वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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भारत को मजबूत और वैश्विक स्तर पर एकीकृत स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करना होगा: वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल


फार्मा क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास, नए अणुओं, बायोसिमिलर्स और जैव प्रौद्योगिकी में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए: श्री गोयल

भारत को आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती के लिए बाहरी दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिसमें स्थानीय मूल्यवर्धन और सभी लोगों तक वितरण के लिए विदेशी बाजारों में निवेश शामिल है

सरकार चिकित्सा पर्यटन, फार्मा और स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना और क्षेत्र-विशिष्ट प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक सुविधाओं का समर्थन करने के लिए तैयार है

प्रविष्टि तिथि: 06 SEP 2026 9:28PM by PIB Delhi

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में भारत हेल्थ ग्लोबल एक्सपो 2026 के दौरान भारत की स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और वैश्विक स्तर पर समन्वित बनाने पर बल दिया। उन्होंने भारत की प्रतिष्ठा को एक विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा सहयोगी के रूप में सुदृढ़ करने और जेनेरिक दवाओं में मिली सफलता से आगे बढ़कर नवाचार, अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।

इस अवसर पर उनके साथ वाणिज्य एवं उद्योग, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल भी उपस्थित थे।

श्री गोयल ने कहा कि भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र के पास विश्व के सामने अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है और "विश्व की फार्मेसी" के रूप में प्रसिद्ध इस देश को एक बड़े और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत हेल्थ ग्लोबल एक्सपो के जरिए स्वास्थ्य सेवा समुदाय का एकत्र होना महज एक शुरुआत है, जिसमें असीम संभावनाएं हैं। यह एक ही मंच पर पूरी मूल्य श्रृंखला को लाकर अधिक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आगे चलकर इस मंच को देश-व्यापी प्रदर्शनियों और साझेदार देशों के लिए भी खोला जा सकता है, जिससे विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि इससे भारत आत्मविश्वास के साथ अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकेगा और वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।

आपूर्ति श्रृंखलाओं में मजबूती के महत्व पर जोर देते हुए श्री गोयल ने कहा कि दुनिया अब अधिक लचीली और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं की ओर अग्रसर हो रही है। उन्होंने कहा कि केवल एक या दो स्थानों पर अत्यधिक निर्भरता और ऐसी आपूर्ति श्रृंखलाएं, जिनका संभवतः रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, वैश्विक दृष्टिकोण से चिंता का विषय बनती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले विभिन्न कारणों से सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (एपीआई) और प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम) में अपनी स्थिति खो दी थी और अब फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती बहाल करने का समय आ गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लचीलेपन का अर्थ अंतर्मुखी दृष्टिकोण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को हर चीज का स्वदेशीकरण करने की आवश्यकता नहीं है और जहां आवश्यक होगा वहां आयात जारी रहेगा। हालांकि, उत्पाद कई भौगोलिक क्षेत्रों और कंपनियों से उपलब्ध होने चाहिए ताकि कोई एक या दो देश या कंपनियां व्यवसायों को बंधक न बना सकें और उद्योग की निरंतरता को खतरे में न डाल सकें।

श्री गोयल ने कहा कि भारत की मांग को समेकित करने से ऐसे अनेक उत्पादों की पहचान की जा सकेगी, जिनका वर्तमान में आयात किया जा रहा है, जबकि उनके घरेलू स्तर पर उत्पादन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के देश अब निवेश आकर्षित करने और अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा अब केवल विकासशील देशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, जापान, कोरिया, सिंगापुर, यूरोप और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी अपने क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए भारत न केवल वस्तुओं और सेवाओं में बल्कि निवेश आकर्षित करने के मामले में भी विकसित देशों से प्रतिस्पर्धा कर रहा है, जिससे भारत के निवेश प्रस्ताव को मजबूत करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

श्री गोयल ने यह भी कहा कि भारत को यह समझना होगा कि अन्य देश भी मजूबती हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए दवा क्षेत्र को वैश्विक और बाहरी दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कई देश हो सकते हैं जहां भारतीय दवा कंपनियों को अंतिम छोर तक डिलीवरी, स्थानीय मूल्यवर्धन और रोजगार सृजन के लिए निवेश करने की आवश्यकता हो सकती है, जिनमें अफ्रीकी देश भी शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र को वैश्विक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार पर श्री गोयल ने कहा कि जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में भारत की सफलता दवा उद्योग के सक्रिय और निरंतर प्रयासों के कारण संभव हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि भारत का लक्ष्य 2047 तक एक विकसित देश बनना है, तो वह केवल जेनेरिक दवाओं पर ही निर्भर नहीं रह सकता।

