कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
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आईआईसीए ने गांधी जयंती के अवसर पर तीसरा आईआईसीए सीएसआर दिवस मनाया, इस अवसर पर महानिदेशक एवं सीईओ ने एनसीसीएसआर 2026 से पहले आईआईसीए प्रमाणित सीएसआर पेशेवर कार्यक्रम के प्रतिभागियों को विशेष संबोधन दिया


एनसीसीएसआर 2026, 6-7 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जो सीएसआर पर संवाद, सहयोग और ज्ञान साझाकरण के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा

भारत में सीएसआर की नींव भारतीय परंपरा और ट्रस्टीशिप की अवधारणा में निहित है, और यह केवल कंपनी अधिनियम से ही उत्पन्न नहीं हुई है: ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, महानिदेशक और सीईओ, आईआईसीए

प्रविष्टि तिथि: 05 OCT 2026 7:28PM by PIB Delhi

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने हाल ही में महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर सीएसआर दिवस मनाया। आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने आईआईसीए सर्टिफाइड सीएसआर प्रोफेशनल प्रोग्राम के 11वें बैच के प्रतिभागियों को विशेष संबोधन दिया। आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट द्वारा आयोजित यह वर्चुअल सत्र, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (एनसीसीएसआर 2026) के उद्घाटन-पूर्व कार्यक्रम के रूप में भी आयोजित किया गया।

यह आयोजन वर्ष 2019 में राष्ट्रीय सीएसआर पुरस्कार समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा दिए गए सुझाव पर आधारित है, जिसमें उन्होंने 2 अक्टूबर को कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया था।। महात्मा गांधी की ट्रस्टीशिप की अवधारणा में निहित आईआईसीए सीएसआर दिवस, भारत के विकसित होते सीएसआर पारिस्थितिकी तंत्र पर संवाद, मान्यता, सहयोग और ज्ञान साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

महानिदेशक एवं सीईओ का स्वागत करते हुए, स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख और पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. गरिमा दाधीच ने कहा कि सीएसआर इकोसिस्टम को ऐसे प्रशिक्षित पेशेवरों की अधिक आवश्यकता है जो दायित्व को परिणाम में बदलने की क्षमता रखते हों। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसी उद्देश्य से कार्यक्रम को राष्ट्रीय सम्मेलन के पाठ्यक्रम से जोड़ा गया है और बताया कि एनसीसीएसआर 2026 में पूरे भारत से 550 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले चुके हैं।

अपने संबोधन में श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि 2 अक्टूबर और सीएसआर दार्शनिक रूप से जुड़े हुए हैं, क्योंकि भारत में सीएसआर की नींव भारतीय परंपरा और ट्रस्टीशिप की अवधारणा में निहित है, और यह केवल कंपनी अधिनियम से ही उत्पन्न नहीं हुई है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 166(2) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कानून स्वयं यह मान्यता देता है कि कोई कंपनी समाज के भीतर काम करती है और उसकी जिम्मेदारी केवल शेयरधारकों तक सीमित नहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों, समुदाय और पर्यावरण के प्रति भी है।

सीएसआर ढांचे के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनिवार्य सीएसआर की शुरुआत के पहले वर्ष में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के व्यय से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में यह करीब 35 हजार करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने शुरुआती “अनुपालन या स्पष्टीकरण” चरण से लेकर 2019 के संशोधनों और 2021 के नियमों तक की यात्रा का वर्णन किया, जिनमें अप्रयुक्त सीएसआर खाता, बहुवर्षीय परियोजनाएं, निधि उपयोग का प्रमाणीकरण और प्रभाव मूल्यांकन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सीएसआर को घाटे के वित्तपोषण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए जो केवल सरकारी खर्च को बढ़ावा देता है। इसका उद्देश्य कॉरपोरेट संसाधनों, तकनीक और विशेषज्ञता का उपयोग कर व्यापक प्रभाव पैदा करना तथा सामाजिक क्षेत्र में नए और नवाचारपूर्ण तरीकों को आजमाना है।

उन्होंने पाया कि सीएसआर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आपूर्ति-आधारित बना हुआ है, जिसमें परियोजनाओं का चयन परिचित क्षेत्रों, भौगोलिक परिस्थितियों और एजेंसियों के आधार पर किया जाता है। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी के साथ आवश्यकता-आधारित सीएसआर, आवश्यकता आकलन और सामाजिक प्रभाव आकलन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया और कार्यान्वयन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने मंत्रालय के सीएसआर एक्सचेंज पोर्टल को एक ऐसे मंच के रूप में उजागर किया, जिस पर जिला प्रशासन, संगठन और समुदाय कंपनियों के समक्ष दस्तावेजित आवश्यकताओं को रख सकते हैं, और साथ ही उन्होंने समान क्षेत्र की कंपनियों को उच्च प्रभाव वाली राष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए संसाधनों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

विकसित भारत के विषय पर उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को केवल अर्थव्यवस्था के आकार के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि "विकसित भारत के लिए विकसित सोच और विकसित सामाजिक चेतना की भी आवश्यकता है।" उन्होंने अपने संबोधन का समापन खर्च से परिवर्तन की ओर, अनुपालन से प्रतिबद्धता की ओर, रिपोर्टिंग से साक्ष्य की ओर और पृथक पहलों से सहयोग की ओर बढ़ने के आह्वान के साथ किया, जो प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी द्वारा समर्थित हो। उन्होंने प्रतिभागियों से इस सीएसआर दर्शन के दूत बनने का आग्रह किया।

एनसीसीएसआर 2026 का आयोजन 6-7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अशोक होटल में  विकसित भारत के लिए सीएसआर की भावना का पुनर्परिभाषित करना: अनुपालन से प्रतिबद्धता तक विषय पर किया जाएगा। इसका आयोजन आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट द्वारा किया जा रहा है और इसमें सरकार, कॉरपोरेट जगत, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, कॉरपोरेट फाउंडेशन, कार्यान्वयन एजेंसियों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एक साथ आएंगे।

दो दिनों तक चलने वाले पांच उच्च स्तरीय पैनलों और एक फायरसाइड चैट के साथ, सम्मेलन के साथ सीएसआर 2026 पर राष्ट्रीय प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना के अनुरूप चार विषयगत क्षेत्रों के आसपास व्यवस्थित 30-40 स्टॉल होंगे: युवा (शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार क्षमता), गरीब (आकांक्षी जिले, जनजातीय एवं वंचित समुदाय), अन्नदाता (कृषि और ग्रामीण आजीविका) और नारी शक्ति।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://iica.nic.in/csrconference/

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