सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) ने अपना 33वां स्थापना दिवस मनाया; इस कार्यक्रम में 900 से अधिक सफाई कर्मचारियों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया


केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और सामाजिक न्याय एवं  अधिकारिता राज्यमंत्री श्री रामदास अठावले ने सफाई कर्मचारियों तथा अन्य हितधारकों की सुरक्षा, संरक्षा, गरिमा, समान अवसर और कल्याण सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

देश भर में सीवर और सेप्टिक टैंक में मौत के 1,377 मामलों में से 1,223 मामलों में संबंधित परिवारों को मुआवजा प्रदान किया गया; आयोग को हर वर्ष 1,200 से अधिक शिकायतें प्राप्त होती हैं; आयोग उचित कार्रवाई एवं समाधान हेतु संबंधित सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों तथा अन्य संस्थानों के समक्ष इन मामलों को उठाता है

एनसीएसके ने बेहतरीन काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र बांटे; दिल्ली नगर निगम के 250 सफाई कर्मचारियों को सम्मानित किया

एनसीएसके ने सभी हितधारकों के लिए “एनसीएसके मिस्ड-कॉल सुविधा नंबर” जारी किया; केन्द्रीय मंत्रियों ने एनसीएसके का वार्षिक कैलेंडर-2026 जारी किया

श्री हरदीप सिंह गिल ने सफाई कर्मचारियों के नाम केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का बधाई संदेश प्रस्तुत किया

प्रविष्टि तिथि: 23 AUG 2026 7:01PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) ने आज राष्ट्रीय राजधानी में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में अपना 33वां स्थापना दिवस मनाया। वर्ष 1994 में इस आयोग के गठन के बाद से सफाई कर्मचारियों के सम्मान में आयोजित यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम था।

दिन भर चले इस कार्यक्रम में 900 से अधिक सफाई कर्मचारियों के साथ-साथ केन्द्र, राज्य/केन्द्र-  शासित प्रदेश सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी), सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों, नागरिक समाज के संगठनों और सफाई कर्मचारियों के कल्याण, सम्मान एवं सुरक्षा के लिए काम करने वाले अन्य हितधारकों के बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम में केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री श्री रामदास अठावले, लोकसभा सांसद श्री अनूप वाल्मीकि, एनसीएसके के उपाध्यक्ष श्री हरदीप सिंह गिल, एनसीएसके सदस्य श्री करम सिंह कर्मा, एनसीएसके के सचिव श्री राहुल कश्यप के अलावा मंत्रालयों और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

यह कार्यक्रम सफाई कर्मचारियों की गरिमा और कल्याण, हाथ से मैला ढोने या सफाई करने की खतरनाक प्रथा को खत्म करने, मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा देने, पुनर्वास एवं सामाजिक सुरक्षा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तहत विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को कार्यान्वित करने पर केन्द्रित था।

बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह स्थापना दिवस महज एक संस्थान की यात्रा का उत्सव भर नहीं है, बल्कि यह उन लाखों सफाई कर्मचारियों के योगदान का सम्मान करने का अवसर भी है जो हर दिन देश के विभिन्न शहरों, गांवों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों को साफ एवं सुरक्षित रखते हैं।

उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि संविधान समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय पर आधारित है, और सफाई कर्मचारियों को भी हर दूसरे नागरिक की तरह ही संवैधानिक गरिमा  और समान अवसर पाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि देश का यह संकल्प होना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति को अपनी आजीविका के लिए ऐसा काम न करना पड़े जिससे उसकी जान, स्वास्थ्य या सम्मान को खतरा हो।

हाथ से मैला ढोने वालों के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 का उल्लेख करते हुए, श्री मेघवाल ने कहा कि यह कानून एक सामाजिक और संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरा करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी कानून की असली सफलता सिर्फ उसे बनाने में नहीं, बल्कि उसे कारगर तरीके से लागू करने में निहित होती है।

