ग्रामीण विकास मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुंबई में बैंकों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे
प्रविष्टि तिथि:
02 SEP 2026 4:42PM by PIB Delhi
ग्रामीण विकास मंत्रालय दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-नारलम) को लागू कर रहा है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में समुदाय-आधारित संस्थाओं के निर्माण और उन्हें टिकाऊ आजीविकाओं से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। पिछले डेढ़ दशक में मिशन ने 93 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उनके संघों में 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को संगठित किया है। बैंकिंग क्षेत्र इस यात्रा में एक प्रमुख भागीदार रहा है। इसने एसएचजी को 13.67 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संचयी ऋण वितरित किया है। इसे लगातार उच्च पुनर्भुगतान अनुशासन का समर्थन प्राप्त है।
संस्थागत ऋण के मजबूत प्रवाह ने बड़ी संख्या में एसएचजी सदस्यों को आजीविका उद्यम स्थापित करने और उनका विस्तार करने में सक्षम बनाया है। इससे 3 करोड़ 46 लाख महिलाएं लखपति दीदी के रूप में उभरी हैं। जैसे-जैसे इनमें से कई उद्यम विकास के चरण में प्रवेश कर रहे हैं और नए उद्यम लगातार उभर रहे हैं। मिशन की अगली रणनीतिक प्राथमिकता महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को पोषित करना, वित्त तक उनकी पहुंच को मजबूत करना और टिकाऊ ग्रामीण व्यवसायों में उनका समर्थन करना है।
एसएचजी-बैंक लिंकेज और व्यक्तिगत उद्यम वित्तपोषण पर बैंकों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक 3 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित की जा रही है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान कर रहे हैं। ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान और महाराष्ट्र सरकार के माननीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री भी उपस्थित रहेंगे।
बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक, वित्तीय सेवा विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक, नाबार्ड, पीएफआरडीए, केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों और अन्य प्रमुख हितधारक संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समीक्षा से पहले, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री स्वयं सहायता समूह की दीदियों के साथ विस्तृत संवाद करेंगे। इनमें से कई लखपति दीदियां स्थापित ग्रामीण उद्यम चला रही हैं।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और शीर्ष सहकारी बैंकों के अध्यक्ष और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब तक हुई प्रगति और आगे की राह पर अपने विचार साझा करेंगे। चर्चाओं में अन्य बातों के साथ-साथ, व्यक्तिगत उद्यम ऋण पोर्टफोलियो को दोगुना करना, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को वितरित की जाने वाली औसत ऋण राशि बढ़ाना, ऋण स्वीकृति और वितरण में लगने वाले समय को कम करना, कठिन क्षेत्रों सहित शेष एसएचजी को ऋण से जोड़ने की संतृप्ति के लिए रणनीतियाँ, तथा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के स्तर पर सहकारी ऋण संरचना की भूमिका को मजबूत करना शामिल होगा।
विचार-विमर्श से वित्तीय समावेशन 2.0 के दृष्टिकोण के कार्यान्वयन की दिशा में भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य एसएचजी के लिए समय पर और पर्याप्त ऋण सुनिश्चित करना, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए समर्पित वित्तपोषण उपलब्ध कराना और ग्रामीण भारत में उच्च-स्तरीय वित्तीय सेवाओं तक विस्तारित पहुँच सुनिश्चित करना है।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2312315)
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