इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
यूआईडीएआई ने विश्वसनीय डिजिटल पहचान और सुशासन को और बढ़ावा देने के लिए 'आधार संवाद कोलकाता' में पांच नई पहल शुरू की
माननीय राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने कहा कि आधार भारत की विकास यात्रा का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, उन्होंने लोगों का जीवन आसान बनाने में आधार की भूमिका पर ज़ोर दिया
आगामी कार्य योजना पर चर्चा करने के लिए 600 से ज़्यादा वरिष्ठ नीति-निर्माता, उद्योग जगत के लोग और नवोन्मेशक एक साथ आए
प्रविष्टि तिथि:
29 SEP 2026 8:24PM by PIB Delhi
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण- यूआईडीएआई ने आज सभी भागीदारों के साथ एक दिवसीय हितधारक सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें सेवा वितरण को और बेहतर बनाने, आधार के उपयोग से सुविधा बढ़ाने और लोगों के व्यापक हित में योगदान देने के लिए विचार-विमर्श किया गया और विचार साझा किए गए।
17वें आधार दिवस के अवसर पर कोलकाता में आयोजित ‘आधार संवाद’ में वरिष्ठ नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता, तकनीकी विशेषज्ञ और पेशेवरों सहित 600 से अधिक हितधारक एकत्र हुए।
इस कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह सम्मेलन देश के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान अवसंरचना के रूप में आधार के निरंतर विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
इस अवसर पर श्री प्रसाद ने कहा कि “आधार एक बड़ी सफलता की कहानी है। भारत की विकास गाथा में आधार एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है।”
उन्होने कहा कि “सेवा वितरण को बेहतर बनाने, बड़े पैमाने पर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने में आधार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है कि सरकारी लाभ सही लोगों तक पहुंचें। हमारे डिजिटल शासन की आधारशिला के रूप में, आधार ने सरकारी सेवाओं तक हमारी पहुंच के तरीके में क्रांति ला दी है, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता सुनिश्चित हुई है।” श्री प्रसाद ने उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आधार पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए किस प्रकार लाभकारी होने जा रहा है और सरकारी पहलों के लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचेंगे।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण- यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सौरभ विजय ने कहा कि यूआईडीएआई और आधार इकोसिस्टम की हर कार्रवाई के केंद्र में निवासी लगातार बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि 17वें आधार दिवस पर उत्पादों का लॉन्च इसी निवासी-केंद्रित दृष्टिकोण के अनुरूप है।
श्री विजय ने कहा, “पूरे दिन हमने अपने हितधारकों के साथ आधार के उपयोग का विस्तार करने, सुशासन के लिए प्रमाणीकरण पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने, नामांकन और अपडेट इकोसिस्टम तथा उभरती प्रौद्योगिकियों की चुनौतियों और अवसरों जैसे मुद्दों पर चर्चा की।”
यूआईडीएआई के उप महानिदेशक विवेक सी वर्मा ने अपने स्वागत संबोधन में कहा, “आज यह स्वीकार करने का अवसर भी है कि तेजी से बदलते डिजिटल भारत की बदलती जरूरतों के साथ आधार लगातार विकसित हो रहा है। नई प्रौद्योगिकियां, सेवा वितरण के नए रूप और गोपनीयता, सुरक्षा तथा निवासी सुविधा पर अधिक जोर इसके अगले अध्याय को आकार दे रहे हैं।”
इस अवसर पर निवासी सुविधा बढ़ाने, सुरक्षा मजबूत करने, सुशासन को सक्षम बनाने और डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण के लिए आधार इकोसिस्टम को तैयार करने के उद्देश्य से पांच नई पहलों का शुभारंभ किया गया।
