विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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टीडीबी-डीएसटी ने 3-डी प्रिंटेड रोगी-विशिष्ट बोन ग्राफ्ट के व्यावसायीकरण के लिए मेसर्स सेरामैट प्राइवेट लिमिटेड को वित्तीय सहायता दी

प्रविष्टि तिथि: 09 SEP 2026 11:53AM by PIB Delhi

भारत की उच्च स्तरीय चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षमताओं को बढ़ावा देने और आयातित स्वास्थ्य उत्पादों के स्वदेशी विकल्पों को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत  प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने महाराष्ट्र के पालघर स्थित मेसर्स सेरामाट प्राइवेट लिमिटेड को "कैल्शियम फॉस्फेट आधारित मानक और अनुकूलित रोगी-विशिष्ट ग्राफ्ट, डिजिटल लाइट प्रोसेसिंग तकनीक और एक्सट्रूज़न-आधारित उपकरण के माध्यम से 3डी प्रिंटिंग द्वारा" नामक परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस परियोजना का लक्ष्य स्वदेशी रूप से निर्मित बायोसिरेमिक सामग्री और 3डी प्रिंटिंग प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके उन्नत, रोगी-विशिष्ट बोन ग्राफ्ट का व्यावसायीकरण करना है।

 

 

सेरामाट प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना जैव-सिरेमिक्स और उन्नत सिरेमिक्स में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और व्यावसायीकरण पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आयात विकल्प तैयार करना है। कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो में हाइड्रोक्सीएपेटाइट, बीटा-ट्राइकैल्शियम फॉस्फेट, बाइफेसिक कैल्शियम फॉस्फेट और बायोएक्टिव ग्लास जैसे प्रौद्योगिकी रूप से उन्नत बायोमटेरियल शामिल हैं, जिनका उपयोग ऑर्थोपेडिक्स, ओरल केयर, कॉस्मेटिक्स और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है।

हाइड्रॉक्सीएपेटाइट और बीटा-ट्राइकैल्शियम फॉस्फेट कैल्शियम फॉस्फेट आधारित बायोमटेरियल हैं जो प्राकृतिक हड्डी की खनिज संरचना से अत्‍यधिक मिलते-जुलते हैं और इनका व्यापक रूप से बोन ग्राफ्ट तथा इम्प्लांट अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है। भारत में उपलब्ध ऐसे उन्नत बोन ग्राफ्ट उत्पादों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वर्तमान में आयात किया जाता है। हालांकि सेरामाट पारंपरिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बोन ग्राफ्ट और ग्रैन्यूल्स का भी निर्माण पहले से ही कर रहा है, लेकिन रोगियों की विशिष्‍ट शारीरिक संरचना के अनुरूप अनुकूलित ग्राफ्ट का उत्पादन एक अधिक जटिल विनिर्माण चुनौती प्रस्तुत करता है।

प्रस्तावित परियोजना स्वदेशी रूप से विनिर्मित बायोसिरेमिक कच्चे माल के साथ 3डी प्रिंटिंग को एकीकृत करके इस कमी को दूर करने का प्रयास करती है। कंपनी डिजिटल लाइट प्रोसेसिंग (डीएलपी) आधारित 3डी प्रिंटिंग और एक्सट्रूज़न आधारित 3डी प्रिंटिंग - दो पूरक दृष्टिकोणों के माध्यम से मानक और रोगी-विशिष्ट अनुकूलित ग्राफ्ट विकसित करने की योजना बना रही है। ये प्रौद्योगिकियां जटिल ज्यामितियों और विशिष्ट नैदानिक ​​आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित संरचनाओं के विकास में अधिक लचीलापन प्रदान करेंगी।

स्वदेशी कैल्शियम फॉस्फेट आधारित सामग्रियों का उन्नत एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के साथ उपयोग करने से सेरामेट की वर्तमान बायोमटेरियल क्षमताओं का विस्तार होने की उम्मीद है, जिससे वह पारंपरिक ग्राफ्ट उत्पादों से आगे बढ़कर अधिक परिष्कृत, डिजिटल रूप से डिज़ाइन किए गए और रोगी-विशिष्ट समाधानों तक पहुंच सकेगी। इस पहल से कंपनी को एकीकृत घरेलू विनिर्माण प्रणाली के माध्यम से बायोसिरेमिक और ऑर्थोबायोलॉजिकल उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला पेश करने में भी मदद मिलेगी।

यह परियोजना भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत, उन्नत विनिर्माण और स्वदेशी चिकित्सा प्रौद्योगिकी विकास पर बल देने के अनुरूप है। देश में रोगी-विशिष्ट ग्राफ्ट निर्माण क्षमताओं को विकसित करके, इस पहल से आयातित बायोसिरेमिक और ऑर्थोबायोलॉजिकल उत्पादों पर निर्भरता कम होने, घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने और वैश्विक बाजारों के लिए एक संभावित मंच तैयार होने की उम्मीद है।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत को प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से प्रौद्योगिकी विकासकर्ता बनने के लिए स्वास्थ्य सेवा के विशिष्ट और उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं की आवश्यकता है। 3डी प्रिंटिंग के साथ संयोजित उन्नत बायो-सिरेमिक्स का विकास आयातित उत्पादों पर निर्भरता कम करते हुए विशिष्‍ट चिकित्सा समाधानों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। टीडीबी उन प्रौद्योगिकियों की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है जो भारतीय नवाचार को विकास से वाणिज्यिक अनुप्रयोग तक ले जाती हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी चिकित्सा विनिर्माण में हमारी क्षमताओं को सुदृढ़ करती हैं।

 

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पीके/केसी/एसकेजे/वाईबी


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