उप राष्ट्रपति सचिवालय
azadi ka amrit mahotsav

उप-राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने 38वें पुणे फेस्टिवल का उद्घाटन किया

देश को अपना इतिहास और अपने नायकों के बलिदान कभी नहीं भूलने चाहिए: उप-राष्ट्रपति

उप-राष्ट्रपति ने छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक, महात्मा फुले, सावित्रीबाई फुले और डॉ. बी. आर. अंबेडकर की विरासत को याद किया

हिंदू धर्म और सांस्कृतिक विरासत को बचाने में छत्रपति शिवाजी महाराज के योगदान को याद रखा जाना चाहिए: उप-राष्ट्रपति

उप-राष्ट्रपति ने श्री मोहन जोशी को 'संस्थापक सुरेश कलमाडी पुणे फेस्टिवल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' प्रदान किया

उप-राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के “विकास भी, विरासत भी” विजन को दोहराया और कहा- विकास और विरासत का संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए

प्रविष्टि तिथि: 18 SEP 2026 8:02PM by PIB Delhi

उप-राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पुणे के श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच में 38वें पुणे फेस्टिवल का उद्घाटन किया।

इस मौके पर महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा, उप-मुख्यमंत्री श्रीमती सुनेत्रा पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री चंद्रकांत पाटिल, संस्कृति मंत्री श्री आशीष शेलार, सांसद श्रीमती हेमा मालिनी, सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

उप-राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पुणे में 38वें पुणे फेस्टिवल का उद्घाटन किया।

उप-राष्ट्रपति ने कहा कि देश को कभी भी अपना इतिहास और अपने नायकों द्वारा दिए गए महान बलिदानों को नहीं भूलना चाहिए। छत्रपति शिवाजी महाराज की स्थायी विरासत को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म और भारत की सांस्कृतिक विरासत को बचाने में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी जोर दिया और बताया कि मराठा नेताओं की वजह से ही तंजावुर की सरस्वती महल लाइब्रेरी में तमिल साहित्य को सुरक्षित रखा गया है।

उन्होंने लोकमान्य तिलक, महात्मा ज्योतिबा फुले, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले और बाबासाहेब बी. आर. अंबेडकर को भी श्रद्धांजलि दी।

पुणे की बढ़ती वैश्विक पहचान की सराहना करते हुए, उप-राष्ट्रपति ने उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के प्रदर्शन की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक गणेश पूजा कार्यक्रम में लगभग 20 देशों के छात्रों ने हिस्सा लिया और इसे "वसुधैव कुटुंबकम" की भावना का एक सुंदर उदाहरण बताया।

उप-राष्ट्रपति ने कहा कि पुणे अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए शिक्षा, उद्योग, खेल, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल निर्माण, पर्यटन और बागवानी के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरा है। उन्होंने पुणे को "त्योहारों का शहर" बनाने में पुणे फेस्टिवल के अहम योगदान का उल्लेख किया और इसके संस्थापक स्वर्गीय श्री सुरेश कलमाडी की सोच की सराहना की।

युवा और उभरते कलाकारों पर फेस्टिवल के फोकस की सराहना करते हुए, उप-राष्ट्रपति ने 'उगवते तारे' और 'इंद्रधनु' जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने महिला कलाकारों को अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने के लिए मंच देने वाले 'महिला महोत्सव' की भी सराहना की।

श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि विकास और विरासत का संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "विकास भी, विरासत भी" के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिकता और तकनीकी प्रगति के लिए परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों की बलि देने की जरूरत नहीं है।

उप-राष्ट्रपति ने कहा कि 'विकसित भारत' के विजन में न सिर्फ आर्थिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है, बल्कि एक ऐसा समावेशी और न्यायपूर्ण समाज भी शामिल है जो अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि पुणे फेस्टिवल जैसे त्योहार सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, स्थानीय प्रतिभा और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दे सकते हैं।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने भगवान गणेश से निरंतर एकता, सद्भाव और सेवा के लिए प्रार्थना की और आशा व्यक्त की कि पुणे महोत्सव भारत की समग्र संस्कृति का जश्न मनाता रहेगा, युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करेगा, महिलाओं को सशक्त बनाएगा, पर्यटन को बढ़ावा देगा और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय सिनेमा और प्रदर्शन कला में उनके विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए, अनुभवी अभिनेता श्री मोहन जोशी को संस्थापक सुरेश कलमाड़ी पुणे फेस्टिवल लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी प्रदान किया।

*****

पीके/केसी/एमपी/एसएस


(रिलीज़ आईडी: 2312280) आगंतुक पटल : 246
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: Malayalam , English , Urdu , Marathi , Gujarati