रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग
रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग ने आईआईटी मद्रास में पहले केमकनेक्ट 2026 का आयोजन किया
आईआईटी मद्रास में जैविक रूप से अपघटित पैकेजिंग सामग्री (बायोपैक) पर उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन
प्रविष्टि तिथि:
25 AUG 2026 6:25PM by PIB Delhi
रसायन और उर्वरक मंत्रालय के रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग ने आज, 25 अगस्त 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास में पहले केमकनेक्ट 2026 का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में उद्योग जगत, शिक्षा जगत, स्टार्ट-अप और अनुसंधान संस्थानों के 200 से ज़्यादा अग्रणी व्यक्तिओं, शोधकर्ताओं और उद्यमियों ने भाग लिया, जिनमें विभाग द्वारा स्थापित उत्कृष्टता केंद्र के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग (डीसीपीसी) के सचिव श्री तेजवीर सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उनके साथ आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी, रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. जी. वेंकटेश, सीआईपीईटी के महानिदेशक प्रो. शिशिर सिन्हा और आईआईटी मद्रास के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. एथयाराजा मणि भी मौजूद थे।

रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग के सचिव श्री तेजवीर सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और आईआईटी मद्रास में जैविक रूप से अपघटित पैकेजिंग सामग्री (बायोपैक) पर उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ किया। बायोपैक सुविधा; सतत नवाचार, क्षमता निर्माण और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग क्षमताओं में आधुनिक अनुसंधान के लिए एक हब के तौर पर काम करेगी।

अपने उद्घाटन भाषण में श्री तेजवीर सिंह ने रसायन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लगभग हर विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बुनियादी आधार का काम करता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जैसे-जैसे भारत 2047 तक 'विकसित भारत' बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, प्रयोगशाला के अनुसंधान को वाणिज्यिक तौर पर सफल उत्पादों में बदलने के लिए उद्योग जगत और शिक्षा जगत के बीच साझेदारी को मज़बूत करना बहुत ज़रूरी है।
सचिव महोदय ने आयात के विकल्प की ज़रूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि अधिक आत्मनिर्भरता के लिए वस्तुओं का प्रसंस्करण घरेलु स्तर पर होना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि लक्षित शोध व विकास और उद्योग-समर्थित शोध क्लस्टर भारत की वैश्विक मौजूदगी को बढ़ाएंगे। श्री सिंह ने यह भी घोषणा की कि केमकनेक्ट अब हर साल जुलाई-अगस्त में आयोजित किया जाएगा, ताकि सभी 'उत्कृष्टता केन्द्रों' की प्रगति का आकलन किया जा सके।
इस अवसर पर आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी ने तकनीक को उसकी तार्किक परिणति तक पहुँचाने में संस्थागत तालमेल के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने नवोन्मेष द्वारा समस्याएं सुलझाने (रिवर्स पिचिंग) के ज़रिए रसायन क्षेत्र को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया, जहाँ उद्योग जगत अपनी समस्याएं अनुसंधान संस्थानों के सामने रखता है।
पेट्रो-रसायन विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. जी. वेंकटेश ने 'उत्कृष्टता केंद्र’ योजना के विज़न के बारे में बताया, जबकि सीआईपीईटी के महानिदेशक प्रो. शिशिर सिन्हा ने इस पहल का राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के साथ तालमेल पर प्रकाश डाला। आईआईटी मद्रास के प्रो. एथयाराजा मणि, जो इस कार्यक्रम के संयोजक थे, ने स्वागत भाषण दिया और धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।
डीसीपीसी के सचिव और आईआईटी मद्रास के निदेशक ने केमकनेक्ट 2026 पर एक संग्रह-पुस्तिका भी जारी की।
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पीके/केसी/जेके
(रिलीज़ आईडी: 2303281)
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