उन्होंने सीवर और सेप्टिक टैंक की हाथ से सफाई की खतरनाक प्रथा को पूरी तरह समाप्त  करने और मशीनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों को प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा संबंधी सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही, किसी भी दुर्घटना या मौत के मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। प्रभावित परिवारों को सहायता, मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा निर्धारित समय-सीमा के भीतर मिलनी चाहिए।

श्री मेघवाल ने कहा कि अब जबकि भारत एक विकसित देश बनने की दिशा में अग्रसर है, उसकी स्वच्छता प्रणाली भी आधुनिक, वैज्ञानिक, तकनीक-आधारित और मानवीय गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए; और जो काम मशीन सुरक्षित रूप से कर सकती है, उसके लिए किसी भी व्यक्ति की जान जोखिम में नहीं डाली जानी चाहिए।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के महत्व पर जोर देते हुए, श्री मेघवाल ने कहा कि यह आयोग सफाई कर्मचारियों की चिंताओं को सामने लाने, उनकी शिकायतों पर ध्यान देने, राज्यों व  स्थानीय निकायों में स्थितियों का आकलन करने और सरकार को जरूरी सुधारात्मक उपाय सुझाने में अहम भूमिका निभाता है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना अकेले सरकार या आयोग की ही जिम्मेदारी नहीं है। राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों, उन्हें काम पर रखने वाले संस्थानों और पूरे समाज को इसमें बराबर की भागीदारी निभानी चाहिए। देश को एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें सफाई कर्मचारी को महज एक सेवा प्रदाता के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में बराबर के साझेदार के तौर पर देखा जाए।

श्री मेघवाल ने इस बात को दोहराया कि राष्ट्रीय लक्ष्य स्पष्ट होने चाहिए: हाथ से सफाई का खतरनाक काम बिल्कुल न हो; सीवर एवं सेप्टिक टैंक में सफाई के दौरान कोई मौत न हो; पूरी तरह मशीनों से सफाई हो; और हर सफाई कर्मचारी को गरिमापूर्ण एवं सुरक्षित जीवन मिले।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को उसके स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए, श्री मेघवाल ने उम्मीद जताई कि आयोग सरकार, राज्यों और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा तथा सफाई कर्मचारियों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा में और भी प्रभावी भूमिका निभाएगा।

उन्होंने सभी हितधारकों से सामूहिक रूप से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि भारत में कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किसी भी सफाई कर्मचारी की जान न जाए और हर सफाई कर्मचारी रोजाना सुरक्षित और गरिमा के साथ घर लौटे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, श्री रामदास अठावले ने जन-स्वास्थ्य की रक्षा, पर्यावरण की स्वच्छता बनाए रखने और देश की समग्र कल्याण को बढ़ावा देने में सफाई कर्मचारियों के अमूल्य योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि हर साफ-सुथरी सड़क, ठीक से काम करने वाली सीवर प्रणाली और साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थल, उन हजारों सफाई कर्मचारियों की समर्पित प्रयासों को दर्शाते हैं जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी आवश्यक सेवाएं देते रहते हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हर सफाई कर्मचारी को गरिमा, सुरक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय पाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि असुरक्षित कार्यपद्धतियों  के स्थान पर तकनीक का उपयोग होना चाहिए, तंग जगहों में खतरनाक तरीके से घुसने के बजाय मशीनों का उपयोग किया जाना चाहिए और सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

पेशागत सुरक्षा को बेहतर बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, श्री अठावले ने विभिन्न पहलों का उल्लेख किया। इन पहलों का उद्देश्य मशीनीकृत सफाई व्यवस्था को बढ़ावा देना, पुनर्वास के उपायों को मजबूत करना और सामाजिक सुरक्षा लाभों तक सफाई कर्मचारियों की पहुंच बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अंतिम लक्ष्य कोई मौत नहीं और खतरनाक तरीके से अंदर जाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करना होना चाहिए।

नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते) योजना का उल्लेख करते हुए, श्री अठावले ने इसे साफ-सफाई का एक सुरक्षित, मशीनीकृत और गरिमापूर्ण व्यवस्था बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य साफ-सफाई में संलग्न कर्मचारियों की पहचान एवं प्रोफाइलिंग, सुरक्षा उपकरणों के प्रावधान, प्रशिक्षण, हेल्थकेयर कवरेज, कौशल विकास और रोजगार के टिकाऊ अवसरों की सुलभता के जरिए उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है।

श्री अठावले ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के कार्यों की प्रशंसा भी की। उन्होंने सफाई कर्मचारियों के कल्याण को बेहतर बनाने के लिए जरूरी उपायों पर सरकारों को सलाह देने, शिकायतों की जांच करने, जमीनी स्तर पर जायजा लेने और योजनाओं के कार्यान्वन की निगरानी करने में आयोग की अहम भूमिका की सराहना की।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को उसके स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए, श्री अठावले ने सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा की दिशा में आयोग के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने एक सुरक्षित, गरिमापूर्ण और समावेशी स्वच्छता इकोसिस्टम बनाने के साझा लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में निरंतर सहयोग का भरोसा दिलाया।

श्री अठावले ने सभी हितधारकों से मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि हर सफाई कर्मचारी का रोजाना काम से सुरक्षित घर लौटना सुनिश्चित हो सके।

सभा को संबोधित करते हुए, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के माननीय उपाध्यक्ष श्री हरदीप सिंह गिल ने देश भर के सफाई कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के प्रति आयोग की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। 

मुख्य अतिथि, गणमान्य व्यक्तियों, वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य सरकारों व शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, मीडिया के सदस्यों और सफाई कर्मचारियों का स्वागत करते हुए, श्री गिल ने कहा कि स्थापना दिवस केवल आयोग के गठन का उत्सव मनाने का मौका नहीं है, बल्कि यह उन लाखों सफाई कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करने का भी अवसर है, जिनके अथक प्रयासों से देश के शहर, कस्बे और गांव साफ-सुथरे, सुरक्षित एवं स्वस्थ रहते हैं। उन्होंने सफाई कर्मचारियों के योगदान को राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला बताया और इस बात पर जोर दिया कि उनके कल्याण को भारत की विकास यात्रा के केन्द्र में रखा जाना चाहिए।

श्री गिल ने कहा कि आयोग का काम सिर्फ शिकायतों का समाधान करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका बड़ा उद्देश्य सफाई कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और उनका सम्मान के साथ जीना तथा सुरक्षित माहौल में काम कर पाना सुनिश्चित करके, उनके जीवन में स्थायी और सकारात्मक सुधार लाना है।

आयोग की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालते हुए, एनसीएसके के उपाध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने कई राज्यों का दौरा किया है, सफाई कर्मचारियों से सीधे बातचीत की है, उनकी चिंताओं को समझा है और राज्य सरकारों तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें की हैं। आयोग ने व्यवस्थागत और स्थायी सुधार लाने के उद्देश्य से कई अहम मुद्दों पर सिफारिशें भी सौंपी हैं।

देश के “विकसित भारत 2047” के विजन का उल्लेख करते हुए, श्री गिल ने सुरक्षित काम के माहौल, आधुनिक मशीनों व तकनीक के बड़े पैमाने पर उपयोग, सही प्रशिक्षण, सुरक्षा के पर्याप्त उपकरणों और दुर्घटनाओं को रोकने को सबसे अधिक प्राथमिकता देने हेतु मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा एवं गरिमापूर्ण आजीविका के अवसर मिलने चाहिए।

श्री गिल ने जोर देकर कहा कि स्वच्छ भारत का सपना तभी पूरी तरह साकार हो सकता है जब सफाई कर्मचारी सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त हों।

श्री गिल ने बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करने और इस अवसर की सार्थकता बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि एवं सम्मानित अतिथि का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोग के सदस्यों और सचिव, अधिकारियों और कर्मचारियों तथा स्थापना दिवस समारोह के आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई भी दी।

