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कचरा बीनने से उद्यमी तक


गरिमा और आत्मनिर्भरता की ओर एक यात्रा

प्रविष्टि तिथि: 05 OCT 2026 3:28PM by PIB Delhi

आर्थिक सहायता और स्थायी आजीविका के अवसरों तक पहुंच वंचित समुदायों को सशक्त बनाने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्वरोजगार और यंत्र के लिए सहायता से कम आय वाले श्रमिकों को आय के अधिक स्थिर स्रोतों की ओर बढ़ने, परिवार की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और काम की गरिमा को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

30 वर्षीय सुश्री मेकाला नंचारम्मा अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से संबंध रखती हैं। वह पिछले लगभग 12 वर्षों से गुंटूर नगर निगम में कूड़ा बीनने का काम कर रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने के कारण उन्हें कम उम्र में ही कूड़ा बीनने का काम करना पड़ा। घोर आर्थिक तंगी के कारण वे स्कूल नहीं जा सकीं और निरक्षर हैं। उनकी आजीविका काफी हद तक कूड़ा बीनने पर निर्भर थी, जिससे उन्हें सीमित और अनियमित आय होती थी और घर के खर्चों को पूरा करना तथा अपने बच्चों के लिए बेहतर अवसर सुरक्षित करना मुश्किल हो जाता था।

बुनियादी सुविधाओं और आवश्यक सेवाओं तक सीमित पहुंच वाले झुग्गी-झोपड़ीनुमा वातावरण में रहने से उनके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई। उन्हें अपनी कमजोर सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव का भी सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों के बावजूद, सुश्री नंचारम्मा अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने, अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर प्रदान करने और एक सुरक्षित भविष्य बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित रहीं।

सुश्री नंचारम्मा को नवजीवन संगठन के माध्यम से स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के तहत सहायता प्राप्त हुई, जो उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। दो सदस्यों की एक समूह परियोजना के तहत, ट्रैक्टर पर लगे खुले नाले की सफाई करने वाले यंत्र की खरीद के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई। परियोजना की कुल लागत 16,99,952 रुपए थी, जिसमें 10,24,964 रुपए का ऋण और 6,74,988 रुपए की पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी।

इस सहायता से सुश्री नंचारम्मा को कचरा बीनने के पारंपरिक काम से आगे बढ़कर अधिक संगठित और स्थायी आजीविका में शामिल होने का अवसर मिला। मशीनीकृत उपकरणों की मदद से उन्होंने प्रति माह अतिरिक्त 10,000 रुपए कमाना शुरू कर दिया। सहायता मिलने से पहले उनकी मासिक आय लगभग 8,000 रुपए थी, जो अब बढ़कर लगभग 18,000 रुपए हो गई है।

आय में वृद्धि से उसके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। अब वह घरेलू खर्चों को पूरा करने, बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने और परिवार के समग्र जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सक्षम है। आजीविका के इस अवसर ने उसकी आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को भी मजबूत किया है।

सुश्री नंचरम्मा ने सहायता के बारे में बताया कि स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत मिली सहायता ने मुझे कचरा बीनने के पारंपरिक काम से आगे बढ़कर अधिक स्थिर आय अर्जित करने में मदद की है। इसने मेरे परिवार की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत किया है और मुझे अधिक आत्मविश्वास और सम्मान प्रदान किया है।

सुश्री नंचारम्मा की कहानी दर्शाती है कि कैसे लक्षित वित्तीय सहायता, मशीनीकृत उपकरणों तक पहुंच और स्थायी आजीविका के अवसर कमजोर समुदायों को आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में मदद कर सकते हैं। अनियमित कूड़ा बीनने के काम पर निर्भरता से एक संगठित आजीविका में उनकी भागीदारी का परिवर्तन, सशक्तिकरण-उन्मुख हस्तक्षेपों की क्षमता को दर्शाता है जो एक गरिमापूर्ण और सुरक्षित भविष्य के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं।

आज की वित्तीय सहायता, कल की आत्मनिर्भरता

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पीके/केसी/आरटी/एचएन/एसक


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