श्रम और रोजगार मंत्रालय
‘श्रम संवाद’ पहल के तहत नई दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एस्टेट में श्रम संहिताओं पर जिला-स्तरीय क्षमता विकास एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया
प्रविष्टि तिथि:
29 SEP 2026 8:17PM by PIB Delhi
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने फिक्की तथा शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के साथ मिलकर नई दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एस्टेट में श्रम संहिताओं पर “श्रम संवाद” – जिला-स्तरीय क्षमता विकास एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नियोक्ताओं एवं उद्योग जगत से जुड़े हितधारकों के बीच 21 नवंबर 2025 को लागू हुए श्रम संहिताओं और 8 मई 2026 को अधिसूचित किए गए केन्द्रीय नियमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नए ढांचे के तहत मुख्य प्रावधानों तथा अनुपालन संबंधी जरूरतों पर प्रकाश डालना भी था। इस कार्यक्रम में नियोक्ताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, एचआर से संबंधित पेशेवरों, विधि विशेषज्ञों, वित्त विशेषज्ञों और श्रम एवं रोजगार इकोसिस्टम से जुड़े अन्य अहम हितधारकों सहित विविध क्षेत्रों से 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।

इस कार्यक्रम में कई तकनीकी सत्र शामिल थे। इन सत्रों का उद्देश्य प्रतिभागियों को श्रम संहिताओं, नियोक्ता की जिम्मेदारियों और भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पहलों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
उद्घाटन सत्र को श्रम और रोजगार मंत्रालय के निदेशक डॉ. पी. के. जेना और शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की एग्जीक्यूटिव कमिटी की सदस्य एवं मैनेजिंग पार्टनर सुश्री पल्लवी श्रॉफ ने संबोधित किया। शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर सुश्री पूजा रामचंदानी ने सत्र का संचालन किया।

पहले तकनीकी सत्र को डॉ. पी.के. जेना ने संबोधित किया। इसमें उन्होंने श्रम संहिताओं, उनके उद्देश्यों और नए विधायी ढांचे के तहत किए गए बड़े सुधारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सत्र से प्रतिभागियों को नियोक्ताओं एवं श्रमिकों, दोनों के लिए श्रम कानूनों में किए गए सुधारों के व्यापक विजन और महत्व को समझने में मदद मिली।
दूसरे सत्र का आयोजन श्रम और रोजगार मंत्रालय के पीएमयू में श्रम प्रवर्तन अधिकारी मो. नदीम ने किया। इसमें श्रम संहिताओं के तहत नियोक्ताओं के लिए जरूरी नियमों के अनुपालन पर ध्यान केन्द्रित किया गया। इस सत्र में वैधानिक दायित्वों और नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई ताकि प्रतिभागी नए ढांचे के कामकाज के पहलुओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

तीसरा सत्र ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) पर केन्द्रित था और इसकी अध्यक्षता कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त -I, श्री मनीष कुमार सिंह ने की। इसमें प्रतिभागियों को इस योजना के उद्देश्यों, पात्रता की शर्तों और रोजगार सृजन में सहायता करने वाले इसके लाभों के बारे में जानकारी दी गई।
चौथे सत्र में ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएम-एसवाईएम) योजना’ के बारे में जानकारी दी गई। इसे श्रम और रोजगार मंत्रालय के डीजीएलडब्ल्यू में कल्याण प्रशासक श्री संदीप चौरसिया ने संचालित किया। इस सत्र में इस योजना की मुख्य विशेषताओं और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
इस कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने वक्ताओं से सीधे बातचीत की और श्रम संहिताओं, नियोक्ता संबंधी अनुपालनों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विभिन्न पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा।

यह कार्यक्रम क्षमता विकास, हितधारकों की भागीदारी और जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इसने श्रम संहिताओं की गहरी समझ विकसित करने और नियोक्ताओं एवं उद्योग जगत के हितधारकों की जानकारीपूर्ण भागीदारी के जरिए उनके प्रभावी कार्यान्वयन में सहयोग किया।
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पीके/केसी/आरटी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2316781)
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