नीति आयोग
"राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष तंत्र को मज़बूत करने" पर राष्ट्रीय कार्यशाला
नीति आयोग के राज्य सहायता मिशन (एसएसएम) के तहत एक पहल
प्रविष्टि तिथि:
09 SEP 2026 9:00AM by PIB Delhi
नीति आयोग ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और तेलंगाना सरकार के आयुष विभाग के सहयोग से 8 सितंबर 2026 को हैदराबाद, तेलंगाना में "राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष तंत्र को मज़बूत करने" पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का आयोजन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष तंत्र को मज़बूत करने के एजेंडे को आगे बढ़ाने, आपसी सीख को बढ़ावा देने और ऐसे अच्छे तौर-तरीकों की पहचान करने के लिए किया गया था, जिन्हें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी-अपनी परिस्थितियों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनाया और लागू किया जा सके।
इस एक दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि के तौर पर आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने किया। कार्यशाला की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने की। इस कार्यशाला में आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), आयुष मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, तेलंगाना सरकार और 29 अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में आयुष नियामक निकायों, अनुसंधान परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, मानकीकरण और गुणवत्ता-आश्वासन संगठनों, उद्योग संघों और अन्य राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के क्षेत्र और तकनीकी विशेषज्ञों को भी एक साथ लाया गया। यह कार्यशाला नीति-राज्य कार्यशाला श्रृंखला के हिस्से के रूप में आयोजित की गई थी, जो राज्य सहायता मिशन (एसएसएम) के तहत एक पहल है।
उद्घाटन सत्र के दौरान, नीति आयोग और आयुष मंत्रालय ने संयुक्त रूप से "विकसित भारत@2047 के लिए एक मजबूत आयुष तंत्र का निर्माण" विषय पर रूपरेखा पेश की। इस प्रस्तुति में विकसित भारत@2047 के आयुष-संबंधी लक्ष्यों को हासिल करने की मुख्य प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला गया और आयुष तंत्र को मजबूत करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अहम भूमिका पर जोर दिया गया।
इस कार्यशाला में तीन संवादात्मक राउंडटेबल सत्र शामिल थे, जिनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य और एकीकृत स्वास्थ्यसेवाओं में आयुष की भूमिका को मजबूत करना, आयुष शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करना और आयुष का वैश्वीकरण: विनियमन, गुणवत्ता, मानक, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इन सत्रों ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य संबंधित पक्षों को मुख्य चुनौतियों पर चर्चा करने, अनुभव और अच्छे तौर-तरीके साझा करने और आयुष तंत्र को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक रास्ते खोजने का मंच प्रदान किया। चर्चाओं में आयुष के विकास को गति देने के लिए संदर्भ-अनुकूल दृष्टिकोण, विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल और केंद्र-राज्य के बीच मजबूत सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया।
अपने समापन भाषण में, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने जोर दिया कि कार्यशाला की चर्चाएं केवल सिफारिशों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें ठोस, मापने योग्य और राज्य-विशिष्ट कार्यों में बदला जाना चाहिए।
इस प्रकार, यह कार्यशाला समन्वित कार्रवाई, आपसी सीख और केंद्र-राज्य साझेदारी के माध्यम से आयुष तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी। इसका मुख्य उद्देश्य आयुष को भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का एक अभिन्न अंग बनाना और 'विकसित भारत@2047' के दृष्टिकोण में सार्थक योगदान देना था।
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पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2312312)
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