सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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भारत को सशक्त बनाना, जीवन को बेहतर बनाना: देश भर में आयोजित 'सामाजिक अधिकारिता शिविरों' से 58,000 से ज़्यादा दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को लाभ


21 राज्यों में 76 स्थानों पर लगभग ₹68 करोड़ मूल्य के सहायक उपकरण वितरित, जिससे सम्मान, चलने-फिरने की आज़ादी और आत्मनिर्भर जीवन को बढ़ावा मिला

प्रविष्टि तिथि: 17 SEP 2026 5:04PM by PIB Delhi

भारत को समावेशी, सुलभ और सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में बड़ी राष्ट्रीय पहल के अंतर्गत, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के 'दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग' ने 'आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया' (एएलआईएमसीओ) के सहयोग से 17 सितंबर 2026 को 21 राज्यों में 76 स्थानों पर एक साथ 'सामाजिक अधिकारिता शिविर' आयोजित किए।

इन शिविरों के माध्यम से, 58,000 से ज़्यादा दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के आधार पर लगभग ₹68 करोड़ मूल्य के सहायक उपकरण निःशुल्क दिए गए। इस पहल का उद्देश्य चलने-फिरने की आज़ादी, आत्मनिर्भरता, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ाना है, ताकि लाभार्थी अपने परिवारों, समुदायों और देश की विकास यात्रा में ज़्यादा सक्रिय रूप से भाग ले सकें।

यह कार्यक्रम नई दिल्ली के लाल किले के लव-कुश रामलीला मैदान में आयोजित किया गया। इसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।

इस अवसर पर चांदनी चौक से सांसद श्री प्रवीण खंडेलवाल; राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री किशोर मकवाना; सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती मनमीत नंदा; और एएलआईएमसीओ के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री प्रवीण कुमार के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

नई दिल्ली के कार्यक्रम को देश भर में शिविर वाले स्थलों से वर्चुअली जोड़ा गया, जिससे अलग-अलग राज्यों के लाभार्थी, जन-प्रतिनिधि, ज़िला प्रशासन के अधिकारी और एएलआईएमसीओ के अधिकारी साझा राष्ट्रीय मंच पर एक साथ आ सके।  डॉ. वीरेंद्र कुमार ने सभा को संबोधित भी किया।  डॉ. वीरेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के विज़न को दोहराया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिक भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बने रहें। मंत्री ने कहा, "सहायक उपकरण सम्मान, आत्मविश्वास और स्वतंत्र जीवन जीने में मददगार होते हैं।"

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि सहायक उपकरण  केवल सहायता के साधन नहीं हैं, बल्कि ये लोगों की आवाजाही, आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और आज़ादी से जीने की क्षमता को बढ़ाने वाले सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने सरकार की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि कल्याणकारी योजनाएँ और सहायक तकनीकें ज़रूरतमंद लाभार्थियों तक हर हाल में पहुँचें।

सशक्तिकरण के व्यापक इकोसिस्टम का ज़िक्र करते हुए, डॉ. वीरेंद्र कुमार ने 'प्रधानमंत्री दिव्यांगजन-वयोश्री केंद्रों' (PMD-VKs) के विस्तार का ज़िक्र किया। देश भर में ऐसे 109 केंद्र काम कर रहे हैं, जिनसे एडीआईपी योजना और 'राष्ट्रीय वयोश्री योजना' (आरवीवाई) की सेवाएँ लाभार्थियों के और पास पहुँची हैं।

मंत्री ने 28 'सिंगल विंडो क्रॉस-डिसेबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर्स' (सीडीईआईसी) की स्थापना, राष्ट्रीय संस्थानों और सीआरसी के ज़रिए पुनर्वास सेवाओं, और ग्वालियर में 'दिव्यांगता खेल केंद्र' समेत दिव्यांग खिलाड़ियों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की भी जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सशक्तिकरण सामूहिक सामाजिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने राज्य सरकारों, ज़िला प्रशासन, नागरिक समाज संगठनों, एनजीओ, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं और कॉर्पोरेट जगत से ज़्यादा भागीदारी की अपील की। उन्होंने तारा संस्थान, नारायण सेवा संस्थान और लव-कुश रामलीला समिति जैसे संगठनों के योगदान की सराहना की।

मंत्री ने सांस्कृतिक और सामाजिक संगठनों से भी अपील की कि वे दिव्यांगजनों को अपनी कलात्मक और रचनात्मक प्रतिभा दिखाने के लिए और ज़्यादा मंच उपलब्ध कराएँ। 'दिव्य कला मेलों' का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों के बीच उद्यमिता, आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में इनकी भूमिका पर बल दिया।

श्री कुमार ने सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक जगहों और परिवहन प्रणालियों को बाधा-मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुलभता सुनिश्चित करना सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

इस अवसर पर एएलआईएमसीओ के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, श्री प्रवीण कुमार ने बताया कि कॉर्पोरेशन असिस्टिव डिवाइस की क्वालिटी, यूटिलिटी और डिज़ाइन पर लगातार ध्यान दे रहा है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि लाभार्थी को उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के हिसाब से सही समाधान मिलें।

श्री प्रवीण कुमार यह भी बताया कि एएलआईएमसीओ सेवा वितरण को आसान, ज़्यादा दक्ष, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित बनाने के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी को ज़्यादा अपना रहा है। उन्होंने कहा, “एएलआईएमसीओ दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी कोशिश है कि उत्कृष्ट सहायक उपकरण समय पर लाभार्थी तक पहुँचें और उनकी ज़िंदगी में स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और सम्मान को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दें।”

इस अवसर पर चांदनी चौक से सांसद, श्री प्रवीण खंडेलवाल ने दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए सरकार की कोशिशों की तारीफ़ की। उन्होंने  कल्याण पहल  को लाभार्थी के लिए टैंजिबल सपोर्ट में बदलने में उत्कृष्ट सहायक उपकरण की भूमिका पर ज़ोर दिया।

नई दिल्ली कैंप में, 463 लाभार्थियों, 446 वरिष्ठ नागरिकों और 17 दिव्यांगजनों को ₹34.96 लाख के 2,450 सहायक उपकरण दिए गए। पहले के आकलन के आधार पर, उपकरणों में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक, रोलेटर, एक्सेसिबल केन, हियरिंग एड, फोल्डेबल वॉकर, ट्राइपॉड, कमोड व्हीलचेयर, कमोड चेयर, नी ब्रेसेस, एलएस बेल्ट और अन्य सहायक समाधान शामिल थे।

देश भर में कैंप एएलआईएमसीओ ने संबंधित जिला प्रशासन के साथ मिलकर लगाए थे। प्री-असेसमेंट और टेस्टिंग कैंप लगाए गए ताकि लाभार्थियों की अलग-अलग ज़रूरतों को पहचाना जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि सही सहायक उपकरण दिए जा सकें।

इस अवसर पर, डॉ. वीरेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई दी और सभी संबंधित पक्षों से सेवा और देश सेवा की भावना को मज़बूत करने की अपील की। उन्होंने जागरूकता फैलाने और योग्य लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के योगदान को भी स्वीकार किया

देश भर में सामाजिक अधिकारिता शिविर सिर्फ़ सहायक उपकरण वितरित से कहीं ज़्यादा हैं। वे आखिरी छोर तक सम्मान, पहुंच, अवसर और आत्मनिर्भरता पहुंचाने की सामूहिक राष्ट्रीय कोशिश को दिखाते हैं, जिससे समावेशी, सुलभ, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का विज़न मज़बूत होता है।

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पीके/केसी/पीके


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