामीनाथन; और रजिस्ट्रार प्रो. आर. चंद्रमौली, संकाय सदस्य, अभिभावक और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
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(रिलीज़ आईडी: 2300616)
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