शुरु की गई इन पहलों में अहम शुरुआत है- इलेक्ट्रॉनिक पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (ईपीडीएस) के लिए 'फेस ऑथेंटिकेशन' (चेहरे से पहचान), जिसे यूआईडीएआई, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने मिलकर शुरू किया। सहमति पर आधारित, बिना छुए (कॉन्टैक्टलेस) पहचान की यह सुविधा लाभार्थियों को पहचान साबित करने का एक और तरीका देती है, खासकर उन स्थितियों में जहाँ फिंगर प्रिंट से पहचान करना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने ईपीडीएस सिस्टम में फेस ऑथेंटिकेशन को शामिल करने में मदद करती है।
यूआईडीएआई ने SWIK पोर्टल 2.0 भी लॉन्च किया, जो 'गुड गवर्नेंस के लिए आधार ऑथेंटिकेशन' फ्रेमवर्क के तहत आधार ऑथेंटिकेशन की मंज़ूरी लेने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। योग्य गैर-सरकारी संस्थाएँ अब मंज़ूरी-प्राप्त इस्तेमाल के मामलों के लिए सीधे पोर्टल के ज़रिए संबंधित मंत्रालय और विभाग को प्रस्ताव भेज सकती हैं, जिससे मंज़ूरी की प्रक्रिया व्यवस्थित और समन्वित हो जाती है। यह पोर्टल है - https://swik.meity.gov.in/
आज शुरू की गई सब-एयूए/सब- केयूए (लाइट) फ्रेमवर्क, कम वॉल्यूम की ज़रूरतों वाली सरकारी और योग्य गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा आधार ऑथेंटिकेशन को बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद करेगा। योग्य संस्थाएँ मौजूदा एयूए/केयूए के ऑथेंटिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे उन्हें अपना ऑथेंटिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए बिना, रियल-टाइम में आसानी से और तेज़ी से सिस्टम से जुड़ने (ऑनबोर्डिंग) में मदद मिलती है, साथ ही वे यूआईडीएआई की सुरक्षा, गोपनीयता और नियमों की ज़रूरतों का भी पालन करती हैं।
यूआईडीएआई ने एक नया 'टोकन मैनेजमेंट सिस्टम' भी पेश किया, जिससे लोगों के लिए जहाँ भी लागू हो, सेवाओं के लिए यूआईडीएआई के राज्य और क्षेत्रीय कार्यालयों में जाना आसान हो जाएगा।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की नई वेबसाइट :
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने यूआईडीएआई की नई वेबसाइट का शुभारंभ किया, इस वेबसाइट पर रियल-टाइम में जानकारी मिलेगी।
लोग चार मुख्य वजहों से यूआईडीएआई आते हैं: आधार को समझने, किसी सर्विस का इस्तेमाल करने, कोई डॉक्यूमेंट खोजने या मदद पाने के लिए। नई डिज़ाइन वाली वेबसाइट इन सभी कामों को एक साफ़-सुथरे और आसान संरचना में लाती है।
वेबसाइट को आधार गाइडलाइंस के हिसाब से डिज़ाइन किया गया है, जिससे यूआईडीएआई वेबसाइट, माई आधार पोर्टल और आधार ऐप पर एक जैसी विज़ुअल पहचान बनी रहे।
नई वेबसाइट के डिज़ाइन में 'एक्सेसिबिलिटी' (सभी के लिए आसानी से इस्तेमाल करने की सुविधा) का खास ध्यान रखा गया है। इसमें स्क्रीन-रीडर कम्पैटिबिलिटी, फॉन्ट साइज़ बदलने की सुविधा, बेहतर कलर कॉन्ट्रास्ट, कीबोर्ड नेविगेशन और एक्सेसिबिलिटी से जुड़े दूसरे सुधार शामिल हैं। इससे दिव्यांग लोगों समेत सभी नागरिकों के लिए आधार से जुड़ी जानकारी और सेवाओं तक पहुँचना आसान और समावेशी हो जाएगा।
भाषिणी इंटीग्रेशन के साथ, यह वेबसाइट अंग्रेज़ी और हिंदी समेत 13 भाषाओं को सपोर्ट करती है। हम जल्द ही इस वेबसाइट को 23 भाषाओं में उपलब्ध कराने की योजना है, मौजूदा समय में यह 13 भाषाओं में उपलब्ध है।
नई वेबसाइट में यूआईडीएआई करियर पोर्टल भी शुरू किया गया है, जिससे प्रतिनियुक्ति के अवसरों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है और इच्छुक आवेदकों के लिए एक आसान और पारदर्शी प्रक्रिया मिलती है।
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पीके/केसी/आरटी/जेएस
(रिलीज़ आईडी: 2316794)
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