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आर्थिक तंगी से सामूहिक उद्यमिता तक:  एनबीसीएफडीसी माइक्रो फाइनेंस सहायता ने बीना और उनार्वु स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) को एक सफल कैटरिंग उद्यम स्थापित करने में कैसे मदद की

प्रविष्टि तिथि: 20 AUG 2026 6:01PM by PIB Delhi

वित्तीय सहायता और ऋण के माध्यम से स्थायी आजीविका बनाने की इच्छुक महिलाओं के लिए पूंजी तक सीमित पहुंच एक बड़ी बाधा बन सकती है। समय पर मिलने वाली संस्थागत वित्तीय सहायता स्वयं सहायता समूहों को व्यवहार्य उद्यम स्थापित करने, स्थिर आय अर्जित करने और अपने सदस्यों तथा उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सक्षम बना सकती है।

सामूहिक उद्यम की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाते हुए, केरल की उनार्वु स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सदस्य बीना ने अपने साथी सदस्यों के साथ मिलकर एनबीसीएफडीसी की सूक्ष्म वित्त योजना के तहत मिली सहायता से एक कैटरिंग इकाई स्थापित करने के लिए अपने साथी सदस्यों के साथ मिलकर काम किया।

सहायता प्राप्त करने से पहले बीना और उनार्वु स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को कैटरिंग यानि खानपान उद्यम स्थापित करने और उसका विस्तार करने में गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। पूंजी तक सीमित पहुंच के कारण वे आवश्यक उपकरण और कच्चा माल खरीदने तथा प्रस्तावित उद्यम की परिचालन संबंधी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे थे।

समूह के सामने सबसे बड़ी बाधा आर्थिक संकट की थी। हालांकि सभी सदस्य सामूहिक उद्यमिता के माध्यम से अपनी आजीविका बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध थीं, लेकिन कैटरिंग इकाई शुरू करने और उसका विस्तार करने के लिए उनके पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं थे। इसलिए उनकी योजनाओं को स्थायी व्यवसाय में बदलने के लिए संस्थागत वित्तीय सहायता तक पहुंच आवश्यक थी।

बीना एक सफल खानपान इकाई स्थापित करना चाहती थी जिससे स्थायी आय अर्जित हो सके, आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले और उनके परिवार तथा स्वयं सहायता समूह के साथी सदस्यों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो। समूह का उद्देश्य अपने सदस्यों के लिए स्थिर आजीविका के अवसर पैदा करना और उनके परिवारों को आर्थिक रूप से सहयोग देना था।

बीना और उनार्वु स्वयं सहायता समूह की सदस्यों को एनबीसीएफडीसी की सूक्ष्म वित्त योजना के तहत 5 लाख रुपये की सूक्ष्म वित्त सहायता मिली, जो वर्ष 2021 में उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस वित्तीय सहायता ने समूह को अपने कैटरिंग उद्यम को स्थापित करने के लिए आवश्यक संसाधनों में निवेश करने में सक्षम बनाया।

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सहायता मिलने के बाद सदस्यों ने वर्ष 2022 में कैटरिंग इकाई स्थापित की। सामूहिक प्रयास और साझा जिम्मेदारी के माध्यम से यह उद्यम सफलतापूर्वक संचालित होने लगा और समूह से जुड़ी महिलाओं के लिए आजीविका का एक भरोसेमंद स्रोत बन गया।

कैटरिंग इकाई ने समूह की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार किया है। ऋण प्राप्त करने से पहले समूह की वार्षिक आय 1,20,050 रुपये थी, जो सहायता मिलने के बाद बढ़कर 4,19,564 रुपये हो गई। यह उद्यम की सफल वृद्धि और आय अर्जित करने की बढ़ी हुई क्षमता को दर्शाता है।

बढ़ी हुई आय से बीना और स्वयं सहायता समूह की उनकी साथी सदस्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इससे वे अपने परिवारों की जरूरतों में अधिक प्रभावी ढंग से योगदान देने और अधिक आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में सक्षम हुई हैं। इस पहल ने उनके आत्मविश्वास और स्थायी उद्यम का प्रबंधन करने की क्षमता को भी बढ़ाया है।

कैटरिंग उद्यम की सफलता यह दर्शाती है कि सुलभ संस्थागत वित्तीय सहायता किस तरह महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक बाधाओं से उबरने और सामूहिक आकांक्षाओं को व्यवहार्य आजीविका के अवसरों में बदलने में मदद कर सकती है।

बीना की यात्रा समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता, सामूहिक पहल और महिला उद्यमिता के माध्यम से स्थायी आजीविका के निर्माण के महत्व को दर्शाती है। उनार्वु स्वयं सहायता समूह की प्रगति इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि सूक्ष्म वित्त सहायता महिलाओं और उनके परिवारों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने तथा आर्थिक सुरक्षा बेहतर करने में कैसे मदद कर सकती है।

सीमित पूंजी तक पहुंच की समस्या से लेकर एक सफल खानपान इकाई संचालित करने तक, बीना और उनार्वु स्वयं सहायता समूह की सदस्यों ने अपनी सामूहिक आकांक्षा को एक स्थायी उद्यम में बदल दिया है। उनकी यात्रा दृढ़ संकल्प, सहयोग और महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता को आगे बढ़ाने में संस्थागत वित्तीय सहायता के महत्व को दर्शाती है।

यह उपलब्धि बताती है कि सामूहिक उद्यमिता महिलाओं को सशक्त बना सकती है, परिवारों की आजीविका मजबूत कर सकती है और दीर्घकालिक आर्थिक अवसर पैदा कर सकती है।

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पीके / केसी / केजे


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