इस अवसर पर, श्री हरदीप सिंह गिल ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के 32 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सफाई कर्मचारियों के नाम केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का बधाई संदेश भी प्रस्तुत किया

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के माननीय सदस्य श्री करम सिंह कर्मा ने देश भर के सफाई कर्मचारियों के प्रति देश के शहरों, कस्बों और गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ एवं रहने लायक बनाए रखने में उनके अमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।

श्री कर्मा ने कहा कि स्थापना दिवस सिर्फ आयोग के गठन का उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके योगदान को मान्यता देने और उनकी गरिमा सुनिश्चित करने की एक सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है।

विभिन्न राज्यों में सफाई कर्मचारियों, उनके परिवारों, स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित लोगों के साथ अपनी बातचीत का उल्लेख करते हुए, श्री कर्मा ने कहा कि हर सफाई कर्मचारी महज एक कर्मचारी भर नहीं है, बल्कि वह एक परिवार की उम्मीद, समाज के लिए ताकत का स्रोत और देश की प्रगति में एक अहम भागीदार भी है।

श्री कर्मा ने कहा कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में आधुनिक मशीनों एवं तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग, दुर्घटनाओं को रोकने तथा व्यक्ति की जान बचाने का सबसे कारगर  तरीका है। उन्होंने सभी हितधारकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सफाई से जुड़े काम करते समय किसी भी सफाई कर्मचारी को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े। उन्होंने कहा कि हर कर्मचारी को उपयुक्त सुरक्षा उपकरण, उचित प्रशिक्षण और सुरक्षित काम करने के तरीके मुहैया कराना सबकी साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।

श्री कर्मा ने सभी हितधारकों से सफाई कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा, सामाजिक न्याय एवं  कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने और मिलकर एक ऐसा भारत बनाने की दिशा में काम करने का आग्रह किया, जहां हर सफाई कर्मचारी गर्व, सम्मान और पूरी सुरक्षा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर सके।

इससे पहले, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के सचिव श्री राहुल कश्यप ने कहा कि स्थापना दिवस देश के हर सफाई कर्मचारी के प्रति आभार व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सफाई कर्मचारियों का जीवन साहस, समर्पण और समाज व राष्ट्र की सेवा की अटूट भावना से भरा रहा है।

सचिव ने कहा कि कई सफाई कर्मचारी अभी भी कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और उन्हें बुरा बर्ताव, कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी का अभाव, वेतन मिलने में देरी और सुरक्षा की अपर्याप्त व्यवस्था जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आयोग इन समस्याओं को दूर करने और उनके काम करने व रहने की स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री कश्यप ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, आयोग ने केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों तथा सफाई कर्मचारी समुदाय के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम किया है और उनके अधिकारों की रक्षा, उनकी शिकायतों के समाधान एवं उनके सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य किया है।

सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतों का उल्लेख करते हुए, श्री कश्यप ने कहा कि ऐसी हर मौत पीड़ित परिवार के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार और राज्य सरकारों तथा स्थानीय निकायों के साथ लगातार तालमेल बिठाकर, देश भर में सामने आए 1,377 मामलों में से 1,223 मामलों में संबंधित परिवारों को निर्धारित मुआवजा दिया गया है। आयोग बाकी मामलों पर भी नजर रख रहा है ताकि पीड़ित परिवारों को मुआवजा और अन्य सहायता  मिलना सुनिश्चित हो सके।

श्री कश्यप ने कहा कि आयोग को हर वर्ष 1,200 से अधिक शिकायतें मिलती हैं और वह उचित कार्रवाई एवं समाधान के लिए इन मामलों को संबंधित सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों और अन्य संस्थानों के सामने उठाता है। उन्होंने कहा कि आयोग ‘हाथ से मैला ढोने वालों के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ और इसके तहत बने नियमों को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने की दिशा में भी काम कर रहा है।

