सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में 2nd प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मृति व्याख्यान आयोजित
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया स्मृति व्याख्यान का उद्घाटन
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने ‘करुणा के साथ न्याय: कानून के प्रयोग में मानवीय समझ’ विषय पर दिया व्याख्यान
प्रविष्टि तिथि:
06 OCT 2026 11:17AM by PIB Bhopal
डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र (DAIC) ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (CLEA) के सहयोग से आज शाम नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में 2nd प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया।

इस स्मृति व्याख्यान का विषय था— ‘करुणा के साथ न्याय करना: कानून के प्रयोग में मानवीय समझ’। इस कार्यक्रम में न्यायपालिका, कानून के क्षेत्र से जुड़े शिक्षाविदों और कानूनी पेशे से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में न्याय देने की प्रक्रिया में मानवीय पहलुओं तथा न्याय करते समय करुणा, सहानुभूति और संवेदनशीलता के महत्व पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया।

स्मृति व्याख्यान देते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष, माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने न्याय देने में मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि करुणा और संवेदनशीलता का प्रयोग हमेशा कानून, निष्पक्षता और संविधान के मूल्यों के आधार पर होना चाहिए।
कार्यक्रम में भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) डॉ. आर. वेंकटरमणी ने प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन के जीवन, उनके विचारों और कानून के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।
भारतीय विधि संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर, CLEA के अध्यक्ष और 21वें विधि आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कानून के क्षेत्र से जुड़ी दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। इन पुस्तकों के नाम हैं— ‘Indian Personal Law: Unity and Diversity’ और ‘Economics and Law in Context’।
दोनों पुस्तकों के लेखक प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार हैं। दूसरी पुस्तक ‘Economics and Law in Context’ के सह-लेखक सौगाता तालुकदार हैं। दोनों पुस्तकों की भूमिका (Foreword) भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिष्ठित न्यायाधीशों द्वारा लिखी गई है।
इन पुस्तकों का परिचय थॉमसन रॉयटर्स के प्रकाशक और साउथशोर इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री गोवर्धन नटेशन, SGT यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम की स्कूल ऑफ लॉ की सहायक प्रोफेसर सुश्री नबीला ज़हरा और यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान के गवर्नमेंट सेंटर ऑफ लीगल एजुकेशन में कानून के सहायक प्रोफेसर डॉ. सौगाता तालुकदार ने दिया।

यह स्मृति व्याख्यान प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन की स्थायी विरासत और उनके योगदान को याद करने के लिए आयोजित किया जाता है। वे भारत में कानूनी शिक्षा के क्षेत्र के एक महान शिक्षक, संस्थान बनाने वाले व्यक्ति और विद्वान थे। कानून की शिक्षा के विकास में उनका महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी योगदान रहा।
इस व्याख्यान का उद्देश्य उनके विचारों और विरासत को आगे बढ़ाना है। इसके माध्यम से न्यायपालिका, कानून के विद्वानों, वकीलों और कानून के विद्यार्थियों के बीच कानून, न्याय और कानूनी शिक्षा से जुड़े बदलते विषयों पर विचार-विमर्श को बढ़ावा दिया जाता है।
कार्यक्रम में न्यायपालिका, कानूनी क्षेत्र, शिक्षा जगत और कानून के विद्यार्थियों सहित कई प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में यह बात सामने आई कि एक प्रभावी और मानवीय न्याय व्यवस्था के लिए करुणा, सहानुभूति और मानवीय समझ बहुत जरूरी हैं। साथ ही, न्याय करते समय कानून के शासन, संवैधानिक मूल्यों और निष्पक्षता को बनाए रखना भी आवश्यक है।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र के निदेशक कर्नल आकाश पाटिल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कानून, न्याय और समाज से जुड़े वर्तमान विषयों पर सार्थक शैक्षणिक और बौद्धिक चर्चा के लिए ऐसे मंच तैयार करने के महत्व पर जोर दिया।
अंत में CLEA की संयुक्त महासचिव डॉ. रुचि शर्मा डी. ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और इसके साथ कार्यक्रम की औपचारिक कार्यवाही समाप्त हुई।
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(रिलीज़ आईडी: 2319458)
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