ग्रामीण विकास मंत्रालय
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने ग्रामीण महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान - II' का शुभारंभ किया
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव द्वारा शुरू किए गए 'राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान - II' का उद्देश्य 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने के प्रयासों को गति देना है
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के ग्रामीण उद्यम टेक बुलेटिन 'संकल्प शक्ति' का विमोचन किया गया
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव द्वारा 'संकल्प शक्ति' का पहला संस्करण जारी किया गया, 'संकल्प शक्ति' हमारी लखपति दीदियों के सशक्तिकरण पर केंद्रित है
प्रविष्टि तिथि:
21 AUG 2026 6:29PM by PIB Delhi
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाय-एनआरएलएम) के तहत कृषि, गैर-कृषि उद्यमों तथा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के उत्पादों के विपणन पर विस्तारित ध्यान केंद्रित करते हुए, 21 अगस्त से 21 नवंबर 2026 तक अगले तीन महीनों के लिए 'राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान - II' का शुभारंभ किया गया।
21 अगस्त को दुनिया भर में 'विश्व उद्यमी दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
इस अभियान को विशेष रूप से ग्रामीण महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और उस पर गहनता से ध्यान केंद्रित करने के लिए तैयार किया गया है।
इसके अलावा, इस अवसर पर सचिव द्वारा ग्रामीण उद्यम पर पहला टेक्निकल बुलेटिन ‘संकल्प शक्ति’ भी जारी किया। यह बुलेटिन एक मासिक पत्रिका के रूप में प्रकाशित होगा।
यह केंद्रित दृष्टिकोण ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता को मजबूत करेगा और 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने के विजन में योगदान देगा। इसका विस्तारित चरण पहले चरण के अनुभवों पर आधारित होगा और उद्यमों के गहन मार्गदर्शन, आधिकारिक पहचान देने, उत्पादक संस्थानों को मजबूत करने तथा कार्यान्वयन प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर अधिक जोर देगा।
यह अभियान कृषि और गैर-कृषि आजीविका से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने, सामुदायिक उद्यम संवर्धन कैडर को मजबूत करने, उद्यमों के आधिकारिक मान्यता को बढ़ावा देने, डिजिटल और ई-कॉमर्स के उपयोग का विस्तार करने तथा उत्पादक समूहों एवं उत्पादक उद्यमों को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। उद्यम संवर्धन में सहयोग करने वाले सामुदायिक कैडर को अधिक पहचान प्रदान करने के लिए सीआरपी-ईपी और बीडीएसपी को 'उद्यम सखी' के रूप में मान्यता दी जाएगी।
यह अभियान क्रेता-विक्रेता सम्मेलनों तथा क्रेताओं, एग्रीगेटर्स, खुदरा विक्रेताओं और संस्थागत खरीदारों के साथ जुड़ाव को सुविधाजनक बनाने के अलावा ओएनडीसी, जीईएम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ई-कॉमर्स को भी बढ़ावा देगा। राज्य क्लस्टर स्तरीय संघों (सीएलएफ) के नेतृत्व का ओरिएंटेशन, एक्स्पोजर विजिट, उद्यमिता विकास प्रशिक्षण और व्यावसायिक योजना, वित्तीय साक्षरता, उत्पाद विकास, ब्रांडिंग एवं डिजिटल मार्केटिंग में सहायता प्रदान करेंगे।
इस अभियान ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिनमें 50,000 सामुदायिक कैडरों का ओरिएंटेशन, 5 लाख स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं के लिए उद्यमिता व आजीविका प्रशिक्षण, एसएचजी परिवारों की 5 लाख किशोरियों का डेटाबेस तैयार करना, 50,000 उद्यमों को आधिकारिक मान्यता सहायता, उत्पादक समूहों एवं उत्पादक उद्यमों की सदस्यता में 2 लाख सदस्यों की वृद्धि, 20 लाख महिलाओं के बीच एग्रो-इकोलॉजिकल प्रथाओं का संवर्धन तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर 25,000 एसएचजी सदस्यों को जोड़ना शामिल है।
एक मुख्य प्राथमिकता कृषि आजीविका गतिविधियों को केवल प्रशिक्षण के रूप में देखने के बजाय, व्यवहार्य आजीविका गतिविधियों को स्थायी महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में बदलकर कृषि और गैर-कृषि आजीविका संरचना को मजबूत करना होगी। यह अभियान मौजूदा सीआरपी-ईपी, ईडीपी, एसवीईपी और ओएसएफ संरचना का पूरक बनेगा और महिलाओं को केवल आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ाकर उद्यम निर्माण और उसके विकास की दिशा में प्रगति करने में सहायता प्रदान करेगा।
इस शुभारंभ कार्यक्रम में बिहार, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल तथा गोवा के ग्रामीण विकास विभागों के सचिवों/प्रमुख सचिवों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया, जबकि 34 राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) के राज्य मिशन निदेशकों/सीईओ ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
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पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2302422)
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