विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
“पहले दिन से ही उद्योग के साझेदारों को साथ लाएं”: डॉ. जितेन्द्र सिंह ने उद्योग-अनुसंधान और विकास के बीच नये साझेदारी मॉडल का आह्वान किया
मंत्री ने कहा कि उद्योग की शुरुआती भागीदारी प्रौद्योगिकियों को बाजार के लिए तैयार करने के साथ उनके व्यावसायीकरण में तेजी ला सकती है
मंत्री ने उद्योग के नेतृत्व में साझा अनुसंधान एवं विकास मंच स्थापित करने तथा सरकार और उद्योग के बीच निरंतर सहभागिता का आह्वान किया
प्रविष्टि तिथि:
06 SEP 2026 5:30PM by PIB Delhi
“व्यावसायिक इकाई को पहले दिन से ही प्रयोगशाला के साथ मिलकर काम करना चाहिए।” इस संदेश के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग के तौर-तरीकों में मूलभूत बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने यह बात कोलकाता स्थित सीएसआईआर-आईआईसीबी में आयोजित छठे आरआईएसई सम्मेलन में उद्योग जगत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, मुख्य वैज्ञानिक अधिकारियों और मुख्य परिचालन अधिकारियों के साथ संवाद के दौरान कही। उन्होंने कहा कि संभावित वाणिज्यिक साझेदारों की पहचान परियोजना की योजना बनाने के चरण में ही कर ली जानी चाहिए और उन्हें परियोजना से जोड़ दिया जाना चाहिए, ताकि बाजार की आवश्यकताएं और व्यावहारिक पहलू उस समय से ही प्रौद्योगिकी के विकास को दिशा दे सकें, जब वह अभी विकास के चरण में हो।
उद्योग की ओर से दिए गए इस सुझाव पर कि वाणिज्यिक साझेदारों को प्रयोगशाला स्तर पर ही साथ जोड़ा जाना चाहिए, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि शुरुआती चरण में उद्योग की भागीदारी से बाजार की गतिशीलता, डिजाइन, पर्यावरणीय स्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकताओं और वाणिज्यिक व्यवहार्यता के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोई प्रौद्योगिकी बाज़ार में सिर्फ़ इसलिए नहीं आनी चाहिए कि बाद में पता चले कि वास्तविक उपयोगकर्ताओं की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए उसमें बदलाव की ज़रूरत है।
इसके बाद संवाद उद्योग जगत के लिए सीधा मंच बन गया, जहां उद्योग प्रतिनिधियों ने मंत्री के समक्ष विशिष्ट प्रौद्योगिकियों और उनसे जुड़ी चुनौतियों को रखा।
महत्वपूर्ण खनिज और स्वदेशी प्रौद्योगिकी भी उद्योग जगत की प्रमुख रुचि के क्षेत्रों के रूप में उभरे। प्रतिभागियों ने दुर्लभ मृदा तत्वों के निष्कर्षण, स्थायी चुंबकों, पुनर्चक्रण, लिथियम के लाभकारीकरण तथा वैनेडियम और टाइटेनियम जैसे रणनीतिक खनिजों के पुनर्प्राप्ति संबंधी विषयों पर चर्चा की। उद्योग प्रतिनिधियों ने इन प्रौद्योगिकियों को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं से तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की मांग की। चर्चा में पूर्वी भारत में दुर्लभ मृदा तत्वों तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सीएसआईआर संस्थानों और अन्य सरकारी वैज्ञानिक एजेंसियों में विकसित की जा रही क्षमताओं का अधिकतम लाभ उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मंत्री ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और विशिष्ट ऑप्टिकल घटकों से संबंधित उद्योग जगत के सुझावों पर भी प्रतिक्रिया दी। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने संबंधित विवरण मांगे और संकेत दिया कि अंतरिक्ष से संबंधित इस विषय को अंतरिक्ष विभाग के समक्ष उठाया जा सकता है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं और उन्होंने उद्योग जगत से ऐसे और विशिष्ट सुझाव देने का आह्वान किया, जिन पर विचार किया जा सके।