स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
मानवाधिकार और लैंगिक समानता पर एम्स में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम को लेकर चर्चा
प्रविष्टि तिथि:
06 OCT 2026 4:50PM by PIB Bhopal
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी और एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) के बीच एम्स में मानवाधिकार एवं लैंगिक समानता को लेकर व्यापक विचार विमर्श किया गया। कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि.) ने चर्चा के दौरान बताया कि आयोग द्वारा इस दिशा में किये गये नवाचार और सिद्धांत एम्स भोपाल की कार्यसंस्कृति और संस्थागत व्यवहार में पहले से ही अपनाये जा रहे हैं। चर्चा में मानवाधिकार संबंधी व्यवस्थाओं, लैंगिक समानता और संवेदनशीलता से जुड़ी पहलों को और मजबूत बनाने को लेकर संवाद किया गया।
डॉ कोतवाल ने आश्वस्त किया कि विशेष मॉनिटर द्वारा दिए गए सुझावों और दृष्टिकोणों पर विचार के साथ ही संस्थान आवश्यकतानुसार यथासंभव बेहतर तरीके से ढंग से अपनाने और लागू करने का प्रयास करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकारों का सम्मान केवल संस्थागत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के आचरण और मूल्य-व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने गरिमा, समानता, सम्मान और समावेशिता की संस्कृति को बढ़ावा देने की एम्स भोपाल की प्रतिबद्धता दोहराई।
चर्चा में संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी), की अध्यक्ष प्रो. (डॉ) रश्मि चौधरी ने विस्तृत प्रस्तुति देते हुये समिति द्वारा लैंगिक संवेदनशीलता के लिये किये गए नवाचार और इस दिशा में की गई जागरूकता की गतिविधियों की जानकारी दी। प्रस्तुति में संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और कर्मचारियों के लिए आयोजित कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया। प्रो. (डॉ) रश्मि चौधरी ने प्रस्तुति के माध्यम से संस्थान में समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव की संस्कृति को बढ़ावा देने के समिति के प्रयासों को भी रेखांकित किया। चर्चा में लैंगिक समानता, कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार, यौन उत्पीड़न की रोकथाम और सुरक्षित, समावेशी एवं गरिमामय वातावरण बनाने पर विशेष जोर दिया गया।व्यापक विचार विमर्श में इस बात पर सहमति रही कि लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा संस्थान के कामकाज का अभिन्न अंग बनी रहना चाहिये।
बैठक में विद्यार्थियों के लिए मानवाधिकार और लैंगिक समानता पर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी विचार किया गया। मानवाधिकार एवं लैंगिक समानता के दृष्टिकोण को अपनाने के लिये सम्मेलनों, शैक्षणिक कार्यक्रमों और विद्यार्थी गतिविधियों के आयोजन के साथ ही संबंधित मानवाधिकार विषयों पर शोध और प्रकाशन को प्रोत्साहित करने को लेकर चर्चा की गई। चर्चा में ग्रामीण, जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में भाषाई और सांस्कृतिक बाधाओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए आउटरीच (जनसंपर्क) कार्यक्रमों के माध्यम से मानवाधिकार जागरूकता का विस्तार की महत्ता भी प्रतिपादित की गई।
बैठक में चर्चा के दौरान आंतरिक शिकायत समिति (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए गठित समिति) के सदस्य, अधिष्ठाता (अकादमिक), चिकित्सा अधीक्षक, सह-अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) के अलावा अन्य संबंधित अधिकारी और हितधारक भी शामिल हुए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने एम्स के विभिन्न विभागों का अवलोकन किया और मरीजों के साथ परिजनों से भी संवाद किया।
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MG/PD/AV
(रिलीज़ आईडी: 2319658)
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