संस्कृति मंत्रालय
'सेवा ही संस्कृति' पहल ने स्वच्छता, सांस्कृतिक जागरूकता और जन-भागीदारी का संदेश देशभर में पहुंचाया; 2 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया
प्रविष्टि तिथि:
28 SEP 2026 4:54PM by PIB Delhi
संस्कृति मंत्रालय ने 'सेवा संकल्प अभियान 2026' के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में 17 से 24 सितंबर, 2026 तक देशव्यापी 'सेवा ही संस्कृति' पहल का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य सेवा भावना, स्वच्छता, सांस्कृतिक जागरूकता और जन-भागीदारी की भावना को बढ़ावा देना था।
'सेवा ही संस्कृति' अभियान के अंतर्गत 'विरासत और विकास' और 'स्वच्छता की एक नई कहानी' जैसे विषयों पर आधारित कई प्रकार की गतिविधियों आयोजित की गईं। इनमें नुक्कड़ नाटक, कला प्रस्तुतियां, रंगोली और सामूहिक गायन शामिल थे। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों तक स्वच्छता और सामाजिक जिममेदारी का संदेश पहुंचाया गया। साथ ही, भारत की संस्कृति, मूल्यों, नैतिक सिद्धांतों तथा देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व के बारे में भी जागरूकता पैदा की गई।
इस पहल को संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के साथ-साथ देश के सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों का सहयोग प्राप्त हुआ। इनमें उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनजेडसीसी), उत्तर पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनईजेडसीसी), पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (ईजेडसीसी), पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (डब्ल्यूजेडसीसी), दक्षिणी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एसजेडसीसी), दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एससीजेडसीसी) और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) शामिल हैं।
इस अभियान के दौरान, देशभर के विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाटक, रंगोली बनाना, स्वच्छता अभियान और 'वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन सहित 270 से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों में 2 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।
'सेवा ही संस्कृति' पहल में जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और सांस्कृतिक स्थलों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया गया है। लोगों को सरकारी कार्यालय परिसरों, सांस्कृतिक स्थलों और उनके आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ विभिन्न विरासत स्थलों पर आयोजित स्वच्छता अभियानों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक उपलब्धियों, विभिन्न पहलों और उनके प्रभाव को दर्शाने वाली कहानियां सीधे लोगों के समक्ष प्रस्तुत की गईं। कला, संस्कृति और जन-भागीदारी को एक साथ लाकर इस पहल का उद्देश्य सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना तथा विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों में सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना था।
इन कार्यक्रमों का आयोजन सरकारी कार्यालय परिसरों, विद्यालयों और महाविद्यालयों, पार्कों, बाजारों, मंदिरों, घाटों तथा विभिन्न अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया गया।
'सेवा ही संस्कृति' पहल ने सेवा, स्वच्छता और संस्कृति के मूल्यों को एक साथ जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत की देखभाल करना और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना भी राष्ट्र सेवा के महत्वपूर्ण रूप हैं।







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पीके/केसी/आरटी/आईएम/जीआरएस
(रिलीज़ आईडी: 2316124)
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