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श्री राजीव गौबा ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ाने और विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण में सहयोग करने के लिए सुदृढ़ विनियमन, बाजार-उन्मुख सुधारों और संस्थागत क्षमता की बात दोहराई

प्रविष्टि तिथि: 01 OCT 2026 7:14PM by PIB Delhi

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में श्री राजीव गौबा ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और विकसित भारत@2047 की दिशा में देश की प्रगति में सहयोग देने में विनियमन, बाजार-उन्मुख सुधारों और संस्थागत क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर तेजी से जटिल होते वैश्विक वातावरण में काम करते हैं, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति में परेशानियां और ऊर्जा सुरक्षा के बढ़ते जोखिम शामिल हैं।

भारत की विनियामक यात्रा के बारे में बात करते हुए, उन्होंने याद दिलाया कि कैसे यह सेक्टर स्वतंत्रता के समय औपनिवेशिक काल के कानून और विदेशी स्वामित्व से दशकों तक राज्य नियंत्रण और प्रशासित मूल्य निर्धारण की ओर बढ़ा, इससे पहले कि 1990 के दशक के उत्तरार्ध से प्रगतिशील उदारीकरण ने 40 साल के नामांकन एकाधिकार को समाप्त किया और प्रशासित मूल्य निर्धारण तंत्र को ध्वस्त कर दिया।उन्होंने कहा कि 2006 में पीएनजीआरबी की स्थापना निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, निवेशकों के भरोसे और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम था।

उन्होंने प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों के लिए नियामक फ्रेमवर्क तैयार करने में पीएनजीआरबी के योगदान पर प्रकाश डाला और बताया कि इसके कॉमन कैरियर और कॉन्ट्रैक्ट कैरियर सिद्धांतों ने पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर तक खुली पहुंच सुनिश्चित करने में मदद की है, जिससे डाउनस्ट्रीम बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिला है। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि इस तरह का नियामक कार्य, भले ही आमतौर पर दिखाई न दे, लेकिन पूर्वानुमानित बाजार बनाने, निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और जनता के भरोसा जीतने के लिए जरूरी है।

श्री गौबा ने इस विषय पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए घरेलू ऊर्जा क्षमता का विविधीकरण और विस्तार देश की दीर्घकालिक रणनीति के महत्वपूर्ण तत्व हैं। शहरीकरण, औद्योगीकरण और जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ ऊर्जा की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए, उन्होंने प्रौद्योगिकी, निजी निवेश और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की क्षमताओं का लाभ उठाते हुए, विशेष रूप से सीमावर्ती और गहरे जल क्षेत्रों में, घरेलू स्तर पर खोज और उत्पादन में तेजी लाने की जरूरतों पर बल दिया।

उन्होंने भारत को गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करने की प्रक्रिया को गति देने के महत्व पर भी बल दिया। इसके लिए एक एकीकृत, कुशल और आर्थिक रूप से व्यवहार्य प्राकृतिक गैस मूल्य श्रृंखला की जरूरत होगी, जिसमें राष्ट्रीय गैस ग्रिड का सुदृढ़ीकरण, पाइपलाइनों और एलएनजी टर्मिनलों के उपयोग में सुधार करना और शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि गैरजरूरी बाधाओं को दूर करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि नियामक फ्रेमवर्क हाइड्रोजन, सिंथेटिक गैस और कार्बन डाइऑक्साइड पाइपलाइनों जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ तालमेल बनाए रखे, नियामक सुधारों को जारी रखना चाहिए।

पीएनजीआरबी की भावी भूमिका पर बोलते हुए, श्री गौबा ने इस विषय पर जोर दिया कि सुरक्षा और उपभोक्ताओं के संरक्षण को सर्वोपरि रखते हुए, नियमों को तकनीकी बदलाव और नए व्यावसायिक मॉडलों के साथ-साथ विकसित होना चाहिए। उन्होंने नियामक पूर्वानुमान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और लगातार सुधार को बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।

उन्होंने इस विषय पर और जोर दिया कि नियामक स्वतंत्रता के साथ-साथ पारदर्शिता, तर्कसंगत निर्णय लेने की क्षमता और जवाबदेही भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नियामकों की यह जिम्मेदारी है कि वे व्यापक राष्ट्रीय नीति उद्देश्यों के अनुरूप रहते हुए निष्पक्ष रूप से कार्य करें।

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पीके/केसी/आरटी/एमएम


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