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नौसेना कमांडरों के सम्मेलन-2026 के दूसरे संस्करण का समापन

प्रविष्टि तिथि: 02 OCT 2026 11:30AM by PIB Delhi

वर्ष में दो बार आयोजित होने वाले नौसेना कमांडरों के सम्मेलन-2026 का दूसरा संस्करण 29 सितंबर से 1 अक्टूबर, 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया। यह उच्चस्तरीय सम्मेलन नौसेना की परिचालन और रसद संबंधी तैयारियों की व्यापक समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच रहा है। तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एन.एस. राजा सुब्रमण्यम और थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने नौसेना कमांडरों के साथ संवाद किया। (https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2316492®=3&lang=1 )

इस सम्मेलन में नौसेना कमांडरों ने परिचालन तैयारियों, रसद एवं रखरखाव से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं तथा प्रशिक्षण और मानव संसाधन प्रबंधन में किए गए सुधारों पर चर्चा की। इन विषयों पर बदलती वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों और प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रही प्रगति को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श किया गया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने तथा स्वायत्त और मानवरहित प्रणालियों की बढ़ती भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने तथा सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 

 

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमण्यम ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा में भारतीय नौसेना की रणनीतिक क्षमता बढ़ाने वाली शक्ति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति नौसेना की परिचालन प्रतिबद्धता तथा प्रौद्योगिकी को अपनाने और स्वदेशीकरण की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। साथ ही, उन्होंने प्रौद्योगिकी आधारित बदलाव, सुदृढ़ता और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी बल दिया।

 

 

थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना की तैयारियों की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी।

 

 

कमांडर सम्मेलन के दौरान हुई प्रमुख चर्चाओं में युद्ध के लिए तैयार, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम सैन्य बल के निर्माण पर जोर दिया गया। इसके लिए संयुक्त कार्यप्रणाली, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और रणनीतिक तालमेल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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पीके/केसी/आरटी/एनके


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