सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में दूसरा प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन मेमोरियल लेक्चर आयोजित
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मेमोरियल लेक्चर का उद्घाटन किया
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने ‘संवेदना के साथ न्याय: कानून के पेशे में मानवीय समझ’ विषय पर व्याख्यान दिया
प्रविष्टि तिथि:
05 OCT 2026 9:42PM by PIB Delhi
डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (डीएआईसी) ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (सीएलईए) के साथ मिलकर, आज शाम राष्ट्रीय राजधानी में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में दूसरे प्रोफ़ेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मारकीय व्याख्यान (मेमोरियल लेक्चर) का आयोजन किया।
'संवेदना के साथ न्याय करना: कानून के पेशे में मानवीय समझ' विषय पर आधारित इस मेमोरियल लेक्चर में न्यायपालिका, कानूनी शिक्षा और कानूनी पेशे से जुड़े जाने-माने लोग शामिल हुए। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के मानवीय पहलुओं और न्याय देने में संवेदना, सहानुभूति और संवेदनशीलता के महत्व पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने किया।

मेमोरियल लेक्चर देते हुए, भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष, माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने न्याय व्यवस्था में मानवीय और दयालु दृष्टिकोण के महत्व की चर्चा की। इसके साथ ही, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दया का भाव कानून, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

इस कार्यक्रम में भारत के अटॉर्नी जनरल डॉ. आर. वेंकटरमणी ने विशेष रूप से प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन के जीवन, विज़न और उनके महत्वपूर्ण योगदान पर अपने विचार भी साझा किए।

भारतीय विधि संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर, सीएलईए के अध्यक्ष और भारत के 21वें विधि आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार ने भी सभा को संबोधित किया।

इस अवसर पर, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कानून के क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण पुस्तकों — ‘इंडियन पर्सनल लॉ: यूनिटी एंड डाइवर्सिटी’ और ‘इकोनॉमिक्स एंड लॉ इन कॉन्टेक्स्ट’ का विमोचन किया।

ये पुस्तकें प्रोफ़ेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार ने लिखी हैं और दूसरी पुस्तक में सौगत तालुकदार भी सह-लेखक हैं। दोनों पुस्तकों की प्रस्तावना भारत के उच्चतम न्यायालय के जाने-माने न्यायाधीशों ने लिखी है।
इन पुस्तकों का परिचय थॉमसन रॉयटर्स के प्रकाशक और साउथशोर इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गौरीशंकर नटेसन, गुरुग्राम में एसजीटी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ में एसोसिएट प्रोफेसर, सुश्री नबीला ज़हरा और और बर्दवान यूनिवर्सिटी के गवर्नमेंट सेंटर ऑफ़ लीगल एजुकेशन में विधि (लॉ) के सहायक प्रोफ़ेसर डॉ. सौगत तालुकदार ने दिया।
यह मेमोरियल लेक्चर प्रोफ़ेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन की यादगार विरासत को सम्मान देने के लिए आयोजित किया जाता है। वे कानूनी शिक्षा देने वाले, संस्थान बनाने वाले और एक ऐसे विद्वान थे, जिन्होंने भारत में कानूनी शिक्षा के विकास में क्रांतिकारी भूमिका निभाई।
इस लेक्चर का उद्देश्य कानून, न्याय और कानूनी शिक्षा के बदलते पहलुओं पर न्यायपालिका, कानून के विद्वानों, वकीलों और छात्रों के बीच बातचीत को बढ़ावा देकर उनकी बौद्धिक विरासत को बढ़ाना है।
इस कार्यक्रम में न्यायपालिका, कानूनी जगत, शिक्षा जगत के जाने-माने लोगों और छात्रों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम में एक संवेदनशील और मानवीय न्याय प्रणाली के लिए करुणा, सहानुभूति और मानवीय समझ के महत्व के बारे फिर से चर्चा की गई। इसके साथ ही, न्याय प्रशासन में कानून के शासन, संवैधानिक सिद्धांतों और निष्पक्षता को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
इससे पहले, डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक कर्नल आकाश पाटिल ने अपने स्वागत भाषण में विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कानून, न्याय और समाज से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर सार्थक शैक्षणिक और बौद्धिक चर्चा के लिए मंच तैयार करना महत्वपूर्ण है।
सीएलईए की संयुक्त महासचिव डॉ. रुचि शर्मा डी. ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया, जिसके साथ ही औपचारिक कार्यवाही संपन्न हुई।
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पीके/केसी/आरटी/एमके
(रिलीज़ आईडी: 2319442)
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