श्री गोयल ने कहा कि भारत को अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना चाहिए, अपने उत्पादों का विकास और पेटेंट कराना चाहिए और अनुसंधान एवं विकास एवं नवाचार को समर्थन देने वाले कार्यक्रमों का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए और अनुसंधान एवं विकास नवाचार कोष (आरडीआईएफ) जैसी पहलों का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने भारतीय कंपनियों, इंजीनियरों और प्रतिभाओं से नए अणुओं, बायोसिमिलर्स और जैव प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया, जो उनके अनुसार इस क्षेत्र के लिए अगली सीमा बननी चाहिए।

श्री गोयल ने कहा कि भारत को विश्व को एक ऐसा नियामक तंत्र भी प्रदान करना होगा जो देश में अनुसंधान एवं विकास और नवाचार को आकर्षक बनाए। उन्होंने नैदानिक परीक्षणों में निवेश को बढ़ावा देने, उत्पादों के पेटेंट कराने, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने तथा भारत में नए उत्पादों को पेश करने के लिए एक खुले और निवेश-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय नियामकों को अधिक विकसित देशों के नियमों का अध्ययन करना चाहिए और वैश्विक घटनाक्रमों से सीख लेकर विकसित देशों के साथ नियामक अभिसरण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब तक भारत की मानसिकता और दृष्टिकोण विकसित देशों के अनुरूप नहीं होंगे, तब तक देश 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य नहीं रख सकता। उन्होंने कहा कि भारत को देश में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों और वैश्विक स्तर पर सरकारों की मांगों को सुनना चाहिए और मिलकर इस उद्योग की सफलता के लिए नया मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।

चिकित्सा संबंधी उपयोगी यात्राओं पर श्री गोयल ने कहा कि इस क्षेत्र में लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय अस्पताल आधुनिक और विश्व स्तरीय बन गए हैं, जिनमें सर्वोत्तम उपकरण मौजूद हैं और भारतीय डॉक्टर, तकनीशियन और नर्स सर्वश्रेष्ठ में से हैं। उन्होंने चिकित्सा संबंधी उपयोगी यात्राओं को मिशन मोड में चलाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि एसईपीसी ने इस क्षेत्र में सीआईआई, फिक्की और अन्य संस्थाओं के साथ पहले ही पहल की है और बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने और भारतीय स्वास्थ्य सेवा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ईपीएम और इंडिया ब्रांड इक्विटी फंड के माध्यम से सरकार को भारत में चिकित्सा देखभाल को विश्व के बाकी हिस्सों में बढ़ावा देने की पहलों का समर्थन करने में प्रसन्नता होगी और दवा उद्योग से शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान, विश्वभर में जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता और भारत से नए नवाचारों और पेटेंट उत्पादों के उद्भव के माध्यम से, भारत ने विश्व के एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में, विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, अपनी भूमिका बार-बार प्रदर्शित की है। उन्होंने कहा कि ये सभी विकास सामूहिक रूप से घरेलू और वैश्विक स्तर पर उद्योग को अगले स्तर तक ले जाने में सहायक होंगे।

श्री गोयल ने कहा कि पिछले 40 वर्ष दवा उद्योग के लिए निर्णायक काल रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र को वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। उन्होंने दवा उद्योग से ऊंची उड़ान भरने और एक बड़े और बेहतर भविष्य की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

बुनियादी ढांचे के बारे में श्री गोयल ने कहा कि सरकार बल्क ड्रग पार्कों के विकास के लिए काम कर रही है, जिसके तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पुरानी और नई दोनों तरह की परियोजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि 100 नए औद्योगिक पार्क बनाए जा रहे हैं, जहां जरूरत पड़ने पर फार्मा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए विशेष क्षेत्र उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

उन्होंने इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे क्षेत्रों के उद्योगों को भी अपने उद्योग स्थापित करने के स्थानों के बारे में अधिक स्पष्ट होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि सरकार को विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुगम और सुलभ बुनियादी ढांचा तैयार करने में प्रसन्नता होगी।

चिकित्सा उपकरणों के विषय पर श्री गोयल ने कहा कि इस क्षेत्र में प्रयास तो किए गए हैं, लेकिन भारत को अभी लंबा रास्ता तय करना है। उन्होंने असेंबली से हटकर घरेलू और स्वदेशी रूप से घटकों के उत्पादन और संपूर्ण चिकित्सा उपकरण प्रणाली के विकास की ओर बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों और अस्पतालों को भारत में बेहतर और श्रेष्ठ उत्पादों की उपलब्धता के प्रति अधिक जागरूक होना होगा। घरेलू बाजार में हिस्सेदारी बढ़ने से निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि विशाल भारतीय बाजार से उत्पादन में लागत में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उपकरणों और पुर्जों के स्वदेशीकरण में सहयोग कर सकते हैं, जबकि बड़ी कंपनियां उत्पादन में योगदान दे सकती हैं।

