जल शक्ति मंत्रालय
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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने अपने आवास पर पूरे भारत से आए जल संरक्षण योद्धाओं की मेजबानी की


जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने नदी के संरक्षण, जल संरक्षण और सामुदायिक लामबंदी की प्रेरक कहानियां साझा कीं

श्री पाटिल ने लक्ष्य बनाकर की गई कार्यवाही, मापने योग्य परिणामों और व्यापक जन भागीदारी का आह्वान किया

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की सचिव श्रीमती अर्चना वर्मा ने जल संबंधी सामूहिक कार्यवाही पर समुदायों को संगठित करने में भूमिका की सराहना की

प्रविष्टि तिथि: 01 OCT 2026 6:42PM by PIB Delhi

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने आज देश के कई हिस्सों से आए जल संरक्षण योद्धाओं और नदी संरक्षण योद्धाओं के साथ बातचीत की, जो जल संरक्षण, नदी एवं जल निकायों के संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर पहल कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की ओर से नमामि गंगा अभियान के अंतर्गत आयोजित इस संवाद ने इन जमीनी स्तर के योद्धाओं को अपने अनुभव साझा करने, एक-दूसरे से सीखने और सफल सामुदायिक नेतृत्व वाले मॉडलों को मजबूत करने और पूरे देश में लागू करने के तरीकों पर चर्चा करने का मंच प्रदान किया।

प्रतिभागियों ने नदियों और तालाबों के जीर्णोद्धार, श्रमदान, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहन देने, जल निकायों के पास से प्लास्टिक और दूसरा कचरा हटाने, वृक्षारोपण अभियान चलाने और महिलाओं, युवाओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों को संगठित करने के अपने प्रत्यक्ष अनुभव साझा किए। उनकी कहानियों ने इस विषय पर प्रकाश डाला कि कैसे व्यक्तिगत पहल, सामूहिक कार्यवाही और सामुदायिक भागीदारी के साथ मिलकर, जमीनी स्तर पर स्पष्ट और स्थायी सुधार ला सकती है।

अपने कार्यों को साझा करने वालों में रामवीर तंवर भी शामिल थे, जिन्हें 'भारत का तालाब प्रेमी' के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 100 से अधिक तालाबों के पुनरुद्धार और 10 छोटे शहरी वनों की स्थापना के बारे में बताया। बिहार की कामिनी कुमारी ने बाया नदी के किनारे एक ही दिन में 500 महिलाओं को संगठित करके जल से स्वतः भरने वाले 500 गड्ढे बनवाने की अपनी पहल पर प्रकाश डाला, जिससे जल संरक्षण को भूजल पुनर्भरण, संपोषित कृषि और महिलाओं के लिए आजीविका के मौकों से जोड़ा जा सके।

सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें लोकप्रिय रूप से ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, ने मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के बियाओरा में प्रदूषित अजनार नदी की सफाई के अपने सफर के बारे में बताया। बीएससी के इस युवा छात्र ने 26 जनवरी 2026 को यह प्रयास शुरू किया और अपनी पहल पर ही नदी से प्लास्टिक, खरपतवार, कीचड़ और अन्य कचरा हटाने का काम अपने हाथों से किया। उनका यह काम, जो कि एक स्थानीय प्रयास के तौर पर शुरू हुआ था, ने लोगों का बड़े स्तर पर ध्यान आकर्षित किया और स्थानीय जल निकायों की सफाई और पुनर्स्थापन में अधिक भागीदारी को प्रेरित किया।

बेंगलुरु के आनंद मल्लिगावड़ ने 33 झीलों के पुनरुद्धार और एक लाख से अधिक देशी वृक्षारोपण के अपने कार्य के बारे में बताया। उत्तराखंड के जगदीश सिंह नेगी ने जल संरक्षण, वन पुनर्स्थापन और प्लास्टिक के कचरे को पर्यावरण-अनुकूल ईंटों में बदलने के अपने कार्य के बारे में जानकारी दी। शुभम कुमार ने नदी स्वच्छता में युवाओं और स्वयंसेवकों की भूमिका व गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारों से 2.47 लाख किलोग्राम से अधिक कचरा हटाने के लिए समुदायों को संगठित करने के अपने प्रयासों पर प्रकाश डाला।

इस संवाद में स्वच्छ नदियों और घाटों को बनाए रखने में जल स्वयंसेवकों और सामुदायिक समूहों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। उत्तर प्रदेश के आकाश यादव ने बताया कि कैसे उनके 15 सदस्यीय स्वयंसेवक समूह ने गंगा के चार घाटों के पुनरुद्धार और एक टन से अधिक प्लास्टिक कचरे को हटाने में योगदान दिया है। कानपुर की डॉ. संजीवनी शर्मा ने गंगा संरक्षण अभियान के लिए 900 से अधिक स्वयंसेवकों को जुटाने और 120 मीट्रिक टन से अधिक कचरा हटाने के साथ-साथ प्लास्टिक के पुनर्चक्रण, बेकार सामग्रियों के दोबारा इस्तेमाल और सामुदायिक नेतृत्व वाले कचरा प्रबंधन के माध्यम से महिलाओं के लिए आजीविका के अवसरों को प्रोत्साहन देने के बारे में बताया।

