स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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भारत ने चिकित्सा, नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को बढ़ाने पर जोर दिया; डब्ल्यूएचओ आरसी79 में ग्रामीण, जनजातीय और वंचित आबादी के लिए विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच की प्रतिबद्धता दोहराई


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने 79वें डब्‍ल्‍यूएचओ क्षेत्रीय समिति सत्र में मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक को संबोधित किया

2014 के बाद मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुने से अधिक; एमबीबीएस और पीजी सीटों में 175% से अधिक की वृद्धि: श्री जे.पी. नड्डा

डब्‍ल्‍यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र ने विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं में समानता पर दिली घोषणापत्र को मंजूरी दी

डब्ल्यूएचओ ने मातृ स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन में भारत के निरंतर अग्रणी भूमिका को मान्यता दी; दो डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया

प्रविष्टि तिथि: 08 SEP 2026 7:01PM by PIB Delhi

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, श्री जगत प्रकाश नड्डा, तिमोर-लेस्ते में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति (आरसी 79) के 79वें सत्र के दौरान आयोजित “स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन: विशेषज्ञ देखभाल में समानता” विषय पर  मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में शामिल हुए। गोलमेज बैठक में डब्‍ल्‍यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया।

गोलमेज बैठक में अपने संबोधन में श्री जे.पी. नड्डा ने जोर दिया कि विशेषज्ञ देखभाल तक समान पहुंच सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) करने का अभिन्न हिस्सा है और इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों की शिक्षा और प्रशिक्षण, उनकी नियुक्ति, उन्‍हें अपने पद पर कायम रखने और सतत नए पेशेवर कार्यों को समाहित करने वाले व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने और विशेष रूप से ग्रामीण, जनजातीय, कम सुविधा वाले और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए विशेषज्ञ स्‍वास्‍थ्‍य सेवा तक पहुंच बढ़ाने में भारत की महत्‍वपूर्ण प्रगति के बारे में बताया।

श्री नड्डा ने कहा कि भारत सरकार ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे का काफी विस्तार किया है, जिसके परिणामस्वरूप मेडिकल की स्नातक और स्नातकोत्तर सीटें काफी बढ़ गई हैं।

2014 से, देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 858 हो गई है, जो 121.71 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी अवधि के दौरान, एमबीबीएस की सीटें 51,348 से बढ़कर 1,42,464 हो गई है, जो 177.45 प्रतिशत की वृद्धि है, जबकि स्नातकोत्तर की सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 86,287 हो गई है, जो 176.69 प्रतिशत की वृद्धि है।

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मंत्री ने स्नातकोत्तर क्षमता के लक्षित विस्तार की भी चर्चा की। मेडिकल सीटें बढ़ाने की योजनाओं का सितंबर 2025 में विस्तार किया गया था, जिसका लक्ष्य 2028–29 तक 10,000 अतिरिक्त स्नातकोत्तर सीटें सृजित करना है। इसमें वंचित इलाकों और विशेषज्ञ मेडिकल आवश्‍यकता वाले क्षेत्रों जैसे आपातकालीन चिकित्‍सा, जेरियाट्रिक्स, मनोचिकित्‍सा और फैमिली मेडिसिन को प्राथमिकता दी गई है।

सुदृढ़ और विविध स्‍वास्‍थ्‍य सेवा से जुड़े कर्मचारियों के महत्व पर ज़ोर देते हुए, श्री नड्डा ने बताया कि मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के साथ 157 नए नर्सिंग कॉलेज खोले जा रहे हैं। इन संस्थानों से प्रति वर्ष लगभग 15,700 नर्सिंग स्‍नातक तैयार होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, उन ज़िलों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अच्‍छी तथा किफायती नर्सिंग शिक्षा तक पहुंच बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां इसकी कमी है।

उन्होंने यह भी बताया कि राष्‍ट्रीय नर्सिंग और प्रसूति विद्या (मिडवाइफरी) आयोग अधिनियम, 2023 के तहत 10 महत्‍वपूर्ण विशेषज्ञताओं में 'नर्स प्रैक्टिशनर प्रोग्राम' शुरू किए गए हैं।

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केंद्रीय मंत्री ने संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को बढ़ाने के भारत के प्रयासों के बारे में भी बताया। सरकार ने राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर आयोग अधिनियम, 2021 और 2024 में राष्ट्रीय आयोग की स्थापना के जरिए पांच वर्षों में 1,00,000 संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को तैयार करने की घोषणा की है।  यह आयोग 57 विविध संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशे को एक व्‍यवस्थित नियामक ढांचे के अंतर्गत लाता है।

