कोयला मंत्रालय
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एनएलसी इंडिया: ऊर्जा सुरक्षा एवं स्थिरता के माध्यम से राष्ट्र के विकास को बढ़ावा

प्रविष्टि तिथि: 19 SEP 2026 6:40PM by PIB Delhi

जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशआ में आगे बढ़ रहा है, विश्वसनीय और सतत ऊर्जा राष्ट्रीय विकास की कुंजी है। बिना कोई समझौता किए बेसलोड उर्जा और महत्वाकांक्षी कार्बन न्यूनीकरण को संतुलित करते हुए, कोयला मंत्रालय के अंतर्गत एक नवरत्न उद्यम एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल), जिसकी वर्तमान में 8,405 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता और 59.10 एमटीपीए खनन क्षमता है, अपनी पहचान को पुनर्परिभाषित करते हुए तेजी से एक एकीकृत, भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा पावरहाउस के रूप में विकसित हो रहा है, जो भारत के पंचामृत जलवायु लक्ष्यों को समर्थन करता है।

ऊर्जा सुरक्षा: आर्थिक विकास के लिए भरोसेमंद ऊर्जा बहुत आवश्यक है, और कोयला व लिग्नाइट देश की बेसलोड ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने का मुख्य आधार बने हुए हैं। भारत की विद्युत आवश्यकताओं को सतत रूप से पूरा करने के लिए, एनएलसीआईएल ज़िम्मेदारी के साथा अपने खनन के दायरे को बढ़ा रहा है और साथ ही विद्युत उत्पादन को आधुनिक बना रहा है:

  • क्षमता विस्तार: 2030 तक कुल खनन क्षमता को 59.1 एमटीपीए से बढ़ाकर 104.35 एमटीपीए करना, और आयात पर निर्भरता से बचने के लिए 2047 तक 115.85 एमटीपीए का लक्ष्य निर्धारित करना।
  • उच्च-दक्षता, निम्न-उत्सर्जन (एचईएलई) उत्पादन: घाटमपुर (1,980 मेगावाट) में सुपरक्रिटिकल इकाइयों और तालाबीरा (2,400 मेगावाट) तथा मच्छाकाटा (4,000 मेगावाट) में अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल पिट-हेड ताप विद्युत परियोजनाओं के साथ स्वच्छतर ताप विद्युत की ओर परिवर्तन, जिससे विशिष्ट कोयला खपत एवं उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
  • एफएमसी द्वारा लॉजिस्टिकल क्षमता में सुधार: सड़क परिवहन से होने वाले उत्सर्जन एवं तेल पर निर्भरता की समाप्ति के लिए पचवाड़ा दक्षिण, उत्तरी धाडू (पश्चिमी), तलाबीरा, मछकट्टा और न्यू पात्रापारा (दक्षिण) में 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' (एफएमसी) रेल कॉरिडोर पर 63.5 एमटीपीए क्षमता शुरू करना, जिससे लॉजिस्टिकल क्षमता बेहतर होगी।

नवीकरणीय ऊर्जा: एनआईएलसीआईएल अपनी समर्पित हरित शाखा, एनआईएलसीआईएल रिन्यूएबल्स लिमिटेड (एनआईआरएल) के माध्यम से भारत की स्वच्छ ऊर्जा को सक्रिय रूप से विकसित कर रहा है:

  • 2030 तक 10 गीगावाट: अपने परिचालनात्मक नवीकरणीय पोर्टफोलियो को ~1.8 गीगावाट से बढ़ाकर 2030 तक 10 गीगावाट से अधिक करना (2047 तक 32.7 गीगावाट तक विस्तार), जिससे निर्धारित समय से काफी पहले अपने उत्पादन में 50 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण प्राप्त करना।
  • बैटरी उर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस): विकासाधीन परियोजनाओं में तमिलनाडु में 250 मेगावाट / 500 मेगावाट-घंटा, राजस्थान में एसईसीआई के साथ 300 मेगावाट / 1,800 मेगावाट-घंटा, गुजरात में जीयूवीएनएल के साथ 275 मेगावाट / 550 मेगावाट-घंटा और डब्ल्यूएसईडीएल के साथ 50 मेगावाट / 200 मेगावाट-घंटा शामिल हैं।
  • भंडारण परियोजनाओं (पीएसपी) को बढ़ावा: नवीकरणीय ग्रिड की अनियमितता को संतुलित करने के लिए तमिलनाडु और ओडिशा में बड़े पैमाने की भंडारण परिसंपत्तियों को लक्षित करना।

अन्य विविधीकरण परियोजनाएं: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों से भारत को सुरक्षित रखने और कम-कार्बन वाले औद्योगीकरण की प्राप्ति के लिए एनएलसीआईएल निम्नलिखित कदम उठा रहा है:

  • हरित हाइड्रोजन और सीसीएस: नेवेली में 4 मेगावाट का सौर-ऊर्जा चालित पीईएम इलेक्ट्रोलाइज़र ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का पायलट निर्माण करना और उन्नत कार्बन कैप्चर प्रणाली पर आईआईटी मद्रास के साथ साझेदारी करना।
  • रणनीतिक खनिज आत्मनिर्भरता: फिलहाल, एनएलसीआईएल ने छत्तीसगढ़ में फॉस्फोराइट और चूना पत्थर तथा तेलंगाना में वैनेडियम एवं टाइटेनियम के लिए घरेलू संयुक्त अन्वेषण लाइसेंस प्राप्त किया है। साथ ही, केएबीआईएल के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संभावनाओं की तलाश की जा रही हैं।

आत्मनिर्भर भारत के साथ जुड़कर, एनएलसी इंडिया लिमिटेड आज देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है और साथ ही भविष्य के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाले राजस्व के व्यवसायों/पहल के लिए एक मजबूत नींव भी तैयार कर रही है।

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पीके/केसी/आरटी/एके


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