सचिव ने कहा कि सीवर और सेप्टिक टैंक में होने वाली मौतों के मामलों में जवाबदेही तय करना भी एक अहम मुद्दा है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट किए गए 1,377 मामलों में से 750 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि आयोग बाकी मामलों को संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर देख रहा है, ताकि कानून के तहत जहां भी जरूरी हो, प्राथमिकी दर्ज की जा सके और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके।

इस मौके पर, श्री राम अर्जुन मेघवाल ने सभी हितधारकों के लिए एनसीएसके का मिस्ड-कॉल सुविधा नंबर जारी किया, ताकि आयोग कॉल करने वालों से संपर्क कर उनकी शिकायतों, समस्याओं और सुझावों को दर्ज कर सके तथा समयबद्ध तरीके से उनका समाधान कर सके।

इस अवसर पर, श्री अर्जुन मेघवाल, श्री रामदास अठावले, श्री हरदीप सिंह गिल, श्री करम सिंह कर्मा, सचिव राहुल कश्यप और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने एनसीएसके का वार्षिक कैलेंडर- 2026 जारी किया

आयोग ने बेहतरीन काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र भी बांटे और दिल्ली नगर निगम के 250 सफाई कर्मचारियों को सम्मानित किया।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय आयोग सफाई कर्मचारी का काम केन्द्र सरकार को सफाई कर्मचारियों के स्थिति, सुविधाओं और अवसरों में असमानता को खत्म करने के लिए विशिष्ट कार्य योजना  की सिफारिश करना है; सफाई कर्मचारियों और विशेषकर मैला ढोने वालों के सामाजिक एवं  आर्थिक पुनर्वास से जुड़े कार्यक्रम व योजनाओं के कार्यान्वयन का अध्ययन और मूल्यांकन करना है; और सफाई कर्मचारियों के किसी भी समूह के लिए कार्यक्रम या योजनाओं का कार्यान्वयन न होने, सफाई कर्मचारियों की मुश्किलों को कम करने के उद्देश्य से लिए गए निर्णयों, दिशा-निर्देशों या निर्देशों, सफाई कर्मचारियों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के उपायों, और सफाई कर्मचारियों पर लागू होने वाले किसी भी कानून के प्रावधानों से जुड़े मामलों की जांच करना और खुद से संज्ञान लेना है और ऐसे मामलों को संबंधित अधिकारियों या केन्द्र  या राज्य सरकारों के सामने उठाना है।

इसके अलावा, आयोग को स्वास्थ्य, सुरक्षा और वेतन समेत सरकार, नगर पालिकाओं तथा  पंचायतों जैसे विभिन्न प्रकार के नियोक्ताओं के अधीन कार्यरत सफाई कर्मचारियों के काम करने की स्थितियों का अध्ययन और निगरानी करने का अधिकार है। आयोग इस संबंध में सिफारिशें भी कर सकता है और सफाई कर्मचारियों से जुड़े किसी भी मामले पर उनकी कठिनाइयों या समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केन्द्र या राज्य सरकारों को रिपोर्ट भी सौंप सकता है।

हालांकि, “हाथ से मैला ढोने वालों के तौर पर रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013” के लागू होने के साथ ही आयोग का दायरा और अधिकार भी बढ़ गए हैं। इस अधिनियम की धारा 31(1) के तहत, आयोग को अधिनियम के लागू होने की निगरानी करने, अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच करने, और अपनी जांच के नतीजों को जरूरी कार्रवाई की सिफारिशों के साथ संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का अधिकार है। साथ ही, आयोग इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को सलाह दे सकता है और अधिनियम के लागू न होने से जुड़े मामलों पर स्वतः संज्ञान भी ले सकता है।

आयोग सफाई कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और सीवर में मरने वालों के कानूनी वारिसों को मुआवजा भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा करता है। अपनी जांच के आधार पर, आयोग समय-समय पर और अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को सफाई कर्मचारियों के पुनर्वास तथा उन्हें मैला ढोने की कुप्रथा से मुक्त करने हेतु सिफारिशें देता है।

****

पीके/केसी/आर 


(रिलीज़ आईडी: 2302575) आगंतुक पटल : 138
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Marathi