श्री नड्डा ने जांच, शुरुआती पहचान और रेफरल सेवाओं सहित व्यापक प्राइमरी हेल्थकेयर (प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा) देने में 'आयुष्मान आरोग्य मंदिरों' की भूमिका पर ज़ोर दिया। 'आयुष्मान आरोग्य शिविर' वंचित समुदायों तक भी जांच और विशेषज्ञ परामर्श की सुविधाएं पहुंचाते हैं।

उन्होंने विशेषज्ञ और रेफरल सेवाएं प्रदान करने में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्रथम रेफरल इकाइयों की भूमिका की भी चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि भारत, मुश्किल इलाकों में विशेषज्ञों की उपलब्धता और उन्हें बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतन, मुश्किल इलाकों के लिए भत्ता, विशेषज्ञ सेवाओं की इन-सोर्सिंग, प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन और निश्चित-अवधि की नियुक्ति सहित कई लचीले तरीके अपना रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने जोर दिया कि भारत भौगोलिक बाधाओं को दूर करने और विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर रहा है। ईसंजीवनी और आभा-आधारित डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म विशेष रूप से दूरदराज और वंचित क्षेत्रों की आबादी के लिए टेलीपरामर्श, रेफरल और देखभाल की निरंतरता को सुगम बना रहे हैं।

श्री नड्डा ने बताया कि भारत का दृष्टिकोण एक बड़ा, अधिक विविधता वाला और भौगोलिक रूप से पूरी तरह फैला हुआ स्वास्थ्य कर्मियों तैयार करना है, जिसमें वंचित क्षेत्रों और जिन क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी है, उन पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ये उपाय विशेषज्ञता वाली सेवा में समानता को बढ़ावा देने के लिए टीम-आधारित और देखभाल की निरंतरता वाले नज़रिए को दर्शाते हैं।

आरसी79 का एक प्रमुख परिणाम डब्‍ल्‍यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों द्वारा “स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन पर दिली घोषणा: विशेषज्ञ देखभाल में समानता” को अपनाना था।

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इस घोषणापत्र के ज़रिए, सदस्य देशों ने स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, उनके असमान वितरण और विशेषज्ञ देखभाल की बढ़ती ज़रूरत को पूरा करने के लिए कई तरह के ठोस कदम उठाने का वादा किया है।

यह घोषणापत्र स्वास्थ्य कर्मियों की प्लानिंग, शिक्षा और फ़ंडिंग को मौजूदा और भविष्य की आबादी, बीमारियों के पैटर्न और स्‍वास्‍थ्‍य आपात स्थिति की तैयारी को ज़रूरतों के हिसाब से ढालने पर ज़ोर देता है। इसमें विशेषज्ञ स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों को विशेषरूप से ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों के लिए आकर्षित करने, भर्ती करने, तैनात करने, उन्‍हें अपने काम बनाए रखने और उनके काम को बेहतर बनाने के लिए नीतियां बनाने की भी बात कही गई है और इसके लिए डब्‍ल्‍यूएचओ के स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों की अंतरराष्ट्रीय भर्ती पर ग्लोबल कोड ऑफ़ प्रैक्टिस का पालन करने को कहा गया है।

इसके अलावा, यह घोषणापत्र मौजूदा कर्मचारियों का बेहतर उपयोग करने पर ज़ोर देता है, जिसमें काम का बंटवारा, मार्गदर्शन, रोटेशनल आउटरीच और विशेषज्ञों के दौरे वाले कार्यक्रम शामिल हैं। इसमें पारंपरिक, पूरक ( कॉम्प्लिमेंट्री) और एकीकृत (इंटीग्रेटेड) चिकित्‍सा  के योग्य और पंजीकृत डॉक्टरों के साथ सहयोग करना भी शामिल है।

सदस्य देशों ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों, विशेषज्ञ आउटरीच सेवाओं, टेलीपरामर्श नेटवर्क और समन्वित रेफरल अस्पतालों के माध्यम से एकीकृत रेफरल प्रणालियों और निरंतर देखभाल करने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है।