अन्य जल योद्धाओं में सुश्री कुसुम गिल्डियाल, श्री जगदीश नेगी, सुश्री रमा तिवारी, डॉ. सुमन पाण्डेय, सुश्री कुमारी सुनीता सिंह, श्री संजय कुमार सिंह, श्री अजय कुमार तिवारी, श्री नीतीश कुमार सिंह, श्री कमलेश भाई शास्त्री, श्री संदीप चौधरी, सुश्री सिरकुंवर, सुश्री फूलबती और श्री विवेक भट शामिल थे। इन योद्धाओं के कार्यों की माननीय जल शक्ति मंत्री ने बहुत सराहना की।

सभा को संबोधित करते हुए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की सचिव श्रीमती अर्चना वर्मा ने जल संरक्षण और स्वच्छता के संदेश को सरकारी कार्यक्रमों से परे समुदायों तक पहुंचाने में जल योद्धाओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने नदियों, तालाबों और अन्य जल निकायों के नजदीक के लोगों को एकजुट करने और सामूहिक कार्यवाही को संगठित करने की उनकी क्षमता की प्रशंसा की और इस बिंदु पर जोर दिया कि जल संरक्षण और नदी संरक्षण प्रयासों को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखने के लिए इस तरह की नागरिक-नेतृत्व वाली भागीदारी आवश्यक है।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री सी. आर. पाटिल ने सभी को उनकी प्रतिबद्धता के लिए उन्हें बधाई दी और कहा कि उनके अनुभवों को सीधे सुनना देश भर में चल रहे जमीनी स्तर के कार्यों के पैमाने, विविधता और प्रभाव को समझने का एक अवसर था। उन्होंने स्वीकार किया कि उनमें से कई ने कठिन स्थानीय परिस्थितियों में काम किया है और फिर भी जल व पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को एकजुट करने में सफल रहे हैं। श्री पाटिल ने व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में जल संरक्षण जन भागीदारी पर आधारित एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में बदल गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी की ओर से पानी की हर बूंद के संरक्षण पर लगातार जोर देने से देश भर के नागरिकों और समुदायों को जल संरक्षण की जिम्मेदारी लेने की प्रेरणा मिली है और जल योद्धाओं का कार्य सामूहिक कार्यवाही के इसी भाव को दर्शाता है।

मंत्री जी ने इस विषय पर जोर दिया कि अगला कदम इस ऊर्जा को लक्ष्य बनाकर करने, मापने योग्य और लगातार परिणामों में परिवर्तित करना होना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों को विशिष्ट नदियों, तालाबों, घाटों और अन्य जल निकायों की पहचान करने, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और जमीनी स्तर पर प्रत्यक्ष सुधार प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने महिलाओं, युवाओं, स्कूली बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और समाज के अन्य वर्गों को शामिल करने के महत्व पर भी बल दिया, जिससे जल संरक्षण और स्वच्छता एक बार की गतिविधियों के बजाय स्थायी जन आंदोलन बन सकें।

श्री पाटिल ने जल योद्धाओं को आपस में जुड़े रहने, नियमित तौर पर अपने कार्यों को साझा करने और देश के विभिन्न हिस्सों में लागू किए जा रहे सफल मॉडलों से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि अच्छी स्थानीय पहलों को एक ही स्थान तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें उन सभी जगहों पर अपनाया और विस्तारित किया जाना चाहिए, जहां वे समुदायों को समान चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकें।

जल योद्धाओं ने मंत्री जी के आवास पर आमंत्रित किए जाने और उनसे सीधे अपनी कहानियां साझा करने के अवसर पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों से आए अन्य जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करने, अनुभवों का आदान-प्रदान करने, सामुदायिक लामबंदी के विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने और भविष्य में जुड़े रहने और सहयोग करने के तरीकों का पता लगाने के अवसर को भी महत्व दिया।

इस संवाद ने इस बात की पुष्टि की कि नदियों की रक्षा और जल संरक्षण केवल इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से ही संभव नहीं है। लगातार जन भागीदारी, श्रमदान, जिम्मेदार सामुदायिक व्यवहार और जमीनी स्तर पर प्रतिबद्ध नेतृत्व भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। बैठक के दौरान साझा किए गए अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ कि नागरिक, स्वयंसेवक और स्थानीय समुदाय स्वच्छ नदियों, संरक्षित जल संसाधनों और स्वच्छ एवं अधिक संपोषित पर्यावरण के लिए राष्ट्रीय प्रयासों में सशक्त भागीदार बन सकते हैं।

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पीके/केसी/आरटी/एमएम


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