कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्मिक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयों में ‘विशेष स्वच्छता अभियान 6.0’ का शुभारंभ किया, जिससे स्वच्छता का दायरा बढ़कर दक्षता और संसाधन प्रबंधन के एक व्यापक अभियान में बदल गया


स्वच्छता, साफ-सफाई अभियान से आगे बढ़कर सुशासन, संसाधनों के बेहतर सदुपयोग और जन-सेवा की स्थायी संस्कृति बन गई है: डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपये की कमाई हुई और पांच वर्षों में कार्यालयों के भीतर 1,049 लाख वर्ग फीट से अधिक का स्थान खाली कराया गया

इस अभियान को डीओपीटी-डीएआरपीजी, सीएसआईआर मुख्यालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में आगे बढ़ाया गया; 100 से अधिक विज्ञान संस्थान इस मुहिम में शामिल हुए

सीएसआईआर की ‘कचरे से संपदा’ संबंधी तकनीकें कचरा प्रबंधन को महज निपटान से आगे ले जाकर संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, नवाचार और मूल्य सृजन तक पहुंचा रही हैं

प्रविष्टि तिथि: 02 OCT 2026 5:31PM by PIB Delhi

केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ‘विशेष अभियान 6.0’ के कार्यान्वयन चरण का शुभारंभ  करते हुए कहा कि स्वच्छता अब महज साफ-सफाई की अपील से आगे बढ़कर सुशासन, सार्वजनिक संसाधनों के कुशल उपयोग, लंबित मामलों में कमी और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन की एक स्थायी संस्कृति बन गई है।

वर्ष 2014 में लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता के आह्वान को याद करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल धीरे-धीरे एक जन-आंदोलन में बदल गई और बाद में सरकारी कार्यालयों में एक संस्थागत प्रक्रिया बन गई। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने - शौचालयों एवं साफ-सफाई से लेकर पुरानी फाइलों, बेकार फर्नीचर, ई-फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निपटान तक - लगातार नए आयाम हासिल किए हैं और इस तरह स्वच्छता को प्रशासनिक दक्षता, सार्वजनिक जगह के बेहतर सदुपयोग और संसाधनों के सार्थक प्रबंधन से जोड़ा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिन की शुरुआत ‘प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी)’ द्वारा निर्धारित स्थल पर ‘विशेष अभियान 6.0’ के शुभारंभ संबंधी कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर की। उन्होंने श्रमदान किया, ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत पौधे लगाए और पुराने रिकॉर्ड को हटाने के काम की प्रतीकात्मक शुरुआत की। इसके अलावा, उन्होंने सफाई मित्रों को सुरक्षा किट और मिठाइयां देकर सम्मानित भी किया।

इस अवसर पर, डीएआरपीजी की सचिव श्रीमती निवेदिता शुक्ला वर्मा, डीओपीटी की सचिव श्रीमती रचना शाह और नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्रकुमार बागड़े सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। डीएआरपीजी इस विशेष अभियान के लिए नोडल विभाग है।

इसके बाद, केन्द्रीय मंत्री सीएसआईआर मुख्यालय गए, जहां उन्होंने वैज्ञानिक और तकनीकी इकोसिस्टम में ‘विशेष अभियान 6.0’ को आगे बढ़ाया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक व्यापक सफाई अभियान का नेतृत्व किया, ‘स्वच्छता सिग्नेचर कैंपेन’ और पौधारोपण अभियान में हिस्सा लिया और सफाई मित्रों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलाईसेल्वी; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर उमेश वी. वाघमारे; और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले के साथ-साथ डीएसटी, डीबीटी और सीएसआईआर के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। 'जन भागीदारी' पर विशेष जोर देते हुए, सीएसआईआर में की गई विभिन्न गतिविधियों में पुराने रिकॉर्ड एवं कबाड़ की समीक्षा तथा निपटान, कार्यस्थल में सुधार और कार्यालय की जगहों का बेहतर प्रबंधन शामिल था।

शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि शुरू में महज साफ-सफाई पर केन्द्रित रहने वाला स्वच्छता अभियान कैसे धीरे-धीरे सरकारी कार्यालयों तक पहुंचा और वहां जमा अनावश्यक तथा कीमती जगह को घेरे रहने वाले फाइलों एवं रिकॉर्ड की समस्या को हल किया। उन्होंने याद दिलाया कि बाद में यह पहल 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलने वाले एक विशेष वार्षिक अभियान में बदल गई, जिसमें हर बार नए पहलू जोड़े गए। कागजी फाइलों और बेकार फर्नीचरों से आगे बढ़कर, अब इसमें ई-फाइलें और ई-कचरा भी शामिल हो गए हैं। यह सरकारी कार्यालयों के बदलते स्वरूप और इलेक्ट्रॉनिक परिसंपत्तियों के जिम्मेदार प्रबंधन की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस विशेष अभियान के अनुभव से यह साबित हुआ है कि बेकार सामान को व्यवस्थित तरीके से हटाने से सरकारी खजाने के लिए आर्थिक लाभ अर्जित हो सकता है और सरकारी कार्यालयों में उपयोग लायक जगह भी निकल सकती है। पिछले पांच  वर्षों में, ई-कचरा और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपये की कमाई हुई है, जबकि कार्यालयों के भीतर 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक की जगह को खाली करके उसे उपयोग में लाया गया है। साथ ही, 180.48 लाख से अधिक फाइलों को बंद किया या हटाया गया है और देश भर में 24.20 लाख सफाई वाली जगहों की पहचान करके उनकी सफाई की गई है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस अभियान के जरिए खाली हुई जगह का बाद में सार्थक उपयोग किया जा सकता है। जैसे कि हरित क्षेत्र (ग्रीन एरिया) बनाना और ऐसी जगहों को फिर से ठीक करना, जो अवरुद्ध पड़ी थीं या जिनका पूरा उपयोग नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि इस वार्षिक अभियान ने जहां एक ऐसी कार्यपद्धति के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता दर्शायी है जिसे पूरे वर्ष जारी रहना चाहिए, वहीं बार-बार चलाए गए इन अभियानों ने स्वच्छता को सरकारी संस्थानों की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाने में मदद की है।

इसके बाद केन्द्रीय मंत्री ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का दौरा किया, जहां ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत पृथ्वी भवन और मौसम भवन से ई-कचरा और बेकार हो चुके उपकरणों को हटाने या निपटाने का कार्य किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला मौजूद थे और उन्होंने केन्द्रीय मंत्री को उन चीजों के बारे में जानकारी दी जिन्हें हटाने या निपटाने के लिए चुना गया था।

इस भंडार में कुल 705 वस्तुएं शामिल हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में यह कवायद वैज्ञानिक इकोसिस्टम में चल रहे एक बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत पृथ्वी विज्ञान, सीएसआईआर और डीएसटी के अंतर्गत आने वाले संस्थानों में भी इसी प्रकार  की गतिविधियां की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 100 से अधिक विज्ञान संस्थानों ने 2 अक्टूबर से यह अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य देश के वैज्ञानिक संस्थानों में स्वच्छता और बेकार हो चुके सामान के व्यवस्थित तरीके से निपटान का संदेश पहुंचाना है।

केन्द्रीय मंत्री ने इस अभियान को भारत के वैज्ञानिक इकोसिस्टम के ‘कचरे से संपदा’ वाले बड़े पहलू से भी जोड़ा। इसमें कचरे को महज निपटाने से आगे बढ़कर ऐसी तकनीक विकसित करने का लक्ष्य है, जो कचरे को उपयोगी उत्पादों, सामग्रियों, ऊर्जा और नए आर्थिक अवसरों में बदल सकें। सीएसआईआर के पोर्टफोलियो में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण, ई-कचरे से जरूरी धातुओं और दुर्लभ खनिजों को निकालने, लिथियम-आयन बैटरी का पुनर्चक्रण, बायोमेथेनेशन, खेती-बाड़ी के कचरे को जैव-अपघटित उत्पादों में बदलने, अपशिष्ट जल से संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और औद्योगिक कचरे का उपयोग करके मूल्य-वर्धित उत्पाद बनाने की तकनीक शामिल हैं। इन तकनीक को उपयोग और आगे के विकास हेतु उद्योग जगत और अन्य संगठनों को सौंपा गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 'विशेष अभियानों' के अनुभव यह दर्शाते हैं कि कैसे सफाई का कोई अभियान धीरे-धीरे प्रशासनिक सुधार, संसाधनों के बेहतर सदुपयोग और संस्थागत दक्षता  बढ़ाने का जरिया बन सकता है। वैज्ञानिक क्षेत्र में, इस सोच को ऐसी तकनीकों के जरिए और आगे बढ़ाया जा रहा है जो कचरे को एक ऐसी बड़ी मूल्य श्रृंखला से गुजरने में मदद करती हैं जिसमें कचरे की पहचान एवं निपटान से लेकर उसकी पुनर्प्राप्ति, पुनर्चक्रण, नवाचार और संपदा के सृजन तक के चरण शामिल हैं।

सितंबर में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा की गई तैयारी के बाद, ‘विशेष अभियान 6.0’ का कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। यह अभियान स्वच्छता, लंबित मामलों को कम करने, रिकॉर्ड की समीक्षा एवं उनको हटाने, कार्यालयों के भीतर जगह का कुशल उपयोग, ई-कचरा और बेकार सामानों का वैज्ञानिक तरीके से निपटान, और सरकारी कार्यालयों में बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन पर केन्द्रित है। इस अभियान को समग्र  सरकार के सामूहिक प्रयास के तौर पर लागू किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए संस्थागत लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

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पीके/केसी/आरटी/आर


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