इस घोषणापत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता और आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यों को मजबूत करने का आह्वान किया गया है। इसके  साथ ही टेलीमेडिसिन, टेलीपरामर्श और एआई आधारित नैदानिक उपकरण सहित डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित और समान रूप से अपनाने में तेजी लाने पर बल दिया गया है, ताकि ग्रामीण, दूरस्थ और वंचित आबादी के लिए विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच को बढ़ाया जा सके।

यह नई तरह की सर्विस डिलीवरी मॉडल को भी बढ़ावा देता है, जिसमें मोबाइल और आउटरीच विशेषज्ञ टीमों तथा समुदाय-आधारित विशेषज्ञ देखभाल शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें पारंपरिक, कॉम्प्लिमेंट्री और इंटीग्रेटेड मेडिसिन सेवाओं को भी जोड़ा गया है।

सदस्य देशों ने कार्मिकों के विकास, मल्टी-डिसिप्लिनरी टीमों,समुदाय आधारित सेवाओं और बेहतर रेफरल सिस्टम के ज़रिए सभी स्तरों पर स्‍वास्‍थ्‍य प्रणालियों में गंभीर बीमारी में आराम देने वाली देखभाल को शामिल करने पर भी सहमति व्‍यक्‍त की।

घोषणापत्र में कैंसर, हृदय संबंधी देखभाल, आघात, मातृ और नवजात शिशु देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य, वृद्धावस्था देखभाल और पुनर्वास देखभाल सहित उच्च-प्राथमिकता वाली विशेषज्ञ सेवाओं के लिए राष्ट्रीय क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण में सहायता के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य कर्मियों सूचना प्रणालियों को मजबूत करने का भी आह्वान किया गया है।

क्षेत्रीय सहयोग के महत्व को स्वीकार करते हुए, सदस्य देशों ने सूचना के आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण, नैदानिक मार्गदर्शन और क्षेत्रीय सहयोग को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की, जिसमें स्वास्थ्य पेशेवर नियामकों और नीति-निर्माताओं के एक क्षेत्रीय नेटवर्क के माध्यम से सहयोग भी शामिल है।

दिली घोषणापत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने संबंधी 2023 की दिल्ली घोषणापत्र के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को दोहराया गया है और इस क्षेत्र में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय और महामारी विज्ञान संबंधी बदलाव, जटिल और दीर्घकालिक स्थितियों के बढ़ते बोझ तथा विशेषज्ञ स्वास्थ्य कर्मियों की लगातार कमी और असमान वितरण का समाधान किया गया है।

सदस्य देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से तकनीकी सहायता, क्षमता बढ़ाने, नीतिगत मार्गदर्शन और सुदृढ़ क्षेत्रीय सहयोग तंत्रों के माध्यम से प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन में सहायता करने का आह्वान किया।

भारत ने समान रूप से विशेषज्ञ देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करने, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ाने और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में सभी के लिए स्वास्थ्य के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में डिली घोषणापत्र को अपनाए जाने का स्वागत किया। भारत ने घोषणापत्र की प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्रवाई में बदलने के लिए सदस्य देशों और डब्‍ल्‍यूएचओ के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके अलावा, डब्‍ल्‍यूएचओ की क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में, सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश की निरंतर उपलब्धियों को मान्यता देते हुए भारत को डब्‍ल्‍यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के दो पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

भारत को पिछले दशक में माताओं और नवजात शिशुओं में टेटनस की क्षेत्रीय स्तर पर उन्‍मूलन की स्थिति बनाए रखने और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से गैर-संचारी रोगों से निपटने में अग्रणी भमिका के लिए मान्यता मिली है। इसमें उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीजों को प्रोटोकॉल-आधारित इलाज के दायरे में लाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करना भी शामिल है।

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यह सम्मान प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, बीमारी की रोकथाम, शुरुआती पहचान और ज़रूरी स्वास्थ्य समस्याओं के असरदार प्रबंधन को मज़बूत करने के प्रति भारत की लगातार प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ये सम्मान देश भर के उन फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों को समर्पित किए, जिनकी अटूट प्रतिबद्धता और समर्पित सेवा ने भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत करने और स्वास्थ्य के बेहतर नतीजों में योगदान देने में अहम भूमिका निभाई है।

भारत सरकार स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल स्वास्थ्य और स्वास्थ्य प्रणाली की मज़बूती में निवेश के ज़रिए सार्वभौमिक स्‍वास्‍थ्‍य  कवरेज को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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पीके/केसी/एमके


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