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने फाउंड्री क्षेत्र के लिए एक साझा अनुसंधान एवं विकास सुविधा स्थापित करने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को एकजुट होकर अपनी आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखना चाहिए और सरकार इस मंच को सुविधाजनक बनाने में सहयोग कर सकती है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि उद्योगों को इस प्रकार का मंच बनाने के लिए एक साथ आने पर कोई प्रतिबंध नहीं है और उन्होंने इस्पात क्षेत्र के उद्यमों से सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हम मंच उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं। आप सभी अलग-अलग इस्पात उद्योगों के प्रतिनिधि एक समूह के रूप में आइए और कहिए कि ‘हमें एक मंच उपलब्ध कराइए।’ हम उपलब्ध कराएंगे।”
बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स ने सर्पदंश विषरोधक के स्वदेशी उत्पादन को पुनर्जीवित करने की संभावना का मुद्दा उठाया। कंपनी ने बताया कि पूर्वी भारत में सांपों की विशिष्ट प्रजातियां पाई जाती हैं और इसलिए इस क्षेत्र की आवश्यकताएं भी अलग हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कंपनी को पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ समन्वय करने की सलाह दी और इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार के किसी भी प्रयास को वैज्ञानिक और जन-स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाना चाहिए।
इसके बाद विष और सर्पदंश के क्षेत्र में कार्यरत एक स्टार्टअप ने सर्पदंश के लिए जिम्मेदार सांप की प्रजाति की पहचान करने तथा नए विषरोधी उपचार विकसित करने से संबंधित प्रौद्योगिकियां प्रस्तुत कीं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने इस नवाचार का स्वागत किया, लेकिन जोर देकर कहा कि इन प्रौद्योगिकियों को व्यापक स्तर पर अपनाने से पहले उचित वैज्ञानिक सत्यापन और नैदानिक परीक्षण आवश्यक होंगे। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता और आवश्यक सत्यापन के लिए नवोन्मेषकों को पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ समन्वय करने का सुझाव दिया।
पूरे संवाद के दौरान डॉ. जितेन्द्र सिंह ने उद्योग प्रतिनिधियों को सामान्य चर्चाओं से आगे बढ़कर विशिष्ट और क्रियान्वयन योग्य आवश्यकताओं को सामने रखने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया और आश्वस्त किया कि सरकार तथा वैज्ञानिक संस्थान उपयुक्त समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करेंगे। अपने समापन वक्तव्य में उन्होंने कहा, “आप हमें बताइए कि हम आपके लिए क्या कर सकते हैं, या आपके लिए क्या नहीं कर रहे हैं, अथवा आपके लिए हम और बेहतर क्या कर सकते हैं।” इसके माध्यम से उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि सरकार उद्योग की स्पष्ट रूप से व्यक्त आवश्यकताओं के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार का संवाद केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि आपके पास और सुझाव हैं, तो आप कभी भी संपर्क कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि आपको इस तरह के किसी औपचारिक अवसर की प्रतीक्षा करनी पड़े।” उन्होंने उद्योग जगत से संबंधित संस्थानों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का आह्वान किया। इस प्रकार, छठे आरआईएसई सम्मेलन में हुआ संवाद भारत के प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक स्पष्ट मॉडल को रेखांकित करता है—अनुसंधान एवं विकास के प्रारंभिक चरण से ही उद्योग को साझेदार के रूप में जोड़ना, वैज्ञानिक संस्थानों को प्रौद्योगिकी के सक्षमकर्ता के रूप में विकसित करना और सरकार को प्रयोगशाला से बाजार तथा अंततः व्यापक सामाजिक उपयोग तक संभावनाशील प्रौद्योगिकियों को पहुंचाने में सुविधाप्रदाता की भूमिका निभाना।




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पीके/केसी/केपी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2307207)
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