श्री गोयल ने कहा कि सामूहिक रूप से किए गए ये प्रयास लाखों रोजगार सृजित कर सकते हैं, अरबों डॉलर के निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं और भारत को भविष्य के संकटों के प्रति अधिक सुदृढ़ बना सकते हैं।

आयुष के बारे में श्री गोयल ने कहा कि यह भारत की पारंपरिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन भारत अभी भी कच्ची जड़ी-बूटियों का निर्यात कर रहा है। उन्होंने आयुष उत्पादों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण को बढ़ाने का आह्वान किया ताकि उन्हें वैश्विक स्तर पर व्यापक स्वीकृति मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही इस दिशा में काम कर रही है।

सहयोग के महत्व पर बल देते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत ने अपनी मजबूतियों वाले क्षेत्रों में कई समान पहल की योजना बनाई है, जिनमें से दवा क्षेत्र देश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग सम्मेलन आयोजित करने के बजाय इस क्षेत्र को एक ही मंच पर लाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि एकीकृत मंच 50 से अधिक देशों और विश्वभर के लगभग 1,000 लोगों की भागीदारी को आकर्षित कर सकता है। इसके अलावा, यह हितधारकों को क्षेत्र में हो रहे विकास का व्यापक अवलोकन प्राप्त करने और सर्वोत्तम मानकों की तुलना और पहचान करने में सक्षम बनाता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को भी यह दृढ़ विश्वास रखना होगा कि वह सर्वश्रेष्ठ देशों से प्रतिस्पर्धा कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा अंततः गुणवत्ता, समय पर वितरण और बेहतर ग्राहक सेवा पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास, विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र में, विश्व के सामने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का अवसर और क्षमता है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार पहुंच के विषय पर श्री गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) भारतीय उद्योग के लिए वैश्विक बाजार खोल रहे हैं और वैश्विक बाजार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा भारत के लिए तरजीही बाजार पहुंच के लिए पहले से ही खुला है। उन्होंने कहा कि भारत 8 से 10 और बहुपक्षीय या द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों (पीटीए) पर बातचीत कर रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से तक पहुंच प्राप्त हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि 2014 तक, भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने सामूहिक रूप से 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वाले बाजारों तक पहुंच प्रदान की थी। इसके विपरीत, श्री जितिन प्रसाद द्वारा संदर्भित और साथ में प्रकाशित पुस्तक में वर्णित नौ मुक्त व्यापार समझौते 38 विकसित देशों को शामिल करते हैं और 60 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) तक पहुंच प्रदान करते हैं, जो 2014 तक उपलब्ध पहुंच से छह गुना अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से कई मुक्त व्यापार समझौते 25 वर्षों से अटके हुए हैं।

श्री गोयल ने कहा कि भारतीय उद्योग प्रतिस्पर्धी और सर्वश्रेष्ठ श्रेणी का है, जिसमें प्रतिभा का भंडार है और अब जरूरत है अधिक महत्वाकांक्षा, उच्च लक्ष्यों और विभिन्न पहलुओं को आपस में जोड़ने की क्षमता की। उन्होंने कहा कि भारत हेल्थ जैसा संगठन विभिन्न संगठनों को एक साथ लाकर, सहयोग को प्रोत्साहित करके ठीक यही करने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आवश्यक और अच्छी है लेकिन इस क्षेत्र को सहयोग भी करना होगा। उन्होंने उद्योग जगत से बड़े लक्ष्य रखने, आधुनिक दृष्टिकोण अपनाने, वैश्विक स्तर पर विस्तार करने, गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, लचीलापन विकसित करने, अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार में निवेश करने, भारतीय क्षमताओं और प्रतिभा का लाभ उठाने और भारत की व्यापारिक साझेदारियों के माध्यम से खुल रहे अवसरों का पूरा उपयोग करने का आह्वान किया।

श्री गोयल ने उद्योग जगत से वैश्विक स्तर पर अधिक विश्वास, सद्भावना और बाजार हिस्सेदारी अर्जित करने तथा भारत को "वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र" बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा के बिना कोई भी व्यक्ति, अर्थव्यवस्था या देश सफल या खुशहाल नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की जिम्मेदारी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के कंधों पर है, जिस पर स्वस्थ भारत प्रदान करने, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण दवाएं सुनिश्चित करने तथा 1.4 अरब लोगों को निवारक और उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का दायित्व है। उन्होंने कहा कि यही विकसित भारत 2047 की नींव बनेगा।

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पीके/केसी/बीयू/एसएस


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